प्रवासी मजदूरों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं : हाइकोर्ट

Updated at : 30 May 2020 5:38 AM (IST)
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प्रवासी मजदूरों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं : हाइकोर्ट

हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने काे लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने प्रार्थी द्वारा उठाये गये सवाल पर जानना चाहा कि हिंदपीढ़ी में किस आधार पर कुछ कंटेनमेंट जोन हटाये गये हैं. वहीं सरकार से पूछा गया कि प्रवासी मजदूरों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं.

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रांची : हाइकोर्ट में शुक्रवार को राज्य में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने काे लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने प्रार्थी द्वारा उठाये गये सवाल पर जानना चाहा कि हिंदपीढ़ी में किस आधार पर कुछ कंटेनमेंट जोन हटाये गये हैं. वहीं सरकार से पूछा गया कि प्रवासी मजदूरों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं.

कोरेंटिन सेंटर से जिन प्रवासी मजदूरों को छोड़ दिया जाता है, उन्हें क्या सुविधाएं दी जाती हैं. स्पेनिश फ्लू का दिया उदाहरणखंडपीठ ने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1918 में स्पेनिश फ्लू का प्रकोप कम होने के बाद लोगों को लगा था की यह महामारी खत्म हो गयी है. लेकिन दोबारा उस महामारी की वापसी हुई, तो एक करोड़ से अधिक लोगों की माैत हुई थी.

इसलिए महामारी को देखते हुए हर स्तर पर सतर्कता बरतने की जरूरत है. प्रार्थी अधिवक्ता द्वारा छोटे-छोटे सवालों पर खंडपीठ ने कहा कि निर्वाचित सरकार है. काम कर रही है. हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं. खंडपीठ ने प्रार्थी को रिजवाइंडर दायर कर अपनी बात लिखित रूप में रखने का निर्देश दिया. मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी. केंद्र सरकार की गाइडलाइन का हो रहा अनुपालनसरकार की अोर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि सील किये गये उन क्षेत्रों में जहां 28 दिनों तक कोरोना का नया केस नहीं मिला है, वैसे क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन से बाहर किया गया है.

हालांकि, कुछ माइक्रो कंटेनमेंट जोन अभी भी हिंदपीढ़ी में हैं, जिन्हें अभी तक नहीं खोला गया है. महाधिवक्ता ने प्रार्थी द्वारा उठाये गये सवाल का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन का अनुपालन सरकार कर रही है. हिंदपीढ़ी के कोरोना मरीजवाले क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन से बाहर लाने की बात सही नहीं है. वार्ड 21, 22, 23 व 20 का आधा हिस्सा हिंदपीढ़ी का इलाका होता है. उक्त इलाके की आबादी लगभग 40-45 हजार है. उसमें से 8440 लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया है.

इलाके में दो बार गहन रूप से डोर-टू-डोर 38643 लोगों की स्क्रीनिंग की गयी है. ईद के समय दोबारा स्क्रीनिंग शुरू की गयी थी. कोरोना जैसे कुछ लक्षण दिखने पर पहले स्क्रीनिंग में 13 व दूसरे स्क्रीनिंग में 26 लोगों की जांच की गयी, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आयी है. महाधिवक्ता ने बताया कि दूसरे राज्यों से झारखंड आ रहे प्रवासी मजदूरों के मामले में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) अपनाया जा रहा है. अब तक लगभग 4.50 लाख प्रवासियों की स्क्रीनिंग की गयी है, जिसमें से 30,000 की कोरोना टेस्ट की गयी. करीब 172 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है.

18 मई को आइसीएमआर द्वारा जारी गाइडलाइन का अनुसरण किया जा रहा है. इसके अनुसार जिनमें कोरोना का लक्षण नहीं रहता है, तो उन्हें होम कोरेंटिन किया जाता है. जिनमें लक्षण दिखता है, उनकी जांच की जा रही है. वैसे लोगों को कोरेंटिन सेंटर में रखा जाता है. रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही छोड़ा जा रहा है. महाधिवक्ता के दावों का किया खंडन प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने महाधिवक्ता के दावों का खंडन करते हुए कहा कि हिंदपीढ़ी इलाके से नमूने ठीक से एकत्र नहीं किये गये हैं.

उन्होंने हिंदपीढ़ी के निवासी शिवम सहाय के एक पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कैसे प्रशासन ने हिंदपीढ़ी में माइक्रो कंटेनमेंट जोन की पहचान के लिए पिक एंड चूज की नीति अपनायी. दबाव में हिंदपीढ़ी के वैसे इलाके जहां कोरोना संक्रमण के मरीज हैं, उसे कंटेनमेंट जोन से बाहर कर दिया गया है. जबकि अन्य क्षेत्रों में जहां कोई पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया हैं, उन्हें सील कर दिया गया है. रिम्स की अोर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह भी सुनवाई में शामिल हुए.

Posted By: Shaurya Punj

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