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मैं जिंदगी हूं...मुझे मत काटो, झारखंड की राजधानी बनने के बाद यहां काटे गये 20 हजार पेड़

Updated at : 12 Jul 2023 10:19 AM (IST)
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मैं जिंदगी हूं...मुझे मत काटो, झारखंड की राजधानी बनने के बाद यहां काटे गये 20 हजार पेड़

वन विभाग की ओर से पेड़-पौधों को संरक्षित करने और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए 'मिशन लाइफ' अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में खाली जगहों पर पौधरोपण करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है.

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मैं पेड़ हूं. जीवनदायी हूं. जिंदगी हूं. मुझे मत काटो. मैं प्रकृति का दिया हुआ अनमोल उपहार हूं. मैं लोगों को ऑक्सीजन देता हूं. इसके बिना जीव जंतु और मनुष्य जी नहीं सकते. गर्मियों में मेरे छाये के नीचे बैठ कर लोग थकान दूर करते हैं. मैं उन्हें ठंडी हवा प्रदान करता हूं. इतना ही नहीं, प्रकृति और पर्यावरण को भी संतुलित रखता हूं. मैं मनुष्य को फल, छाया, लकड़ी और औषधि देता हूं. इतना कुछ देने के बाद भी जब मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए हमें काटने का प्रयास करते हैं, तब मुझे बहुत दुख होता है. यह सिर्फ बात नहीं, हकीकत है. अगर अब भी नहीं समझे, तो देर हो जायेगी. इस वर्ष गर्मी में रांची वासियों ने इसे नजदीक से देखा. इसलिए अपनी जिंदगी की लाइफ लाइन पेड़ों की सेहत के बारे में सोचिए. पेड़ों को बचाइये और बच्चों व आसपास के लोगों को भी पौधे लगाने के लिए प्रेरित करें.

इस बार गर्मी में तप रही थी रांची

एक समय रांची को संयुक्त बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी कहा जाता था. वही रांची इस बार गर्मी में तप रही थी. जिस रांची के मौसम को लेकर लोगों के बीच चर्चा होती थी, वहां के लोग इस बार गर्मी में परेशान रहे. हल्की गर्मी के बाद बारिश हो जाती थी, लेकिन इस बार बारिश भी रूठी है. क्योंकि, हम लोगों ने जिंदगी (पेड़) को अहमियत देना छोड़ दिया है. उसका संरक्षण और संवर्धन कैसे होगा, इसके बारे में हम सभी चर्चा तो करते हैं, लेकिन उसे मूर्त रूप नहीं दे पाते हैं. पौधा लगाने और पेड़ों को बचाने की बात हमारे जेहन में तभी आती है, जब तापमान बढ़ रहा होता है, गर्मी से परेशान रहते हैं या फिर बारिश नहीं होती है.

पेड़ ही हमारी जिंदगी है

  • पेड़ मनुष्य को कई महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध कराते हैं.

  • शाखाओं का इस्तेमाल आज भी लोग घरेलू ईंधन के रूप में करते हैं.

  • पेड़ जानवरों को भोजन और आश्रय देते हैं.

  • कार्बन डाइऑक्साइट लेकर ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं.

  • मिट्टी के कटाव को रोकते हैं.

  • बाढ़ रोकने का काम करते हैं.

  • पेड़ आस-पास की हवा को साफ करते हैं.

  • पेड़ से कई प्रकार की दवा भी बनती है.

  • तापमान के गिरावट में सहायक सिद्ध होती है.

  • समय पर बारिश और पर्याप्त बारिश में पेड़ों की अहम भूमिका है.

  • मृत पेड़ भी सैकड़ों प्रजाति के लिए आश्रय बनते हैं.

जिंदगी के नष्ट होने के मुख्य कारण

  • निर्माण कार्य

  • उचित देखभाल न होना

  • सड़क चौड़ीकरण

  • सौंदर्यीकरण

राजधानी बनने के बाद 20 हजार पेड़ काटे गये

रांची कभी पेड़-पौधों से हरा-भरा दिखती थी, लेकिन विकास योजनाओं को लेकर राजधानी रांची में हजारों पेड़ काटे गये हैं. टोटल एनवायरमेंट अवेयरनेस मूवमेंट (टीम) ने 2019 में शहर के 15 इलाकों में काटे गये पेड़ों का सर्वे किया था. सर्वे काे वन विभाग के 2001 में संकलित डाटा से मेल कराया गया. इसमें पाया गया कि राजधानी बनने के बाद रांची शहर से करीब 20 हजार पेड़ विकास और निर्माण कार्य के दौरान काटे गये हैं. ज्यादातर पेड़ सड़क चाैड़ीकरण के नाम पर काटे गये. इसमें सबसे ज्यादा पहाड़ी मंदिर इलाके में 4304 पेड़ काटे गये हैं. 2001 में पहाड़ी मंदिर और आस-पास 6584 पेड़ थे. वहीं, अरगोड़ा चौक से कटहल मोड़ तक सड़क चौरीकरण और विकास कार्य के नाम पर 1512 पेड़ काटे गये.

2001 में 1632 पेड़ थे. वर्तमान में सिर्फ 120 हैं. बिरसा चौक से रातू रोड चौक तक 950 (2001 में 1240, अब 290 से कम), बूटी मोड़ से कांटाटोली तक 1170 पेड़ (2001 में 1254, अब 84 से कम), राजभवन से बूटी मोड़ तक 990 पेड़ (2001 में 1030 थे, अब 40), कांटाटोली से नामकुम के बीच 1792 पेड़ (2001 में 2402 थे अब 610 से कम) व बिरसा चौक से सिंह मोड़ लटमा तक 2705 पेड़ काटे (2001 में 3260 थे अब 555 से कम) गये. वहीं, सरकारी कार्यालयों के आस-पास विकास कार्य और सौंदर्यीकरण के नाम पर 3808 पेड़ काटे गये. 2001 में सरकारी भवनों के कैंपस में 4332 पेड़ चिह्नित किये गये थे, जबकि 20 वर्ष बाद 524 से कम पेड़ बचे हैं. इसके अलावा पिस्का मोड़ से कांठीटांड़, कांटाटोली से कचहरी चौक, कांटाटोली से रांची रेलवे स्टेशन, राजेंद्र चौक से आइआइसीएम कांके व करमटोली से टैगोर हिल रोड तक 1767 पेड़ काटे जा चुके हैं.

मिशन लाइफ के जरिये किया जा रहा जागरूक

वन विभाग की ओर से पेड़-पौधों को संरक्षित करने और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन लाइफ’ अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में खाली जगहों पर पौधरोपण करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही पेड़-पौधों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी मोहल्ला कमेटी को दी जा रही है. वहीं, जैव-विविधता पर्षद की ओर से 23 मई से तीन जून तक 183 पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया. लोगों को पेड़-पौधों के संरक्षण को लेकर शपथ दिलायी गयी. इसके साथ ही प्लांटेशन ड्राइव के जरिये नीम, तुलसी, सुगंधा समेत अन्य छायादार पौधे लगाये गये हैं.

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