Kalashtami 2025: आज कालाष्टमी, काल भैरव बाबा की कृपा से दूर होंगे भय और बाधाएं

Updated at : 11 Dec 2025 8:19 AM (IST)
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Kalashtami 2025 today

कालाष्टमी 2025 मुहूर्त

Kalashtami 2025: इस साल 2025 की पौष मासिक कालाष्टमी आज मनाई जा रही है. इस शुभ तिथि पर भगवान काल भैरव की आराधना से भय, संकट और जीवन की बाधाएं दूर होने का आशीर्वाद मिलता है. श्रद्धा और नियम के साथ किया गया व्रत साधक को साहस, सुरक्षा और शुभ फल प्रदान करता है.

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Kalashtami 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की रात्रि को कालाष्टमी का विशेष पूजन किया जाता है. इस बार पौष मासिक कालाष्टमी का पर्व आज 11 दिसंबर 2025, गुरुवार को मनाया जा रहा है. संयोग यह भी है कि आज ही मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी मनाई जाएगी, जिसका व्रत और पूजन करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है क्योंकि काल भैरव और श्रीकृष्ण दोनों की उपासना का पुण्य एक साथ मिलता है.

कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार पौष मास कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि

  • 11 दिसंबर 2025 दोपहर 01:57 बजे प्रारंभ
  • 12 दिसंबर 2025 दोपहर 02:56 बजे समाप्त

चूंकि कालाष्टमी की पूजा का विधान सायंकाल में है, इसलिए व्रत और पूजन आज 11 दिसंबर को ही किया जाएगा.

ये भी देखें: साल की अंतिम कालाष्टमी आज, जानें किस मुहूर्त में करें पूजा

कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की पूरी सफाई करें.
  • स्नान कर शुद्ध और साफ वस्त्र धारण करें.
  • घर के मंदिर को गंगाजल से पवित्र करें.
  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान काल भैरव और शिवजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  • भगवान काल भैरव को सफेद चंदन का तिलक लगाएं.
  • शिवजी और काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करें.
  • घी का दीपक जलाकर भैरव मंत्रों का जाप करें.
  • मिठाई और फल का भोग लगाएं.
  • हाथ जोड़कर अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें.
  • आरती करें और व्रत का संकल्प लें.
  • अंत में सूर्य देव को जल अर्पित कर पूजा समाप्त करें.

कालाष्टमी की पूजा का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि कालाष्टमी पर श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए व्रत और पूजन से काल भैरव और भगवान शिव दोनों प्रसन्न होते हैं. कहा जाता है कि भैरव उपासना से साधक के जीवन से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. यह व्रत जीवन की बाधाओं को समाप्त कर सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है. भैरव की कृपा से व्यक्ति अपने शत्रुओं और विरोधियों पर विजय प्राप्त करता है और आत्मबल बढ़ता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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