Basant Panchami Katha: आज सरस्वती पूजा के दिन जरूर सुनें ये कथा, बसंत पंचमी  पर हो रही है विशेष पूजा

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Basant Panchami Katha: आज सरस्वती पूजा के दिन जरूर सुनें ये कथा, बसंत पंचमी  पर हो रही है विशेष पूजा

Basant Panchami Katha : बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मां सरस्वती की विशेष पूजा का विधान है. मान्यता है कि आज के दिन यह कथा सुनने से विद्या, बुद्धि और वाणी में विशेष कृपा प्राप्त होती है। यहां से जानें सरस्वती पूजा की कथा.

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Basant Panchami Katha :  आज यानी 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व है. इस दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मां सरस्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. वे ज्ञान, वाणी और संगीत की देवी हैं और उन्होंने इसी सृष्टि को विद्या और कला से समृद्ध किया. हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी मनाई जाती है. इसे वागेश्वरी जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि मां सरस्वती का दूसरा नाम वागेश्वरी है.

आप जानते हैं कि सबसे पहली बार सरस्वती पूजा किसने की थी? ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने सबसे पहले मां सरस्वती की पूजा की थी. इस बात का ज़िक्र पौराणिक ग्रंथों जैसे हरिवंश पुराण, गर्ग संहिता और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है. कथा के अनुसार, राधा से विवाह के बाद, मां सरस्वती ने श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि उन्हें वरदान दें. श्रीकृष्ण ने कहा कि जो भी व्यक्ति माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को उनकी पूजा करेगा, उसे विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होगी. इसी के बाद से बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन की परंपरा शुरू हुई.

कथा में यह भी कहा गया है कि ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती को आवाहन किया था और वे प्रकट हुईं. उन्हें जब श्रीकृष्ण दिखाई दिए, तो उनका रूप देखकर मां सरस्वती मोहित हो गईं. उनके मन में भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने की इच्छा जागी, लेकिन श्रीकृष्ण तो अंतर्यामी थे. उन्होंने मां सरस्वती के मन की बात जान ली और कहा कि वे केवल राधा के प्रति समर्पित हैं. राधा माता लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और जैसे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु एक-दूसरे के पूरक हैं, उसी तरह राधा और श्रीकृष्ण का भी रिश्ता अद्वितीय है.

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इसलिए, माता सरस्वती की भक्ति में सफलता पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी इस दिन उनकी पूजा करेगा, उसे विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होगी. यही वजह है कि आज भी बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ की जाती है. यह दिन सिर्फ उनका जन्मदिन ही नहीं है, बल्कि ज्ञान और विद्या के महत्व का प्रतीक भी है.

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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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