हिंदू संस्कृति की सार्वभौमिकता

हमारे देश की सनातन संस्कृति एक मात्र ऐसी संस्कृति है, जिसका अपना कोई धर्म नहीं है. अगर अब धर्म ने हमारे यहां अपनी जगह बना ली है, तो यह बाहरी प्रभावों की वजह से है. नहीं तो एक संस्कृति के तौर पर यहां कोई धर्म नहीं है. हमारे यहां अकसर सनातन धर्म की ही बात […]
हमारे देश की सनातन संस्कृति एक मात्र ऐसी संस्कृति है, जिसका अपना कोई धर्म नहीं है. अगर अब धर्म ने हमारे यहां अपनी जगह बना ली है, तो यह बाहरी प्रभावों की वजह से है. नहीं तो एक संस्कृति के तौर पर यहां कोई धर्म नहीं है.
हमारे यहां अकसर सनातन धर्म की ही बात होती है, जिसका अर्थ है सार्वभौमिक धर्म. जब हम सार्वभौमिक धर्म की बात करते हैं, तो हम यह नहीं कहते, कि सभी लोगों के लिए एकही धर्म है. बल्कि हमारे कहने का मकसद यह होता है कि हममें से हरेक का अपना एक धर्म है. हिंदू एक भौगोलिक पहचान है. हिंदू होने का संबंध किसी धर्म विशेष से नहीं है. यहां हर कोई वह सब करने को आजाद है, जो वह चाहता है.
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