ज्योतिषीय समाधान: ज्योतिष सच्चा है या काल्पनिक? जानें क्या कहते हैं सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी एक आधुनिक सन्यासी हैं, जो पाखंड के धुरविरोधी हैं और संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्म व दर्शन के तार्किक तथा वैज्ञानिक पक्ष को उजागर कर रहे हैं. सद्‌गुरुश्री के नाम से प्रख्यात कार्पोरेट सेक्टर से अध्यात्म में क़दम रखने वाले यह आध्यात्मिक गुरु नक्षत्रीय गणनाओं तथा गूढ़ विधाओं में पारंगत हैं तथा मनुष्य के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक व्यवहार की गहरी पकड़ रखते हैं. आप भी इनसे अपनी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए आप इन समस्याओं के संबंध में लोगों के द्वारा किये गये सवाल के अंत में पता देख सकते हैं...

सवाल- क्या सूर्य को जल खाली पेट देना चाहिए या कुछ खा कर भी ये प्रक्रिया हो सकती है?
-निशा अधिकारी

जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि उगते हुए सूर्य को गिरते हुए जल से देखने को अर्ध्य अर्पित करना कहा जाता है. यह प्रक्रिया उगते हुए रक्त वर्ण के सूर्य के समक्ष की जाती है. इसके लिए ख़ाली या भरे पेट का यूँ तो कोई घोषित नियम नहीं है. पर विशेष परिस्थितियों के अलावा सूर्योदय से पूर्व भोजन सामान्य रूप से प्रचलित नहीं है. अतएव लोग सामान्य रूप से इसे किसी भी आहार से पूर्व ही संपादित करते हैं.

सवाल- मेरे पति मुझे प्रेम नहीं करते. कभी कभी घर की दहलीज़ से बाहर निकल जाने का मन करता है. क्या तन्त्र-मन्त्र इसमें कारगर सिद्ध हो सकते हैं?

जन्म तिथि- 20.05.1990, समय -12.17 दोपहर, स्थान- वाराणसी(उप्र)
- विशाखा अग्रवाल


जवाब- सदगुरु कहते हैं कि आपकी राशि मीन और लग्न सिंह है. चंद्रमा आपकी कुंडली के अष्टम भाव में विराजमान है. यह चंद्रमा भावुकता, संवेदनशीलता, अतिविचारशीलता और नाटकीयता प्रदान कर रहा है. आपका भाग्येश और सूखेश मंगल सप्तम भाव में बैठ कर आपको मांगलिक बना रहे हैं. आपकी समस्या मानसिक ज़्यादा है. यदि आपके पति मांगलिक नही हैं तो मंगल दोष भी आपके दांपत्य जीवन में टांग अड़ा रहा है. किसी भी सीमा रेखा को तोड़ना समस्या का हल नही है. और तंत्र-मंत्र के चक्कर में उलझनें की राय मैं कदापि नही देता. पति से खुल कर बात करें. रात्रि में दुग्ध का त्याग, और ४३ दिन तक गुड़ का जल प्रवाह परिस्थितियों को अनुकूल करने में सहायक होगा, ऐसा मैं नही, पारंपरिक मान्यतायें कहती है.

सवाल- ज्योतिष सच्चा है या काल्पनिक? हज़ारों लाखों किलोमीटर दूर ग्रहों की हमारे जीवन में दख़लअंदाजी की बात क्या मज़ाक़ नहीं है.
- डॉक्टर अजय पांडेय

जवाब- हमारा सौर मण्डल का केंद्र सूर्य है. सदगुरु श्री कहते हैं सदगुरुश्री कहते हैं कि पृथ्वी समेत शेष समस्त ग्रह सूर्य से ही टूट कर निकले हैं. और हम स्वयं भी पृथ्वी और इस पर पाए जाने वाले तत्वों से ही बने हैं. मिट कर हम इसी धरती में मिल जाते हैं. यानि सूर्य और अन्य ग्रहों से हमारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रिश्तेदारी है. विज्ञान कहता है कि ग्रह और कुछ नहीं बल्कि अनेकानेक गैसों और धातुओं के ग़ुबार या गोले हैं. (जैसे सूर्य हाइड्रोजन, हिलियम के साथ लोहा, निकेल, ऑक्सीजन, सिलिकन, सल्फर, मैग्निसियम, कार्बन, नियोन, कैल्सियम, क्रोमियम तत्वों का समूह है , तो शनि लोहा, निकल, सिलिकॉन और ऑक्सीजन, तरल हाइड्रोज, धातु हाइड्रोजन, तरल हीलियम,अमोनिया क्रिस्टल से बना है. बुध ऑक्सीजन, सोडियम, हाईड्रोजन, हीलियम, पोटैशियम से, वृहस्पति मिथेन, अमोनिया और हाइड्रोजन से तो शुक्र कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, हिलियम, नियॉन, कार्बोनिल सल्फाइड इत्यादि से निर्मित है. हर तत्व की अपनी अलग अलग रेडीओऐक्टिविटी है, जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव मानव सृष्टि पर पाया गया है, ये बात काल्पनिक या मज़ाक़ की नहीं है बल्कि ये तो विज्ञान कहता है. मान्यतायें कहती हैं कि ज्योतिष आज का नहीं बल्कि अति पुरातन विज्ञान है, जिससे गणित, खगोल विज्ञान सहित विज्ञान का भी प्राकट्य माना गया है। इस विधा को समझने और भरोसा करने के लिए इसका आरम्भिक ही सही, पर अध्ययन आवश्यक है.

सवाल- आर्थिक उन्नति के लिए पूजा में कौन सी सुगंध का प्रयोग करना चाहिए.
-सरोज सिंह

जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि मान्यताओं के अनुसार चमेली की सुगंध को आकर्षण के लिए बेहतर कहा गया है. आकर्षण धन अर्जित करने के आवश्यक कारकों में से एक है. इसके अलावा गुलाब की महक शक्ति संचरण और विकास के लिए श्रेष्ठ मानी गयी है. शक्ति हासिल करने से धनार्जन सुगम हो जाता है। यद्यपि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

सवाल-ज्योतिष में नीचभंग राजयोग अर्थ क्या है? क्या यह अशुभ योग है?
-मनीष ओसवाल

जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि नीचभंग योग एक उत्तम राजयोग में दख़ल रखता है. यह शुभ है, अशुभ नहीं. ज्योतिषिय ग्रंथों ने इस योग की बहुत तारीफ़ की है. जब कुंडली में षष्ठ, अष्टम और व्यय भाव के मालिक इन्ही घरों में आसीन हों तो यह राजयोग निर्मित होता है. यह योग समाज, राज्य और राष्ट्र में बड़ी प्रतिष्ठा का सबब बनता है. शासन, प्रशासन और राजनीति में यह उच्च पद प्रदान करता है. यह जीवन में अपार ख्याति देता है। नीचभंग के लिए जो ग्रह उत्तरदायी होता है उस ग्रह के क्षेत्र में महा सफलता मिलती है.

(अगर आपके पास भी कोई ऐसी समस्या हो, जिसका आप तार्किक और वैज्ञानिक समाधान चाहते हों, तो कृपया प्रभात खबर के माध्यम से सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी से सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए आपको बस इतना ही करना है कि आप अपने सवाल उन्हें सीधे saddgurushri@gmail.com पर भेज सकते हैं. चुनिंदा प्रश्नों के उत्तर प्रकाशित किये जायेंगे. मेल में Subject में प्रभात ख़बर अवश्य लिखें.)

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