खरमास 2026: आज से एक महीने तक नहीं होंगे कोई भी शुभ कार्य, जानें क्या है कारण

Edited by Neha Kumari
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सूर्य देव (एआई निर्मित तस्वीर)

Kharmas 2026: रविवार से खरमास का आरंभ हो रहा है, जो कि पूरे एक महीने तक चलेगा. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश समेत अन्य कोई भी शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है. यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम है.

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Kharmas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में दो बार ऐसी अवधि आती है जब सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करते हैं. इस समय को खरमास कहा जाता है. साल 2026 में पहला खरमास 15 मार्च, रविवार से लगने जा रहा है, जो कि 14 अप्रैल, मंगलवार को समाप्त होगा. ज्योतिषीय दृष्टि से खरमास को शुभ नहीं माना जाता. हिंदू धर्म में खरमास के दौरान विवाह या किसी अन्य मांगलिक कार्य करना वर्जित है.

खरमास में शुभ कार्य क्यों रुक जाते हैं?

हिंदू धर्म में बृहस्पति को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है. जब सूर्य अपने गुरु बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे गुरु के प्रभाव को कम कर देते हैं. गुरु के ‘अस्त’ या कमजोर होने की स्थिति में किए गए मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि का पूर्ण फल नहीं मिलता. इसके साथ ही शादी और अन्य शुभ कार्यों में बाधाएं आने की संभावना रहती है.

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं. निरंतर चलने के कारण उनके घोड़े थक जाते थे. तब सूर्य देव ने घोड़ों को आराम देने के लिए एक तालाब के पास दो गधों (खर) को रथ में जोत लिया. गधों की गति धीमी होने के कारण सूर्य का तेज कम हो गया और उनकी गति मंद पड़ गई. इस कारण इस एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता है. कहते हैं कि इस समय सूर्य का तेज कम होने के कारण किए गए शुभ कार्य का फल पूर्ण रूप से नहीं मिलता.

खरमास से जुड़े जरूरी नियम

खरमास में क्या करें?

भले ही इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है.

  • दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत फलदायी होता है.
  • सूर्य उपासना: प्रतिदिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें.
  • विष्णु पूजा: इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है.
  • पवित्र स्नान: संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करें या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें.

खरमास में क्या न करें?

  • विवाह: इस दौरान शादी, रोका या सगाई जैसी रस्में नहीं की जातीं.
  • गृह प्रवेश और निर्माण: नए घर में प्रवेश करना या घर की नींव रखना वर्जित है.
  • मुंडन व संस्कार: बच्चों का मुंडन या जनेऊ संस्कार इस अवधि में न करें.
  • नया व्यापार: नई दुकान खोलना या किसी बड़े व्यापारिक प्रोजेक्ट की शुरुआत करने से बचें.
  • बड़ी खरीदारी: नया वाहन, जमीन या मकान खरीदना शुभ नहीं माना जाता.

यह भी पढ़ें: मीन संक्रांति से शुरू होगा खरमास, जानें शुभ उपाय

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लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वे धर्म, ज्योतिष, राशिफल, व्रत-त्योहार, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं. उनकी विशेष रुचि धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय विश्लेषण और दैनिक राशिफल को सरल, सटीक और पाठक-हितैषी भाषा में प्रस्तुत करने में है. नेहा का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धर्म, संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों को आसानी से समझ सकें. उनकी लेखन शैली शोध-आधारित, सरल और स्पष्ट है, जो जटिल विषयों को भी सहज और रोचक बना देती है. वे राशिफल, ग्रह-गोचर, व्रत-त्योहार, धार्मिक मान्यताओं, वास्तु, पौराणिक प्रसंगों और भारतीय रीति-रिवाजों से संबंधित विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखती हैं. डिजिटल पत्रकारिता में उनकी रुचि पाठकों की जरूरतों को समझते हुए जानकारीपूर्ण, SEO-अनुकूल और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में है.

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