Dhanteras 2025: आखिर आम के पत्ते और लकड़ी के बिना क्यों अधूरी होती है हर पूजा? जानें इनके पीछे छिपा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
Published by : Neha Kumari Updated At : 18 Oct 2025 4:02 PM
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Dhanteras 2025: हिंदू धर्म में आम के पेड़ को बहुत ही खास माना जाता है. हर एक त्योहार, पूजा-पाठ और हवन के दौरान आम के पत्तों और लकड़ियों का इस्तेमाल अवश्य किया जाता है. इस आर्टिकल में हम जानेंगे इसके पीछे छिपे धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में.
Dhanteras 2025: आज (18 अक्टूबर) धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दिवाली के महापर्व का शुभारंभ हो चुका है. यह दिन हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व रखता है. इस दिन कई लोग नए कारोबार की शुरुआत करते हैं, तो कई लोग सोना-चांदी, बर्तन, झाड़ू और अन्य घरेलू सामान खरीदकर इस पर्व को मनाते हैं. मान्यता है कि आज के दिन की गई खरीदारी और पूजा-पाठ धन-समृद्धि बढ़ाने और पूजा के फल को 13 गुणा बढ़ा देती है. ऐसे में लोगों को आज के दिन घर में विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए. पूजा की अन्य सामग्रियों में से एक है आम की लकड़ी. कहा जाता है कि आम की लकड़ी के बिना कोई भी पूजा अधूरी होती है. लोग पूजा के समय अवश्य ही आम के पत्तों और लकड़ी को अन्य सामग्रियों के साथ शामिल करते हैं.
पूजा में आम के पत्ते और लकड़ी इस्तेमाल करने का धार्मिक महत्व क्या है?
सकारात्मक ऊर्जा: हिंदू धर्म में आम के पेड़ को बेहद पवित्र माना गया है. आम के पेड़ से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु को आम के पेड़ की छाया में विश्राम करना बेहद पसंद है. इसलिए यदि पूजा के समय श्रद्धालु आम के पत्तों से बनी माला (तोरण) को घर के मुख्य द्वार पर लगाते हैं, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है.
भगवान हनुमान की कृपा: आम से जुड़ी एक अन्य धार्मिक मान्यता है कि आम का पेड़ भगवान हनुमान को बेहद प्रिय है. इसलिए यदि किसी भी पूजा या शुभ कार्य के समय आम के पत्ते या लकड़ी का उपयोग किया जाए, तो भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है.
वातावरण शुद्ध और पवित्र: हिंदू पर्वों में खासकर हवन के लिए आम की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. कहा जाता है कि इससे वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है, वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है, और मन को शांति मिलती है.
पूजा में आम के पत्ते और लकड़ी इस्तेमाल करने का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण: यदि धार्मिक दृष्टि से हटकर वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए, तो पता चलता है कि आम के पत्तों और लकड़ी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं, जो वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं और अशुद्धियों को कम करते हैं.
वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया का नाश: आम की लकड़ियों को जलाने पर फॉर्मिक एल्डिहाइड गैस निकलती है, जो वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करती है.साथ ही, अन्य लकड़ियों को जलाने पर निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की तुलना में आम की लकड़ी जलाने पर कम CO₂ निकलता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.
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By Neha Kumari
नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.
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