शहीद रमेश सिंह मुंडा जयंती : झारखंड के पूर्व मंत्री पंच परगना को मिलाकर बुंडू को बनाना चाहते थे जिला

झारखंड के पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा का जन्म 11 नवंबर 1955 को बुंडू प्रखंड की एदलहातू पंचायत के चिरुडीह में हुआ था. उनके पिता हरि सिंह मुंडा थे. माता का नाम मंगला देवी था. दसवीं तक बुंडू में पढ़ाई की थी. इसके बाद बनारस जाकर इंटर और बीए की डिग्री ली थी.
Ramesh Singh Munda Jayanti 2022: शहीद रमेश सिंह मुंडा झारखंड के पूर्व मंत्री थे. एक दिन की बात है, जब रमेश सिंह मुंडा की अगुवाई में 42 विधायक रांची जिले के बुंडू पहुंचे थे और उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने उस पद को ठुकरा दिया था. तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे और कैबिनेट मंत्री रहे. वह एक साधारण गरीब किसान आदिवासी परिवार से थे. संघर्ष के बाद उन्होंने राजनीतिक मुकाम हासिल किया था. वे पंच परगना को मिलाकर बुंडू को जिला बनाना चाहते थे. लोग प्रेम से उन्हें रमेश भैया कहते थे.
बनारस से की थी कॉलेज की पढ़ाई
रमेश सिंह मुंडा का जन्म 11 नवंबर 1955 को बुंडू प्रखंड की एदलहातू पंचायत के चिरुडीह में हुआ था. उनके पिता हरि सिंह मुंडा थे. माता का नाम मंगला देवी था. किसी को ये अंदाजा बिल्कुल न था कि ऐसे जंगलों के बीच जन्म लेने और गरीबी से लड़कर ये रमेश सिंह मुंडा नाम से प्रसिद्ध होंगे और किसी दिन मुख्यमंत्री का पद भी ठुकरा सकते हैं. उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत बुंडू प्रखंड के तत्कालीन प्रमुख प्रफुल्ल कुमार सिंह कांग्रेसी नेता के घर से की थी. दसवीं तक बुंडू में पढ़ाई की थी. इसके बाद बनारस जाकर इंटर और बीए की डिग्री ली थी.
कांग्रेस से की थी बगावत
वर्ष 1990 में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय तिरु मोची राय मुंडा के खिलाफ पहली बार चुनाव लड़ा था. उसके बाद तत्कालीन पूर्व मंत्री मुजरा मुंडा के निधन के बाद उपचुनाव हुआ. इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा से चुनाव लड़ा और कालीचरण मुंडा से पराजित हुए. इसके बाद 1995 में नीतीश कुमार की समता पार्टी से चुनाव लड़े थे. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में रमेश सिंह मुंडा बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए. 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बनने के बाद रमेश सिंह मुंडा को मंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ. इसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में भी दोबारा जीतकर कैबिनेट मंत्री बने.
क्षेत्र नक्सलियों का गढ़ था
प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी द्वारा 9 जुलाई 2008 को बुंडू स्थित हाईस्कूल में रमेश सिंह मुंडा बच्चों के किसी कार्यक्रम में सम्मिलित होने के क्रम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. किसी को अंदाजा न था कि यह दिन रमेश सिंह मुंडा का आखिरी दिन होगा. उनके पुत्र विधायक विकास कुमार मुंडा बताते हैं कि नक्सलियों द्वारा गोली मारने की योजना का आभास था, लेकिन वे डरते नहीं थे. इधर, रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड की एनआईए जांच हुई. इसमें उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पूर्व मंत्री राजा पीटर और कुख्यात नक्सली पूर्व एरिया कमांडर कुंदन पहन हत्याकांड के आरोपी के रूप में जेल में बंद हैं.
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रिपोर्ट : आनंद राम महतो, बुंडू, रांची
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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