इटखोरी का भद्रकाली मंदिर: जहां आज भी मौजूद हैं प्राचीन सभ्यता के प्रमाण

Author :Shaurya Punj
Published by :Shaurya Punj
Updated at :13 May 2026 7:49 AM
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Bhadrakali Jayanti Temple Visit

झारखंड का प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर

Bhadrakali Jayanti Temple Visit: अपरा एकादशी 2026 पर जानें झारखंड के प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर का इतिहास, तांत्रिक महत्व, भगवान बुद्ध से जुड़ी मान्यताएं और मंदिर परिसर में मौजूद अद्भुत धार्मिक धरोहरों के बारे में.

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Bhadrakali Jayanti Temple Visit: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है, जिसे अचला एकादशी और कुछ क्षेत्रों में भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस अवसर पर आज हम आपको झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और तांत्रिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है.

प्राचीन इतिहास से जुड़ा है मां भद्रकाली मंदिर

मां भद्रकाली का यह प्राचीन मंदिर झारखंड के चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर भदुली गांव में स्थित है. माना जाता है कि मंदिर के नाम पर ही गांव का नाम भदुली पड़ा. यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र माना जाता है. मंदिर में स्थापित मां भद्रकाली की प्रतिमा एक ही विशाल शिलाखंड पर तराशी गई है. यह प्रतिमा लगभग साढ़े चार फीट ऊँची, ढाई फीट चौड़ी और करीब 30 मन वजनी बताई जाती है. विद्वानों के अनुसार इस प्रतिमा की स्थापना पाल काल यानी पांचवीं-छठी शताब्दी में हुई थी.

196 एकड़ में फैला है विशाल मंदिर परिसर

मां भद्रकाली मंदिर का परिसर लगभग 196 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. मंदिर परिसर में एक विशाल यज्ञशाला भी बनाई गई है, जिसका निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था. यह यज्ञशाला 52 फीट ऊँची, 70 फीट लंबी और 50 फीट चौड़ी है. यज्ञशाला के पूर्व दिशा में एक संग्रहालय स्थित है, जहां उत्खनन में प्राप्त 418 मूर्तियों और प्राचीन भग्नावशेषों को सुरक्षित रखा गया है.

तंत्र साधना के लिए यह स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है. यहां मां तारा की प्रतिमा इस प्रकार बनाई गई है कि साधक को माँ के पैर का अंगूठा सीधे आज्ञाचक्र यानी भृकुटी मध्य के सामने दिखाई देता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि मगध के प्रसिद्ध शाक्त साधक भैरवनाथ ने इस स्थल को साधना के लिए चुना था.

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मंदिर परिसर में मौजूद हैं कई अद्भुत धरोहरें

मंदिर परिसर में कोठेश्वरनाथ स्तूप भी स्थित है, जिसके चारों ओर भगवान बुद्ध की मूर्तियां अंकित हैं. स्तूप के ऊपर एक छोटा गड्ढा बना हुआ है, जिसमें चमत्कारिक रूप से हमेशा पानी भरा रहता है. मान्यता है कि इस जल को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा यहां सहस्रलिंगी शिवलिंग भी स्थापित है, जिसमें 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं. यह शिवलिंग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

भगवान बुद्ध और जैन धर्म से भी जुड़ा है संबंध

ऐसी मान्यता है कि ज्ञान और शांति की खोज में निकले युवराज सिद्धार्थ ने इस स्थान पर तपस्या की थी. कहा जाता है कि जब उनकी माता उन्हें वापस ले जाने आईं और सिद्धार्थ का ध्यान नहीं टूटा, तब उनके मुख से “इत खोई” शब्द निकला, जो आगे चलकर इटखोरी कहलाया.

जैन धर्मावलंबी भी इस स्थान को पवित्र मानते हैं. मान्यता है कि जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ स्वामी की जन्मभूमि यही क्षेत्र है. साथ ही यह स्थान तपस्वी मेघा मुनि की तपस्थली भी माना जाता है.

पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है मंदिर

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 और 2012-13 में यहां की गई खुदाई में कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक तथ्य सामने आए. खुदाई में नौवीं-दसवीं शताब्दी के मठ और मंदिरों के अवशेष मिले, जिन्हें आज संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है. वर्तमान समय में मंदिर प्रबंधन समिति इस प्राचीन धरोहर को उसके पुराने वैभव के साथ संरक्षित करने का प्रयास कर रही है.

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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