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Pradosh Vrat 2026: माघ मास का पहला प्रदोष व्रत कब है? ज्योतिषाचार्य से जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन का महत्व

Updated at : 05 Jan 2026 8:41 PM (IST)
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Pradosh Vrat 2026

शुक्र प्रदोष व्रत 2026

Pradosh Vrat 2026: माघ माह का प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, इस दिन श्रद्धा और विधि से पूजा करने पर रोग, दोष और कष्टों से मुक्ति तथा मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते है माघ मास का पहला प्रदोष व्रत कब है.

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Pradosh Vrat 2026: माघ मास का पहला प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को है. हर माह में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अलग-अलग नाम और महत्व है. माघ मास का प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन होने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत होगा. शुक्र प्रदोष व्रत को करने से संतान सुख प्राप्त होता है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं. प्रदोष व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है, जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है. जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है.

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय

ज्योतिषाचार्य एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है, जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं, वह समय शिव पूजा के लिये सर्वश्रेष्ठ होता है. जब प्रदोष का दिन शुक्रवार को पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष के नाम से जाना जाता है. शुक्र प्रदोष व्रत सौन्दर्य, भोग, वैवाहिक सुख तथा धन-सम्पदा की प्राप्ति के लिए किया जाता है. यह व्रत स्त्रियों के लिये विशेष रूप से कल्याणकारी है. इस व्रत से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है तथा घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है.

शुक्र प्रदोष व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त

  • माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 15 जनवरी 2026 की शाम 08 बजकर 16 मिनट पर
  • माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन: 16 जनवरी 2026 की रात 10 बजकर 21 मिनट पर
  • शुक्र प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.
  • शुक्र प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त: 16 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार की शाम 05 बजकर 47 मिनट से 08 बजकर 29 मिनट पर
  • शुक्र प्रदोष व्रत पूजा अवधि: 02 घण्टे 42 मिनट
  • शुक्र प्रदोष व्रत पारण का शुभ समय: 17 जनवरी 2026 दिन शनिवार की सुबह 06 बजकर 40 मिनट के बाद

प्रदोष व्रत पूजा विधि (प्रात: काल)

  • माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें.
  • बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से भगवान शिव की पूजा करें.
  • हाथ में जल व पुष्प लेकर भगवान शिव से पूरी श्रद्धा से व्रत करने का संकल्प लें.
  • दिनभर फलाहार करते हुए शाम को प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करें.

प्रदोष व्रत पूजा विधि (प्रदोष काल)

  • दिनभर उपवास रखने के बाद सूर्यास्त के समय स्नान कर वस्त्र धारण करें.
  • आप स्वच्छ जल या गंगा जल से पूजा स्थल को शुद्ध कर लें.
  • अब आप गाय का गोबर ले और उसकी मदद से मंडप तैयार कर लें.
  • पांच अलग-अलग रंगों की मदद से आप मंडप में रंगोली बना लें.
  • आप उतर-पूर्व दिशा में मुंह करके कुशा के आसन पर बैठ जाएं.
  • भगवान शिव के मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप करें और शिव को जल चढ़ाएं.

प्रदोष व्रत में शाम की पूजा कैसे करें?

भगवान शिव-पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बिल्व पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग और इलायची चढ़ाएं. फिर से स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें.

प्रदोष व्रत में वर्जित कार्य

  • माघ मास की त्रयोदशी तिथि के दिन उपवास रखें या फलाहार करें.
  • मन, वचन और कर्म से संयम रखें. क्रोध, निंदा और असत्य से दूर रहें.
  • किसी के प्रति कटु वचन न बोलें. झूठ, चुगली, ईर्ष्या और विवाद से बचें.
  • मांस, मछली, अंडा, मदिरा, लहसुन-प्याज का सेवन न करें.

प्रदोष काल में शिव पूजन

  • सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजा करें.
  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र अर्पित करें.
  • धूप-दीप जलाएं और सफेद फूल अर्पित करें.

मंत्र जाप

“ॐ नमः शिवाय”
“महामृत्युंजय मंत्र”
रुद्राष्टक या शिव चालीसा का पाठ करें.

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान शिव की अराधना करने से जातक के सारे कष्ट दूर होते हैं. शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता लक्ष्मी की कृपा पाने, वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने, सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि करने, सभी रोगों और दोषों से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष माना जाता है.

चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिषाचार्य एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ
Mo- +91 8620920581

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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