Kali Puja 2025: गुड़हल के फूल के बिना अधूरी है काली पूजा, जानें माता को क्यों प्रिय है यह फूल

Published by : Neha Kumari Updated At : 15 Oct 2025 10:44 PM

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Kali Puja 2025: इस साल काली पूजा 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन घरों में माता काली की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन पूजा के दौरान लाल गुड़हल का फूल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है. चलिए जानते हैं माता काली को लाल गुड़हल के अर्पित करने के पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में.

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Kali Puja 2025: काली पूजा बंगाल, उड़ीसा और असम में दिवाली की रात मनाया जाने वाला एक विशेष हिंदू धर्म का पर्व है. इस दिन माता दुर्गा के उग्र स्वरूप मां काली की पूजा की जाती है. माता काली को मां चंडी के नाम से भी जाना जाता है. वह शक्ति, साहस और सौंदर्य की देवी मानी जाती हैं. माना जाता है कि जो भी इस दिन सच्चे मन से माता की आराधना करता है, उस पर माता की कृपा सदा बनी रहती है. काली पूजा में कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जिनमें से एक है लाल गुड़हल का फूल. कहा जाता है कि इस फूल के बिना माता की आराधना अधूरी है. आइए जानते हैं कि काली माता की पूजा में लाल गुड़हल के फूल को इतना अधिक महत्व क्यों दिया जाता है.

काली पूजा में गुड़हल फूल का महत्व क्या है?

काली पूजा में लाल गुड़हल फूल का विशेष महत्व है. माना जाता है कि लाल गुड़हल का फूल माता काली को सबसे अधिक प्रिय है. यह फूल वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, काली पूजा के दिन भक्तों को 108 गुड़हल के फूल माता को अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

माता को गुड़हल का फूल अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • माता को अर्पित करने वाला फूल मुड़ाया हुआ या सूखा नहीं होना चाहिए.
  • हमेशा ताज़ा फूल ही चढ़ाएं.
  • फूल कहीं से टूटा हुआ न हो, इस पर विशेष ध्यान दें.
  • सबसे पहले फूल माता के चरणों में अर्पित करें, उसके बाद उन्हें फूल पहनाएं.
  • फूल अर्पित करने से पहले उसे एक बार पानी से धो लें, ताकि उस पर लगी धूल या मिट्टी साफ हो जाए.

काली पूजा कब है?

वर्ष 2025 में काली पूजा 20 अक्टूबर को पड़ रही है.

काली पूजा का महत्व क्या है?

माना जाता है कि इस दिन माता की पूजा-अर्चना से भय और संकट का नाश होता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, शक्ति का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.

काली पूजा किस तिथि को मनाई जाती है?

पंचांग के अनुसार, काली पूजा हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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