पागलपन का स्वप्न

एक बदनाम गांव था, जहां कोई भी पांच-छह बजे के बाद नहीं जाता था. वहां चोरी, लूट और अन्य अपराधों का बोलबाला था. वहां हमारे एक आर्ट ऑफ लिविंग टीचर ने जाकर तीन महीनों में उस गांव का नक्शा ही पलट दिया! उस गांव को अपना कर, सबको कोर्स कराया. हैरानी की बात यह कि […]
एक बदनाम गांव था, जहां कोई भी पांच-छह बजे के बाद नहीं जाता था. वहां चोरी, लूट और अन्य अपराधों का बोलबाला था. वहां हमारे एक आर्ट ऑफ लिविंग टीचर ने जाकर तीन महीनों में उस गांव का नक्शा ही पलट दिया! उस गांव को अपना कर, सबको कोर्स कराया. हैरानी की बात यह कि अब वहां छोटे, बड़े, सब गाते, नाचते हैं, सत्संग में और उन्होंने खुद नियम बना लिया है कि वहां नशेबाजी करनेवाले को दंड भुगतना होगा. परिणाम स्वरूप पूरा गांव अब नशामुक्त है और लोग रासायनिक मुक्त खेती भी करते हैं.
मेरे पिछले दौरे के समय स्वमी प्रज्ञापाद्जी ने मुङो बताया कि इस गांव में एक दुकान है, जहां पर कोई दुकानदार नहीं होता और दुकान ठीक रूप से चलती भी है. लोग सामान लेते हैं और पैसे वहां पड़ी टोकरी में डाल देते हैं. अन्य लोग आश्चर्यचकित हैं कि यह गांव ऐसे ढाई साल से इसी तरह चल रहा है, जहां अपने घरों में कोई ताला भी नहीं लगाता है.
यह गांव स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन गया है. यहां पूरे गांव के पीने के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था है, पूरा गांव गुलाबी रंग से पुता हुआ है. सबने एकता दिखाते हुए गुलाबी रंग से ही अपने मकानों को रंगना मंजूर किया. भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार ने इस गांव को पुरस्कार स्वरूप धन राशि देकर और सर्वश्रेष्ठ आदर्श ग्राम की उपाधि से सम्मानित किया है. आप जिसे पागलपन का स्वप्न कहते हैं, वैसा ही एक स्वप्न, सिर्फ एक टीचर ने देखा और उसे साकार भी कर दिखाया.
श्री श्री रविशंकर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










