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Jagannath Puri Rath Yatra 2020: नौ दिनों के विश्राम के बाद आज मुख्य मंदिर लौटेंगे भगवान जगन्नाथ, जानिए रथ यात्रा वापसी में किन नियमों का करना होगा पालन...

By Radheshyam Kushwaha
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पूरी जगन्नाथ यात्रा
पूरी जगन्नाथ यात्रा

Jagannath Puri Rath Yatra 2020: भगवान जगन्नाथ मौसीबाड़ी में नौ दिनों तक विश्राम करने के बाद आज बुधवार को मुख्य मंदिर लौटेंगे. उनके साथ बहन सुभद्रा एवं भाई बलराम भी रहेंगे. आज पूरी जगन्नाथ यात्रा का आयोजन किया जाएगा. कोरोना वायरस महामारी के कारण भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा वापसी उत्सव के दौरान भीड़ एकत्र होने से बचने के लिए पुरी प्रशासन ने दो दिन कर्फ्यू लागू करने की घोषणा की है. पूरे जिले में आज 2 जुलाई की रात 10 बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा. 'बाहुड़ा यात्रा' के नाम से मशहूर इस उत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ श्री मंदिर लौटते हैं.

पुरी में प्रवेश के सभी रास्ते सील रहेंगे और कर्फ्यू के समय में रथ यात्रा उत्सव में शामिल वाहनों के अलावा किसी और वाहन को अनुमति नहीं दी जाएगी. इस घोषणा के एक दिन पहले ही ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रथ यात्रा वापसी उत्सव को सफल बनाने के लिए लोगों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की थी. इस दौरान भीड़ इक्कठा नहीं होने की अपील की गई है.

मुख्यमंत्री ने की इन लोगों की तारीफ

पटनायक ने एक जुलाई को बहुदा यात्रा (भगवान जगन्नाथ की वापसी की रथ यात्रा) की तैयारियों की शुक्रवार को समीक्षा की. इस दौरान कोरोना वायरस प्रतिबंधों के बीच 23 जून को निर्बाध रथ यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 12वीं सदी के मंदिर के सेवकों, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की प्रशंसा की थी. मुख्यमंत्री ने 23 जून को रथयात्रा को सफल बनाने के लिए सरकार के साथ सहयोग करने और संयम बरतने के लिए पुरी वासियों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि भगवान की वापसी और अन्य अनुष्ठान भी इसी भावना के साथ आयोजित किए जाएं.’’

मुख्यमंत्री ने सभी अनुष्ठान समय पर सम्पूर्ण करने की अपील की. उन्होंने मंदिर एवं जिला प्रशासन से सख्ती से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोविड-19 की जांच में संक्रमित नहीं पाए जाने वाले लोगों को ही बहुदा यात्रा संबंधी अनुष्ठानों में भाग लेने और रथ खींचने की अनुमति दी जाए. पटनायक ने कर्फ्यू और लॉकडाउन लागू करने के लिए अग्रसक्रिय कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए पुलिस से अपील की कि वह मानवीयता के साथ अपना काम करे.

क्या है परंपरा

भगवान जगन्नाथ नौ दिन बाद मौसीबाणी से मख्य मंदिर पहुंचते है. रथ के रूप की बात करें तो जगन्नाथ उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा के तीन रथ बनाया जाता है. यह रथ लकड़ी के बने होते हैं. जगन्नाथजी के रथ को नंदीघोष, बलराम जी के रथ को 'तलध्वज' और सुभद्रा जी का रथ "देवदलन" है. तीनों रथों को जगन्नाथ मंदिर से खींच कर 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति गुंडीचा मंदिर तक लिया जाता है. गुंडीचा मंदिर 7 दिनों तक जगन्नाथ भगवान यहीं निवास करते हैं. इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी के दिन वापसी जिसे बाहुड़ा यात्रा कहते हैं. इस दौरान पुन: गुंडिचा मंदिर से भगवान के रथ को खिंच कर जगन्नाथ मंदिर तक लाया जाता है.

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