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झारखंड की पंचायतों में 14वें वित्त आयोग की राशि से हुई खरीदारी में अनियमितता की होगी निगरानी जांच, पंचायती राज निदेशक ने दिया ये निर्देश

Updated at : 31 Mar 2021 3:44 PM (IST)
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झारखंड की पंचायतों में 14वें वित्त आयोग की राशि से हुई खरीदारी में अनियमितता की होगी निगरानी जांच, पंचायती राज निदेशक ने दिया ये निर्देश

Jharkhand News, Ranchi News, रांची न्यूज : झारखंड की पंचायतों में 14 वें वित्त आयोग की राशि से खरीद में हुई अनियमितता के बड़े मामलों की निगरानी जांच कराने का निर्देश दिया गया है. पंचायती राज निदेशक ने इस संबंध में सारे उपायुक्तों को पत्र लिख कर कहा है कि सामग्रियों की खरीद व निर्माण से संबंधित बड़े मामलों की निगरानी से जांच करायी जाये. इसके साथ ही विशेष ऑडिट भी करायी जाये. उपायुक्तों से कहा गया है कि वे इसका प्रस्ताव भेजें. निदेशक ने इस तरह के मामले में मुकदमा दर्ज करने को भी कहा है, लेकिन बड़े मामलों पर निगरानी जांच की आवश्यकता बतायी है.

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Jharkhand News, Ranchi News, रांची न्यूज : झारखंड की पंचायतों में 14 वें वित्त आयोग की राशि से खरीद में हुई अनियमितता के बड़े मामलों की निगरानी जांच कराने का निर्देश दिया गया है. पंचायती राज निदेशक ने इस संबंध में सारे उपायुक्तों को पत्र लिख कर कहा है कि सामग्रियों की खरीद व निर्माण से संबंधित बड़े मामलों की निगरानी से जांच करायी जाये. इसके साथ ही विशेष ऑडिट भी करायी जाये. उपायुक्तों से कहा गया है कि वे इसका प्रस्ताव भेजें. निदेशक ने इस तरह के मामले में मुकदमा दर्ज करने को भी कहा है, लेकिन बड़े मामलों पर निगरानी जांच की आवश्यकता बतायी है.

झारखंड के पंचायती राज निदेशक ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को लिखा है कि स्ट्रीट लाइट इइएसएल से खरीदनी थी, लेकिन पंचायतों में स्थानीय विक्रेताओं के माध्यम से नियम विरुद्ध खरीद की गयी है. इसमें बड़ी राशि गलत तरीके से खर्च की गयी है. खरीद निविदा के माध्यम से करानी थी. इसमें भी बड़ी गड़बड़ी की गयी है. निविदा के बजाय कोटेशन से सामग्रियों की खरीद कर ली गयी है.

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यह तय किया गया है कि 1.50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की सामग्री निविदा से खरीदनी है, लेकिन कई मामलों में योजना को छोटे-छोटे पार्ट में बांट कर राशि कम कर दी गयी है और कोटेशन से खरीद कर ली गयी. वहीं निर्माण कार्य में भी गड़बड़ी की गयी है. मेटेरियल की राशि का भुगतान नियम विरुद्ध वेंडरों को कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि अगर निगरानी जांच हुई, तो मामले में मुखिया, पंचायत सचिव, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, लाभुक समिति के अध्यक्ष, वेंडर आदि फंसेंगे.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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