शनि के प्रतिकूल प्रभाव से नौकरी में आती है अड़चन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Dec 2018 12:45 AM (IST)
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डॉ श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिषविद् आज देश के ज्यादातर युवा शिक्षित होने के बाद भी बेरोजगारी की समस्या से झूझ रहे हैं. समय पर नौकरी-रोजगार न मिलने पर अक्सर व्यक्ति गलत रास्ते को अपना लेता है. यह जरूर है कि भाग्य के भरोसे न बैठकर व्यक्ति को अपना प्रयास करते रहना चाहिए, साथ ही ज्योतिष की […]
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डॉ श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिषविद्
आज देश के ज्यादातर युवा शिक्षित होने के बाद भी बेरोजगारी की समस्या से झूझ रहे हैं. समय पर नौकरी-रोजगार न मिलने पर अक्सर व्यक्ति गलत रास्ते को अपना लेता है.
यह जरूर है कि भाग्य के भरोसे न बैठकर व्यक्ति को अपना प्रयास करते रहना चाहिए, साथ ही ज्योतिष की मदद भी लेनी चाहिए, जो आपकी राह आसान बना सकते हैं.
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली के 12 भावों में से 10वें भाव को कर्म भाव माना जाता है. 10वां भाव उसके कैरियर का नेतृत्व करता है. उसे सफलता मिलेगी या नहीं, यह इसी भाव पर निर्भर करता है. वहीं कुंडली के छठे भाव को देख कर नौकरी में चल रही परिस्थितियों का पता लगाया जाता है.
जिनकी कुंडली में शनि देव अशुभ स्थान पर विराजमान हैं, पीड़ित या फिर कमजोर हो, तो नौकरी में दिक्कतें आती हैं.
अगर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, दशा या अंतर्दशा चल रही हो, ऐसे में नौकरी संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. दशम भाव के अलावा अगर कुंडली के छठे भाव में कोई पाप योग बन रहा हो, कोई ग्रह नीच राशि में हो, तो ऐसे में व्यक्ति को बार-बार नौकरी छूटने की समस्या होती है.
अगर शनि अपने भाव में ना होकर छठे, आठवें या 12वें भाव में विराजमान हो तब भी नौकरी में अड़चनें आती हैं. इसके अलावा कुंडली में काल सर्प दोष, मांगलिक दोष और नक्षत्र व गृह दोष भी नौकरी में अड़चन के कारण बनते हैं. इसलिए किसी योग्य ज्योतिष से कुंडली दिखाकर दोषों का निवारण करवाना चाहिए.
कुछ कारगर उपाय
शनिदेव की आराधना करना शुरू करें. प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर जाकर शनिदेव को सरसों तेल व काले तिल अर्पित करें व ॐ शं शनैश्चराय नम: मंत्र के जप करें.
सात तरह के अनाज मिलाकर अपने ऊपर से सात बार वार लें व थोड़ा-थोड़ा करके सुबह-सुबह पक्षियों को खिलाना शुरू कर दें. इससे गृह दोष शांत होते हैं.
हनुमान जी की नित्य आराधना से नौकरी के द्वार शीघ्र ही खुलने लगेंगे.
पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने से सभी देवता व पितृ देव प्रसन्न होते हैं. इसलिए रोज पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और शनिवार को पीपल पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं.
किसी भी दिन कुआं में गुप्त रूप से थोड़ा दूध डालें और इस बारे में किसी को भी न बताएं. यह छोटा उपाय बेहद कारगर है.
सोमवार को शिवलिंग पर दूध-जल चढ़ाएं. चावल व मीठा भी अर्पित करें. हाथ जोड़कर भोलेनाथ से नौकरी की अरदास लगाएं.
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