दीपावली में कैसे करें लक्ष्मी पूजन
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :21 Oct 2014 11:02 PM
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डॉ एनके बेरा या श्री: स्वयं सुकृतिनां भुवनेश्य लक्ष्मी: पापात्मना कृतधियां हृदयेषु बुद्धि: श्रद्धा सतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा तां त्वां नता: स्म परिपालय देविविश्वम् . जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप में, पापियों के यहां दरिद्रता रूप में, शुद्ध अन्त:करण वाले व्यक्तियों के हृदय में बुद्धि रूप में सतपुरूषों में श्रद्धा रूप में, […]
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डॉ एनके बेरा
या श्री: स्वयं सुकृतिनां भुवनेश्य लक्ष्मी:
पापात्मना कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:
श्रद्धा सतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नता: स्म परिपालय देविविश्वम् .
जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप में, पापियों के यहां दरिद्रता रूप में, शुद्ध अन्त:करण वाले व्यक्तियों के हृदय में बुद्धि रूप में सतपुरूषों में श्रद्धा रूप में, कुलीन व्यक्तियों में, लज्जा रूप में निवास करती है, उसी भगवती को हम सभी नमस्कार करते हैं. हे देवी आप ही सम्पूर्ण विश्व का पालन पोषण कीजिए. दीपावली के अवसर पर सायंकाल स्थिर लग्न में श्री महालक्ष्मी के और श्री गणोश का पूजन किया जाता है. प्रत्येक घर के प्रत्येक कमरे में दीपक जलाया जाता है. इसे प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है.
पूजन सामग्री
लक्ष्मी एवं गणोश की मूर्ति या चित्र, चौकी, धूपबत्ती, दीपक, पुष्प, पुष्पमाला, शुद्धजल, गंगाजल, मिठाई, चांदी का सिक्का, लाल और पीला वस्त्र, कमलगट्टे की माला या स्फटिक की माला, सुपारी, अक्षत, हल्दी या अष्टगंध, केसर, कुमकुम, अबीर, लौंग, इलायची, रोली, सुपारी, वस्त्र, पान, लालकमल के फूल आदि.
पूजन विधि
दीपावली के दिन शुभ मूहूर्त में घर में या दुकान में पूजा घर के सम्मुख चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर लक्ष्मी गणोश की मूर्ति स्थापित करें तथा मूर्ति को पुष्पमाला पहनाएं.
पवित्रीकरण
सर्वप्रथम पूर्वाभिमुख अथवा उत्तराभिमुख होकर आचमन, पवित्रीधारण, मार्जन-प्राणायाम कर अपने ऊपर तथा पूजन सामग्री पर निम्न मंत्र पढ़कर जल छिड़के.
ओम् अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपि वा .
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि: .
आसन शुद्धि करें, इसके बाद धूप, अगरबत्ती और 5 दीप घी के और अन्य दीप तेल से प्रज्ज्वलित करें.
संकल्प
हाथ में पुष्प, अक्षत, सुपारी, सिक्का और जल लेकर संकल्प करें, आज परम मंगल को देने वाले कार्तिक मास की अमावस्या को मैं (अपना नाम लें), गोत्र (अपना गोत्र बोलें) चिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए नीतिपूर्वक अर्थोपार्जन करते हुए सभी कष्टों को दूर करने, अच्छी अभिलाषा की पूर्ति के लिए तथा आयु-आरोग्य की वृद्धि के साथ राज्य, व्यापार, उद्योग आदि में लाभ मिले, इसलिए गणपति, नवग्रह, षोड़श मातृका, महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती
का श्रद्धाभाव से पूजन कर रहा हूं.
हे मां लक्ष्मी मुङो धन, समृद्धि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें. मेरे इस पूजन में स्थान देवता, इष्ट देवता, कुल देवता, गुरु देवता, सहायक हो तथा मुङो सफलता प्रदान करें. इस प्रकार संकल्प कर हाथ में लिया हुआ जल, अक्षत, पुष्प आदि श्री गणोश लक्ष्मी के समीप छोड़ दें.
