Kajri Teej Vrat Katha: आज है कजरी तीज, यह व्रत कथा पढ़े बिना पूजा रह जाती है अधूरी...

Updated at : 06 Aug 2020 10:31 AM (IST)
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Kajri Teej Vrat Katha: आज है कजरी तीज, यह व्रत कथा पढ़े बिना पूजा रह जाती है अधूरी...

Kajri Teej Vrat Katha: आज कजरी तीज है. आज के दिन सुहागिनें और कुंवारी लड़कियां व्रत रखकर माता पर्वती जी और नीमड़ी माता की पूजन करती हैं. इस दौरान व्रत कथा भी पढ़ी जाती है. माना जाता है कि अगर व्रत पूजन करते समय कजरी तीज की व्रत कथा की जाए तो बेहद फलदायी होता है. अगर आप भी आज कजरी तीज का व्रत कर रही हैं तो आप भी यहां पढ़ें कजरी या कजली तीज की पौराणिक व्रत कथा...

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Kajri Teej Vrat Katha: आज कजरी तीज है. आज के दिन सुहागिनें और कुंवारी लड़कियां व्रत रखकर माता पर्वती जी और नीमड़ी माता की पूजन करती हैं. इस दौरान व्रत कथा भी पढ़ी जाती है. माना जाता है कि अगर व्रत पूजन करते समय कजरी तीज की व्रत कथा की जाए तो बेहद फलदायी होता है. अगर आप भी आज कजरी तीज का व्रत कर रही हैं तो आप भी यहां पढ़ें कजरी या कजली तीज की पौराणिक व्रत कथा…

एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था जो बहुत गरीब था. उसके साथ उसकी पत्नी ब्राह्मणी भी रहती थी. इस दौरान भादो महीने की कजली तीज आई. ब्राह्मणी ने तीज माता का व्रत किया. उसने अपने पति से कहा कि मैं तीज माता का व्रत रखा है, उसे चने का सतु चाहिए. कहीं से ले आओ. ब्राह्मण ने ब्राह्मणी को बोला कि वो सतु कहां से लाएगा. सातु कहां से लाऊं. इस पर ब्राह्मणी ने कहा कि उसे सतु चाहिए फिर चाहे वो चोरी करे या डाका डालें, लेकिन सातु चाहिए…

रात का समय था. ब्राह्मण घर से निकलकर साहूकार की दुकान में घुस गया. उसने साहूकार की दुकान से चने की दाल, घी, शक्कर लिया और सवा किलो तोल लिया, फिर इन सब से सतु बना लिया. जैसे ही वो जाने लगा वैसे ही आवाज सुनकर दुकान के सभी नौकर जाग गए. सभी जोर-जोर से चोर-चोर चिल्लाने लगे, इतने में ही साहूकार आया और ब्राह्मण को पकड़ लिया. ब्राह्मण ने कहा कि वो चोर नहीं है. वो एक गरीब ब्राह्मण है. उसकी पत्नी ने तीज माता का व्रत किया है, इसलिए सिर्फ यह सवा किलो का सातु बनाकर ले जाने आया था, जब साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली तो उसके पास से सतु के अलावा और कुछ नहीं मिला.

उधर चांद निकल गया था और ब्राह्मणी सतु का इंतजार कर रही थी. साहूकार ने ब्राह्मण से कहा कि आज से वो उसकी पत्नी को अपनी धर्म बहन मानेगा. उसने ब्राह्मण को सातु, गहने, रुपए, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर दुकान से विदा कर दिया. फिर सबने मिलकर कजली माता की पूजा की, जिस तरह से ब्राह्मण के दिन सुखमय हो गए ठीक वैसे ही कजली माता की कृपा सब पर बनी रहे.

News posted by : Radheshyam kushwaha

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