Chanakya Niti: बार-बार असफल होने वाले छात्रों को तुरंत मिलेगी सफलता, करना होगा ये काम

Author : Radheshyam Kushwaha Published by : Prabhat Khabar Updated At : 14 May 2020 1:33 PM

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Chanakya Niti: छात्र-छात्राओं को अपना अच्छा भविष्य बनाने के लिए कुछ चीजों का त्याग करना पड़ता है. चाणक्य ने सफलता पाने के लिए कई टिप्स दिये है. चाणक्य ने कहा है कि जो छात्र इन चीजों को नहीं छोड़ता है, वह विद्या जैसे महान धन का सही से अर्जित नहीं कर सकता. चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि विद्यार्थियों को अध्ययन के समय में कुछ सावधानिया रखनी चाहिए.

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Chanakya Niti: छात्र-छात्राओं को अपना अच्छा भविष्य बनाने के लिए कुछ चीजों का त्याग करना पड़ता है. चाणक्य ने सफलता पाने के लिए कई टिप्स दिये है. चाणक्य ने कहा है कि जो छात्र इन चीजों को नहीं छोड़ता है, वह विद्या जैसे महान धन का सही से अर्जित नहीं कर सकता. चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि विद्यार्थियों को अध्ययन के समय में कुछ सावधानिया रखनी चाहिए. उन्होंने चाणक्य नीति में कहा है कि किसी भी छात्र को देर तक नहीं सोना चाहिए. छात्र और संत एक समान होते है. संतों और छात्रों को एक जैसी नींद लेनी चाहिए, जिस तरह संत अपनी साधना को पूरा करने के लिए हमेशा उत्सुक रहते है, ठीक उसी तरह से विद्यार्थियों को भी अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए उत्सुक रहना चाहिए. छात्रों को हमेशा पौष्टिक भोजन खाना चाहिए. पौस्टिक खाना खाने से छात्रों के स्वास्थ्य के विकास के साथ-साथ बुद्धि का भी विकास होता है.

चाणक्य का कहना है कि छात्रों को कभी भी वरिष्ठ भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. छात्रों को कम भोजन करना चाहिए. वहीं, दिन में कई बार भोजन करना चाहिए. वरिष्ठ भोजन करने से उनकी शिक्षा में बाधा आ सकती है. जैसे, हर व्यक्ति के जीवन में समय का बहुत महत्व है. छात्रों को अपने सभी काम समय पर पूरा करने की आदत डालनी चाहिए. जो छात्र समय पर अपना काम पूरा करते हैं, वे अन्य छात्रों की तुलना में बेहतर और मेधावी हो जाते हैं.

छात्रों को शिक्षा के साथ नैतिकता का ज्ञान होना चाहिए

छात्र-छात्राओं के समुचित विकास के लिए किताबी शिक्षा के साथ ही नैतिकता का ज्ञान होना भी जरूरी है. इसके बिना सर्वांगीण विकास संभव नहीं है. चाणक्य ने कहा है कि सद्गुण के ज्ञान से ही शिक्षा की उपयोगिता बढ़ती है. पुण्य का ज्ञान एक छात्र को उस शिक्षा का उपयोग करने के लिए कहता है जो उसने प्राप्त की है. छात्र-छात्राओं को किसी भी काम को करने से पहले अपने लक्ष्य का पता लगाना चाहिए. एक छात्र की प्रतिभा को जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करके शिक्षा प्राप्त कर बढ़ाया जाता है. सभी छात्रों को समाज को ध्यान में रखते हुए अपना लक्ष्य चुनना चाहिए. चाणक्य के अनुसार छात्र-छात्राओं के जीवन में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है. इन नियमों की अनदेखी करने से कोई भी व्यक्ति सफलता नहीं पा सकता है. ऐसी स्थिति में, जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, चाणक्य नीति में छात्रों के लिए कुछ नियम हैं.

इन 06 बातों पर देना होगा ध्यान

– आचार्य चाणक्य ने कहा है कि विद्यार्थियों को कामवासना से दूर रहना चाहिए. अगर वह अनैतिक चीजों के बारे में सोचता रहा तो विद्या ठीक से प्राप्त नहीं कर सकता है. उसका अध्यन करने में बिल्कुल ही मन नहीं लगेगा.

– मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध होता है. क्रोध से व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है. क्रोध में रहने वाला व्यक्ति ठीक से पढ़ाई-लिखाई नहीं कर सकता है.

– लोभ इंसान को आगे ले जाने के बजाय पीछे ले जाता है. छात्र के लिए लालच पढ़ाई के लिए होना चाहिए, अन्यथा छात्र जीवन में लालच करना खराब परिणाम लाते हैं. छात्रों को लालच से दूर रहना चाहिए.

– चाणक्य ने बताया है कि छात्र को हमेशा संतुलित भोजन करना चाहिए. कुछ भी खा लेने से छात्र के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है, जिससे उसके अध्ययन में बाधा आ जाता है.

– छात्र जीवन में साधारण रहना चाहिए. छात्राओं को अधिक शृंगार नहीं करना चाहिए. साज-शृंगार में अगर ध्यान रहेगा तो अध्ययन में विघ्न आ जाएगा. छात्र का मन पढ़ाई में नहीं लगेगा और परिक्षा में अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं कर पाएगा.

– चाणक्य ने कहा है कि ऐसा नहीं है कि छात्रों को हर समय अध्ययन करते रहना चाहिए, उसको मनोरंजन के लिए खेल-कूद का सहारा लेना चाहिए. छात्र को आवश्यकता से अधिक खेलकूद में नहीं लगना चाहिए. इससे बचना चाहिए.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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