Ganesh Chaturthi 2026: एक दैत्य के रक्त से भगवान गणेश का रंग कैसे हुआ लाल, पढ़ें 'सिंदूरवदन' अवतार की अनसुनी कहानी

Updated:
विज्ञापन

सिंदूरवदन गणेश अवतार (Image- AI)

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है. जानिए क्यों उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है और 'सिंदूरवदन' नाम कैसे पड़ा. पढ़िए इससे जुड़ी रोचक पौराणिक कथा.

विज्ञापन

Ganesh Chaturthi 2026: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सभी देवी-देवताओं में पहले पूजे जाने वाले गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल (दिन के 12 बजे के आसपास) हुआ था. इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन इस मुहूर्त में उनकी पूजा शुभ मानी गई है. पंचांग के मुताबिक इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी. ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में उनका एक नाम 'सिंदूरवदन' भी मिलता है. क्या आपको पता है कि भगवान गणेश यह नाम क्यों पड़ा और इससे जुड़ी कहानी क्या है?

विज्ञापन

भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं सिंदूर, कैसे पड़ा 'सिंदूरवदन' नाम

ब्रह्मवैवर्त पुराण (गीता प्रेस) के गणेश खंड में गणपति के एक नाम सिंदूरवदन का उल्लेख भी किया गया है. कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने महापराक्रमी असुर 'सिंदूर' का वध कर उसके रक्त (खून) को अपने दिव्य अंगों पर लेप लिया. मान्यतानुसार, इस घटना के बाद से ही उनका एक नाम सिंदूरवदन प्रसिद्ध हो गया. चूंकि, आविर्भाव (प्रकट होना) के वक्त उनका मुख (मुंह) सिंदूर सा दिख रहा था. इसलिए उनकी पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व है. भगवान गणेश की पूजा में उन्हें सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए.

सिंदूरवदन गणेश (Image- AI)
सिंदूरवदन गणेश (Image- AI)

किसने दिया था सिंदुरासुर को महाबलशाली होने का वरदान

पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में सिंदुरासुर नाम के राक्षस ने कठोर तपस्या की. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे महाबलशाली होने का वरदान दिया. शक्ति के अहंकार में आकर वह ऋषियों और देवता को परेशान करने लगा. सिंदुरासुर ऋषियों और देवताओं को प्रताड़ित (डराना-धमकाना) करता. परेशान होकर सभी देवता और ऋषि भगवान विष्णु के पास पहुंचे. उन्होंने विष्णु जी को सिंदुरासुर के अत्याचार के बारे में बताया और उससे छुटकारा पाने का उपाय पूछा.

भगवान गणेश ने किस स्वरूप में किया सिंदुरासुर का वध

ऋषियों और देवताओं की विनती (प्रार्थना) पर भगवान विष्णु ने कहा कि वे डरे नहीं, माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र गणेश सिंदुरासुर का वध करेगा. ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में वर्णित कथा के अनुसार, सतयुग में गणेश जी का जन्म हुआ था. जन्म के बाद बालक स्वरूप में भगवान गणेश और सिंदुरासुर के बीच युद्ध हुआ. इस दौरान उन्होंने सिंदुरासुर का वध किया.

ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: गणेश जी की भूख के आगे कम पड़ गया कुबेर का खजाना, ऐसे टूटा धन के देवता का घमंड

कैसा है भगवान गणेश का स्वरूप

शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश चतुर्बाहु (चार हाथ वाले) हैं. वे अपने तीन हाथों में पाश (एक प्रकार का अस्त्र), अंकुश (जिससे हाथी को वश में किया जाता है.), दंत (दांत) धारण किए हुए हैं. जबकि, उनके एक हाथ में लड्डू से भरा हुआ पात्र (बर्तन) है. जिनका स्वरूप लाल है और जो लंबोदर (बड़ा पेट) हैं. जिनकी पूजा सिंदूर और लाल रंग के फूल से की जाती है. ऐसा विनायक (भगवान गणेश का एक नाम) का स्वरूप है.

भगवान गणेश का चतुर्भुज (चार हाथ वाले) स्वरूप इंफोग्राफिक (AI Generated Image)
भगवान गणेश का चतुर्भुज (चार हाथ वाले) स्वरूप इंफोग्राफिक (AI Generated Image)

गणेश जी को स्वरुप को दर्शाने वाला स्तुति मंत्र

एकदंतं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्. पाशाङ्कुशधरं देवं ध्यायेत्सिद्धिविनायकम्. दन्ताक्षमालापरशुं पूर्णमोदकधारिणम्. मोदकासक्ताशुण्डाग्र-मेकदन्तं विनायकम्.

ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: भगवान गणेश ने चूहे को ही क्यों बनाया अपना वाहन? जानें रोचक पौराणिक कथा

स्तुति मंत्र का भावार्थ

शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश चतुर्बाहु (चार हाथ वाले) हैं. वे अपने तीन हाथों में पाश (एक प्रकार का अस्त्र), अंकुश (जिससे हाथी को वश में किया जाता है.), दंत (दांत) धारण किए हुए हैं.

जबकि, उनके एक हाथ में लड्डू से भरा हुआ पात्र (बर्तन) है. जिनका स्वरूप लाल है और जो लंबोदर (बड़ा पेट) हैं. जिनकी पूजा सिंदूर और लाल रंग के फूल से की जाती है. ऐसा विनायक (भगवान गणेश का एक नाम) का स्वरूप है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola