Govardhan Puja Katha: गोवर्धन पूजा के दिन करें कथा का पाठ, भगवान कृष्ण के आशीर्वाद से आएगी खुशहाली

Published by : Neha Kumari Updated At : 21 Oct 2025 9:10 PM

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Govardhan Puja Katha: गोवर्धन पूजा के दिन गोबर से बनाए गए पर्वत की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ यदि व्रत कथा का पाठ किया जाए, तो यह अत्यंत फलदायक सिद्ध होता है. यहां पढ़ें गोवर्धन पूजा की व्रत कथा.

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Govardhan Puja Katha: कल यानी 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी. यह सनातन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है. इस दिन विशेष रूप से गोबर का पर्वत बनाकर उसकी पूजा की जाती है. यह प्रकृति को सम्मान देने का प्रतीक है. इस दिन पूजा-पाठ के साथ इस पर्व से जुड़ी कथा का पाठ किया जाता है. कहा जाता है कि इस कथा के पाठ से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं. आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा की कथा.

गोवर्धन पूजा कथा हिंदी में (Govardhan Puja Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया था. भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में रहा करते थे. उस समय देवता इंद्र को अपनी शक्तियों पर बहुत घमंड था. एक दिन भगवान कृष्ण ने देखा कि गोकुल के सभी निवासी और उनकी माता पूजा-पाठ की तैयारियाँ कर रहे हैं. उन्होंने माता यशोदा से पूछा, “माता, आप लोग इतनी सारी तैयारियाँ किसके लिए कर रहे हैं?”

माता यशोदा ने बताया कि वे सभी भगवान इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे हैं. यह सुनकर भगवान कृष्ण ने पूछा, “माता, आप लोग भगवान इंद्र की पूजा क्यों करते हैं?” तब यशोदा माता ने कहा, “भगवान इंद्र वर्षा के देवता हैं. उनकी कृपा से अच्छी बारिश होती है, जिससे खेतों की सिंचाई होती है और फसलें अच्छी उपज देती हैं. तभी हमारी सभी गायें भी अच्छा चारा खा पाती हैं.”

यह सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “माता, यदि ऐसा है तो हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गायें तो वहीं चरती हैं और हमें वहाँ से ही चारा और जल मिलता है.” भगवान श्रीकृष्ण की यह बात सभी गोकुलवासियों को उचित लगी. उन्होंने देवराज इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा आरंभ कर दी.

यह देखकर देवराज इंद्र को बहुत क्रोध आया. उन्होंने गोकुलवासियों को दंड देने का निश्चय किया और मूसलाधार वर्षा करना शुरू कर दी. इससे गोकुलवासी भयभीत हो गए. तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सभी गोकुलवासियों को उसके नीचे शरण लेने को कहा. भगवान की इस लीला ने न केवल गोकुलवासियों की रक्षा की, बल्कि इंद्र का घमंड भी तोड़ दिया. अंत में भगवान इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार की और भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी. तभी से हर वर्ष गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हो गई.

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त कब शुरू होगा?

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर 2025 को सुबह 06:26 बजे से शुरू होकर 08:42 बजे तक रहेगा.

गोवर्धन पूजा को और किस नाम से जाना जाता है?

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है.

गोवर्धन पूजा कहां मनाई जाती है?

गोवर्धन पूजा मुख्य रूप से मथुरा, वृंदावन और बरसाना समेत कई अन्य स्थानों पर बड़े हर्षोल्लास से मनाई जाती है.

गोवर्धन पूजा कब की जाती है?

गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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