अपरा एकादशी पर व्रत कथा सुनने से मिलता है सहस्र गोदान का फल

Author :Shaurya Punj
Published by :Shaurya Punj
Updated at :13 May 2026 7:16 AM
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Apara Ekadashi vrat katha

अपरा एकादशी व्रत कथा

Apara Ekadashi vrat katha: अपरा एकादशी 2026 का व्रत आज 13 मई को रखा जा रहा है. जानें पद्म पुराण में वर्णित व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और इस दिन मिलने वाले सहस्र गोदान समान पुण्य फल.

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Apara Ekadashi vrat katha: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है. पद्म पुराण में अपरा एकादशी के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है. वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार के दिन रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास और व्रत कथा का पाठ करने से मनुष्य को हजार गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

भगवान श्रीकृष्ण ने बताया अपरा एकादशी का महत्व

पद्म पुराण के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और उसका महत्व क्या है. तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस एकादशी का नाम ‘अपरा एकादशी’ है. यह अत्यंत पुण्यदायी और बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली मानी जाती है.

भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि जो व्यक्ति ब्रह्म हत्या, गोत्र हत्या, गर्भस्थ शिशु की हत्या जैसे महापापों का भागी होता है, वह भी यदि श्रद्धा से अपरा एकादशी का व्रत करे तो उसके पाप नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा झूठी गवाही देने वाले, व्यापार में धोखा करने वाले, बिना ज्ञान के ज्योतिष या वैद्यक का कार्य करने वाले व्यक्ति भी इस व्रत के प्रभाव से पापमुक्त हो सकते हैं.

अपरा एकादशी व्रत से मिलता है महान पुण्य

श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि अपरा एकादशी का पुण्य अनेक बड़े धार्मिक कर्मों के समान माना गया है. माघ मास में प्रयागराज में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, काशी में शिवरात्रि व्रत करने से जो फल प्राप्त होता है, गया में पिंडदान करने से जो पुण्य मिलता है, वही फल अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त हो जाता है.

इसके अतिरिक्त बृहस्पति के सिंह राशि में होने पर गोदावरी स्नान, बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा, सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में यज्ञ तथा हाथी, घोड़े और स्वर्ण दान करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह भी इस एकादशी के व्रत से मिल जाता है. भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस दिन भगवान वामन और श्रीहरि विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है.

अपरा एकादशी कथा : राजा महीध्वज की कहानी

अपरा एकादशी से जुड़ी एक और प्रसिद्ध कथा प्राचीन काल की है. उस समय महीध्वज नामक एक धर्मात्मा और दयालु राजा राज्य करते थे. उनका छोटा भाई वज्रध्वज उनसे ईर्ष्या करता था. एक दिन उसने छलपूर्वक अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उनके शव को एक पीपल के पेड़ के नीचे दबा दिया.

अकाल मृत्यु होने के कारण राजा महीध्वज को प्रेत योनि प्राप्त हुई. प्रेत बनने के बाद वह आसपास के लोगों को परेशान करने लगे. एक दिन महर्षि धौम्य वहां से गुजर रहे थे. उन्होंने अपने दिव्य ज्ञान से समझ लिया कि यह प्रेत वास्तव में राजा महीध्वज हैं और उन्हें मुक्ति की आवश्यकता है.

ये भी पढ़ें: अपरा एकादशी पर जानें इस दिन क्या करें और क्या नहीं करें?

धौम्य ऋषि ने दिलाई प्रेत योनि से मुक्ति

महर्षि धौम्य ने राजा महीध्वज की आत्मा को शांति दिलाने के लिए अपरा एकादशी का व्रत रखा. उन्होंने विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की और व्रत से प्राप्त संपूर्ण पुण्य राजा महीध्वज को समर्पित कर दिया. व्रत के प्रभाव और ऋषि के पुण्य से राजा महीध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई.

इसके बाद राजा महीध्वज ने महर्षि धौम्य को धन्यवाद दिया और भगवान विष्णु के धाम वैकुंठ को प्रस्थान किया. यह कथा बताती है कि अपरा एकादशी का व्रत न केवल जीवित मनुष्यों के पापों का नाश करता है, बल्कि मृत आत्माओं को भी मोक्ष प्रदान करने की क्षमता रखता है.

अपरा एकादशी पर करें ये शुभ कार्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु और वामन देव की पूजा करनी चाहिए. पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है. इस दिन व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए. साथ ही दान-पुण्य, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है.

मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया अपरा एकादशी व्रत जीवन के दुखों को दूर करता है और व्यक्ति को सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है.

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लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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