Ganesh Chaturthi 2026: गणेश पूजा में मोदक का क्या महत्व है? जानें पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता

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गणेश चतुर्थी पर मोदक का आध्यात्मिक महत्व

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Ganesh Chaturthi 2026 Modak Spiritual Significance: गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक चढ़ाने की परंपरा है. जानें मोदक का आध्यात्मिक अर्थ, दिव्य मोदक से जुड़ी पौराणिक कथा और गणपति पूजा में इसके महत्व की धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता क्या है.

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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी  के अवसर पर गणपति बप्पा को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है. हम तस्वीरों में गणपति बप्पा के हाथ में भी मोदक देख सकते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को मोदक प्रिय कहा गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मोदक को ही गणपति के प्रिय भोग के रूप में इतना महत्व क्यों मिला?

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मोदक का आध्यात्मिक अर्थ

मोदक शब्द संस्कृत के मोद शब्द से बना है, धार्मिक व्याख्या में इसे आनंद और प्रसन्नता से जोड़ा जाता है. मोदक को आध्यात्मिक आनंद और ज्ञान का प्रतीक माना गया है. इसके बाहरी रूप के विपरीत, इसके भीतर मिठास छिपी होती है. मोदक का भोग भगवान गणेश को अर्पित करना भक्त की श्रद्धा, समर्पण और आंतरिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. भक्त की भावना होती है कि जैसे मोदक के भीतर मिठास होती है, वैसे ही उसके जीवन में भी ज्ञान, विवेक और संतोष बना रहे.

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गणेश जी और मोदक की पौराणिक मान्यता

गणेश पुराण के अनुसार एक प्रसिद्ध कथा में दिव्य मोदक का प्रसंग देखने को मिलता है. इस कथा के अनुसार देवताओं ने अमृत से निर्मित एक मोदक माता पार्वती को भेंट किया. दिव्य मोदक को देखकर भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय ने उसे पाने की इच्छा जताई. माता पार्वती ने बताया कि इस मोदक के गंध से ही अमरता प्राप्त हो सकती है. मां पार्वती ने कहा कि दोनों में जो भी धर्माचरण द्वारा श्रेष्ठता को प्राप्त करके सबसे पहले सभी तीर्थों का भ्रमण करके यहां पहुंचेगा, उसी को मैं यह मोदक दूंगी. माता पार्वती की बात सुनकर कार्तिकेय जी अपने मयूर पर सवार होकर सभी तीर्थों का दर्शन किया, वहीं गणेश जी अपने छोटे वाहन मूषक के कारण तीर्थों की यात्रा नहीं कर सके, और उन्होंने अपने माता पिता की परिक्रमा कर उनकी स्तुति की.

परिक्रमा पूरी होने पर मां पार्वती ने कहा, "सभी तीर्थ स्थानों का स्नान, देवी-देवताओं को प्रणाम, व्रत, यज्ञों का अनुष्ठान, योग, मंत्र और संयम का पान करना, ये सभी धार्मिक कर्म माता-पिता की पूजा से प्राप्त पुण्य के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं हैं. ऐसे में इसलिए मैं यह दिव्य मोदक तुम्हें देती हूं." सभी शुभ कार्यों और पूजा के दौरान सर्व प्रथम तुम्हारी पूजा होगी. भगवान गणेश को मोदक ग्रहण करके अपार संतुष्टि और प्रसन्नता महसूस हुई. इसी पौराणिक परंपरा के कारण गणेश पूजा में मोदक का विशेष महत्व माना जाता है.

ज्योतिष में मोदक का क्या महत्व है?

ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में गणेश जी को बुद्धि, विवेक और शुभारंभ का देवता माना जाता है. मोदक को उन्हें अर्पित करना ज्ञान, सुख और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मोदक चढ़ाने से किसी ग्रह दोष के निश्चित रूप से दूर होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे आस्था और पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए.

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