दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की हुई पूजा, आज होगी चंद्रघंटा की पूजा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Oct 2019 5:33 AM (IST)
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पटना : शहर में भले ही भारी बारिश के कारण लोगों को परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा हो पर इन्हीं परेशानियों के बीच लोग मां दुर्गा की आराधना में लगे हुए हैं. ऐसे लोगों में नवरात्र का उत्साह और मां के प्रति श्रद्धा कम नहीं है. नवरात्र के दूसरे दिन भी शहर के कई […]
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पटना : शहर में भले ही भारी बारिश के कारण लोगों को परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा हो पर इन्हीं परेशानियों के बीच लोग मां दुर्गा की आराधना में लगे हुए हैं. ऐसे लोगों में नवरात्र का उत्साह और मां के प्रति श्रद्धा कम नहीं है. नवरात्र के दूसरे दिन भी शहर के कई पूजा-पंडालों के अलावा मंदिरों और घरों में भक्त नवरात्र का पाठ करते दिखे. नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का पूजन किया.
मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गयी थी. इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जय माता दी के जयघोष से गुंजायमान होता रहा. मंगलवार को मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की श्रद्धालु उपासना करेंगे. मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी होता है. मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं दूर हो जाती हैं.
ब्रह्मचारिणी का दर्शन पूजन किया गया
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का दर्शन पूजन किया गया. ज्योतिर्विद दैवज्ञ डॉ श्रीपति त्रिपाठी कहते हैं कि सोमवार ब्रह्म का अर्थ तप है और चारिणी का अर्थ तप का आचरण करने वाली देवी के रूप में भगवती दुर्गा के द्वितीय स्वरूप का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा.
देवी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया था. देवी दुर्गा के तपस्विनी स्वरूप के दर्शन-पूजन से भक्तों और साधकों को अनंत शुभफल प्राप्त होते हैं. संन्यासियों के लिए इस स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी है. देवी ब्रह्मचारिणी का मंदिर काल भैरवमंदिर के पीछे सजी मंडी से दाहिनी तरफ गली में है, जो वर्तमान दुर्गा घाट के नाम से जाना जाता है. द्वितीया के पूजन में हरे रंग की विशिष्ट महत्ता है. सभी नियमों का पालन करते हुए लोगों ने दूसरे दिन की पूजा की.
भक्तों को आशीष देंगी मां चंद्रघंटा
ज्योतिर्विद दैवज्ञ डॉ श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र के तीसरे दिन देवी के स्वरूप चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है. देवी चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र नजर आता है. यही वजह है कि भक्त उन्हें चंद्रघंटा कहकर बुलाते हैं. देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह होता है. मां की 10 भुजाएं, 3 आंखें, 8 हाथों में खड्ग, बाण आदि अस्त्र-शस्त्र हैं. इसके अलावा देवी मां अपने दो हाथों से अपने भक्तों को आशीष देती हैं.
नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
उन्होंने कहा कि मन में किसी तरह का कोई भय बना रहता है, तो आप मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा का पूजन करें. नवरात्रि का तीसरा दिन भय से मुक्ति और अपार साहस प्राप्त करने का होता है. मां के चंद्रघंटा स्वरुप की मुद्रा युद्ध मुद्रा है. ज्योतिष शास्त्र में मां चंद्रघंटा का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है.
ऐसे करें मां की पूजा
मां चंद्रघंटा की पूजा करने से मन के साथ घर में भी शांति आती है और व्यक्ति के परिवार का कल्याण होता है. मां की पूजा करते समय उनको लाल फूल अर्पित करें. इसके साथ मां को लाल सेब और गुड़ भी चढायें. शत्रुओं पर विजय पाने के लिए मां की पूजा करते समय घंटा बजाकर उनकी पूजा करें. इस दिन गाय के दूध का प्रसाद चढ़ाने से बड़े से बड़े दुख से मुक्ति मिल जाती है.
मां की उपासना का मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
भोग: मां चंद्रघंटा के भोग में गाय के दूध से बने व्यंजनों का प्रयोग किया जाना चाहिए. मां को लाल सेब और गुड़ का भोग लगाएं.
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