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कल मनेगी Diwali 2020, 5.40 से 8.15 बजे तक लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि, सामग्री व अन्य डिटेल

By Prabhat khabar Digital
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Diwali 2020, Start & end Date, Shubh Muhurat Time, Puja Vidhi, Mantra, Sonlathi Deep
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Diwali 2020, Start & end Date, Shubh Muhurat Time, Puja Vidhi, Mantra, Sonlathi Deep: दीपों का त्योहार दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस साल दिवाली 14 नवंबर यानी कल को मनायी जायेगी. दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. मान्यता है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी और श्री गणेश की पूजा करने से शांति, तरक्की और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है. दिवाली पर हरेक व्यक्ति माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं.

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त : 14 नवंबर को एक बजकर 16 मिनट तक चतुर्दशी रहेगा और फिर अमावस्या तिथि का प्रवेश हो जायेगा. यही कारण है कि 14 नवंबर को ही लक्ष्मी पूजन किया जायेगा. शाम के पांच बजकर 40 मिनट से लेकर रात आठ बजकर 15 मिनट का मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है. यह जानकारी पंडित संजय मिश्र ने दी. पंडित जी ने कहा कि इस शुभ मुहूर्त के समय लक्ष्मी-गणेश पूजा की जा सकती है.

पूजा की सामग्री

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा, रोली, कुमुकम, अक्षत (चावल), पान, सुपारी, नारियल, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी, दीपक, रूई, कलावा, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, फल, फूल, जौ, गेहूं, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, पंचामृत, दूध, मेवे, बताशा, जनेऊ, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टा की माला, शंख, थाली, आसन, हवन कुंड, हवन सामग्री, आम के पत्ते व प्रसाद की आवश्यकता होगी.

दुकानदार व व्यवासियों के लिए ये पूजा खास

लक्ष्मी व गणेश की पूजा हर छोटे व बड़े दुकानदार से लेकर छोटे से लेकर बड़े व्यवसायियों के द्वारा की जायेगी. इसके लिए दुकानदारों से अभी से तैयारी शुरू कर दी है. सभी व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों की रंगाई-पुताई के काम में लगे हैं. पूजा के दिन प्रतिष्ठानों को सजाया जायेगा तथा शुभ मुहूर्त पर पूजा कर दूसरे दिन प्रसाद का वितरण किया जायेगा.

शनिवार को दीपावली की रात में होगी काली पूजा

देवनगरी में 14 नवंबर को दीपावली के दिन अमावस्या तिथि पर रात में करीब पांच दर्जन से अधिक पूजा समितियों के द्वारा मां काली की पूजा का आयोजन किया जायेगा. इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. समितियों की ओर से कोविड महामारी को देखते हुए आमलोगों को पूजा मंडप व पंडाल में इंट्री नहीं कराने का निर्णय लिया गया है.

वहीं मंडपों में सैनिटाजर व मास्क की भी व्यवस्था रखी जायेगी. मां काली की पूजा रात में करीब आठ बजे से शुरू होकर देर रात दो बजे तक चलेगी. शहर में मुख्य रूप से बाबा मंदिर के भीतरखंड मंडप, घड़ीदार मंडप, बंगलापर मंडप, अभया दर्शन, बसंती मंडप, संगम समाज, हृदयापीठ मंडप, हरलाजोड़ी, श्मशान घाट, दक्षिण मशान, हाथी पहाड़, त्रिकुट पहाड़, पार्टनर ग्रुप सहित अन्य जगहों पर मां की प्रतिमा स्थापित कर प्राण-प्रतिष्ठा के साथ तांत्रिक विधि से माता की पूजा की जायेगी.वहीं रात में ही पूजा संपन्न होने के बाद कलश का विसर्जन भी रात में ही कर दिया जायेगा.

पितृहीन लोग जलायेंगे सोनलाठी

पूर्व से चली आ रही परंपरा अनुसार दीपावली की रात को लोग अपने घरों से मंत्रोच्चार के साथ सोनलाठी जलाकर बाबा मंदिर के सिंह द्वार या अपने घरों के नजदीकी चौराहे पर इसे गिरायेंगे. मान्यता है कि इस तरह करने से पूर्वजों को सालभर तक प्रकाश का एहसास होता है. इससे प्रसन्न होकर वे अपने वश्ंजों के जीवन काल में प्रकाश रहने का आशीष प्रदान करते हैं.

रविवार को घरों से निकाला जायेगा दरिद्रा

रविवार अहले सुबह दरिद्रा निकालने की परंपरा का निर्वहण किया जायेगा. चली आ रही परंपरा के अनुसार शनिवार की रात में लोग अपने-अपने घरों के आंगन या बालकोनी में पुराना सूप अथवा डाली व एक छड़ी को ईंटा से दाब कर रखेंगे. वहीं रविवार को सुबह उस डाली को छड़ी से पिटते ही दिरद्रा बहार रे, लक्ष्मी भीतर रे बोलते हुए घर के नजदीक चौराहे पर जलायेंगे. मान्यता है कि इससे घर में लक्ष्मी का आगमन होता है.

Posted By: Sumit Kumar Verma

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