मनचाहा जीवनसाथी और सुखी दांपत्य के लिए कब से शुरू होगा गौरी व्रत? जानें पूजा विधि, मुहूर्त और समापन तिथि

गौरी व्रत 2026
Gauri Vrat 2026: गौरी व्रत 2026 का शुभारंभ 25 जुलाई, शनिवार से होगा. यह पांच दिवसीय व्रत माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा को समर्पित माना जाता है. यदि आप गौरी व्रत करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
Gauri Vrat 2026: गौरी व्रत को माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए विशेष फलदायी माना जाता है. यह पांच दिवसीय व्रत श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ किया जाता है.
धार्मिक महत्व: क्यों खास माना जाता है गौरी व्रत?
सनातन परंपरा में गौरी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है. विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख, समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली के लिए इसका पालन करती हैं.
तिथि और समय: कब से शुरू होगा गौरी व्रत 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 9:12 बजे प्रारंभ होगी और 25 जुलाई 2026 को दिन में 11:34 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर गौरी व्रत का आरंभ 25 जुलाई 2026, शनिवार से माना जाएगा. यह व्रत लगातार पांच दिनों तक चलेगा और 29 जुलाई को इसका समापन होगा.
शुभ मुहूर्त: गौरी व्रत पूजा के लिए उत्तम समय
गौरी व्रत के प्रथम दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक शुभ माना गया है. इसके अलावा सुबह 7:21 बजे से 9:03 बजे तक शुभ-उत्तम मुहूर्त तथा शाम 7:17 बजे से 8:34 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है.
पूजा विधि: कैसे करें माता गौरी की आराधना?
व्रत के पहले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माता पार्वती व भगवान शिव का ध्यान करते हुए पांच दिवसीय व्रत का संकल्प लें. इसके बाद मिट्टी से भरे पात्र में गेहूं के बीज बोकर जवारा स्थापित करें. माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर रोली, अक्षत, सिंदूर, फल, फूल और नागला (कॉटन धागा) अर्पित करें. प्रतिदिन सुबह-शाम आरती और कथा का पाठ करें.
व्रत समापन: पांच दिनों तक कैसे होती है पूजा?
गौरी व्रत पांच दिनों तक निरंतर किया जाता है. इस दौरान व्रती सुबह और शाम पूजा-अर्चना करती हैं. कई स्थानों पर अंतिम दिन रात्रि जागरण की परंपरा भी निभाई जाती है. पांचवें दिन विधिपूर्वक पूजा संपन्न कर व्रत का पारण किया जाता है और नमक युक्त भोजन ग्रहण किया जाता है.
विशेषज्ञ दृष्टिकोण: श्रद्धा और अनुशासन का पर्व
धार्मिक विद्वानों के अनुसार गौरी व्रत केवल मनोकामना पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुशासन का भी प्रतीक है. यह व्रत माता गौरी और भगवान शिव के आदर्श दांपत्य जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करता है.
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लेखक के बारे में
By शौर्य पुंज
मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.
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