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Janmashtami 2025: इस साल 15 या 16 अगस्त किस दिन मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, यहां जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Updated at : 08 Aug 2025 10:56 AM (IST)
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Janmashtami 2025 exact date

Janmashtami 2025 exact date (PC: Freepik)

Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 को लेकर इस बार तारीख को लेकर असमंजस है. भक्त यह जानना चाहते हैं कि उत्सव 15 अगस्त को मनाएं या 16 अगस्त को. यहां हम आपको बताएंगे सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जिससे आपका जन्माष्टमी पर्व शुभ और मंगलमय हो.

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Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह उत्सव भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन मंदिरों में भव्य झांकियां सजती हैं, भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि 12 बजे भगवान के जन्म का पर्व धूमधाम से मनाते हैं.

इस वर्ष 2025 में जन्माष्टमी की तारीख को लेकर थोड़ी उलझन है—कुछ स्थानों पर 15 अगस्त तो कुछ पर 16 अगस्त का उल्लेख मिल रहा है. आइए इस भ्रम को दूर करते हुए तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और नियमों की जानकारी प्राप्त करें.

जन्माष्टमी 2025 की तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि का आरंभ 15 अगस्त रात 11:49 बजे होगा और समापन 16 अगस्त रात 9:34 बजे.

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भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए प्रमुख निशीथ पूजा मुहूर्त 16 अगस्त की रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा.

अधिकांश श्रद्धालु 15 अगस्त की रात जन्मोत्सव मनाएंगे, जबकि कुछ स्थानों पर यह 16 अगस्त को भी आयोजित हो सकता है.

शुभ समय (Shubh Muhurat)

  • निशीथ पूजा मुहूर्त: 12:04 AM – 12:47 AM (16 अगस्त रात)
  • ब्रह्म मुहूर्त: 4:24 AM – 5:07 AM
  • विजय मुहूर्त: 2:37 PM – 3:30 PM
  • चंद्रोदय: 10:46 PM
  • सूर्योदय: 5:50 AM
  • सूर्यास्त: 7:00 PM
  • संध्याकाल: 7:00 PM – 7:22 PM

जन्माष्टमी पर पूजा विधि

  • घर की सफाई करके पूजा स्थल को फूल, दीप और सजावट से सुंदर बनाएं.
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और यथासंभव व्रत रखें.
  • भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें.
  • नये वस्त्र, चंदन, फूल, तुलसी दल और आभूषण अर्पित करें.
  • रात्रि 12 बजे शंख-घंटी बजाकर जन्मोत्सव का पूजन करें और आरती करें.
  • भजन, कीर्तन और श्रीकृष्ण की लीलाओं का पाठ करें, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास हो.
  • व्रत का पारण अगले दिन प्रसाद के साथ करें और सभी में बांटें.

जन्माष्टमी पर व्रत रखने का महत्व

भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम और भक्ति अत्यंत प्रिय है. जन्माष्टमी का व्रत शरीर और मन की शुद्धि कर, प्रभु को पूर्ण समर्पण का प्रतीक है. मान्यता है कि इस दिन उपवास और भक्ति से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है.

जन्मकुंडली, वास्तु और व्रत-त्योहार से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए संपर्क करें:

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594 / 9545290847

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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