कलश स्थापन
जल भरा कलश भी चौकी पर ईशान कोण में रखें. कलश में मौली बांधकर रोली का स्वास्तिक का चिह्न अंकित करें. नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देते रहे. पांच आम्र पल्लव को कलश पर रखकर उसके ऊपर नारियल रखें. इसके बाद श्री गणोश जी और फिर लक्ष्मी जी को तिलक करें और पुष्प अर्पित करें.
श्री गणपति भगवान का पूजन
गणपति भगवान का स्नान करवाकर जनेऊ, वस्त्र, कलावा, कुमकुम, केसर, अक्षत, पुष्प, गुलाल, अबीर चढ़ाकर गुड़ तथा लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें फिर गणपति का ध्यान करें.
ओम् गणपतये नम: एकदन्ताय विदमहे .
वक्र तुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात .
नवग्रह पूजन
पहले नवग्रह का ध्यान करें
ब्रह्मामुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि सुतो .
बुधश्च गुरूश्च शुक्र शनि राहु केतव: सर्व ग्रहा: शान्ति करा भवन्तु.
सूर्यादि नवग्रह देवताभ्यौ नम:, कहते हुए षोड़शपचार से नवग्रह पूजन करें.
षोड़श मातृका पूजन
अक्षत, पुष्प लेकर इस मंत्र से षोड़श मातृका का पूजन करें
ओम् मंगला काली, भद्रकाली कपालिनी .
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते .
ओम् गणोश सहित गौर्यादि षोड़शमातृकाभ्यो नम:. कहते हुए षोड़शमातृका का पूजन करें.
कलशपूजन
हाथ में अक्षत एवं पुष्प लेकर कलश के ऊपर चारों वेद अन्य देवी-देवताओं का पूजन करें. बाद में ओम् वं वरूणाय नम: मंत्र 11 बार बोलें. अनया पूजया श्री वरूणदेव प्रियता-नमम् सुप्रसन्नो वरदो भव: वरदो भव:
महालक्ष्मी पूजन
महालक्ष्मी पूजन के लिए चांदी के सिक्के को थाली में रखें. आह्वान के लिए अक्षत अर्पण करें. जल से तीन बार अर्घ दें. स्नान कराएं, फिर दुध, दही, घी, शक्कर तथा शहद से स्नान कराकर पुन: शुद्ध जल से स्नान करायें. कलावा, केशर, कुमकुम, अक्षत, पुष्पमाला, गुलाल, अबीर, मेंहदी, हल्दी, कमलगट्टे, फल तथा मिष्ठान्न अर्पण करके 108 बार एक एक नाम बोल कर अक्षत, पुष्प चढावें.
ओम् अणिम्ने नम:. ओम् महिम्ने नम:. ओम् गरिम्ने नम:. ओम् लघिम्ने नम:. ओम् प्राकाम्ये नम:. ओम् इशितारो नम:. ओम् वशितारों नम:.
इसके बाद मिष्ठान्न, ऋतुफल, खीर आदि प्रसाद स्वरूप अर्पण करें. पान,सुपारी, इलाइची आदि अर्पित करें और प्रार्थना करें-
नमोस्तुते महामाये श्रीपीठे सुर पुजिते.
शंख,चक्र ,गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते .
अपने घर, पूजास्थल, कलम, बहीखाते आदि में कलावा बांधे तथा उन पर पुष्प,अक्षत तथा कुमकुम अर्पण करके महाकाली, महासरस्वती का पूजन करें.
दीपमालिका पूजन
किसी पात्र में 11, 21 या उससे अधिक दीपकों को प्रज्ज्वलित कर मां लक्ष्मी के पास रखकर ओम् दीपावल्यै नम: इस मंत्र से गन्धादि उपचारों द्वारा पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करें- हे मां लक्ष्मी मैने आपकी तन, मन से पूजा अर्चना सम्पन्न की है. यदि इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि हो गई है तो मुङो अपना सन्तान समझकर क्षमा करें तथा मुङो व मेरे परिवार को आशीर्वाद प्रदान करें जिससे हमारे घर-परिवार में सदैव सुख-समृद्धि व ऐश्वर्य की प्राप्ति हो तथा हमें हमेशा मानिसक व शारीरिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त हो.
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