झारखंड : सीबीआई कोर्ट ने 100 करोड़ के मिड डे मिल घोटाले के आरोपी संजय तिवारी की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज की
Published by : Samir Ranjan Updated At : 24 Apr 2023 7:30 PM
झारखंड में 100 करोड़ रुपये के मिड डे मील घोटाले के आरोपी संजय तिवारी की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज हो गयी. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा की अदालत ने सोमवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिका खारिज कर दिया.
Jharkhand News: झारखंड में 100 करोड़ के मिड डे मील घोटाले के आरोपी संजय तिवारी की डिस्चार्ज पिटीशन सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा की अदालत ने खारिज कर दी. संजय कुमार तिवारी पर उक्त मामले में सीबीआइ ने भी केस किया था. बता दें कि संजय तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद को 300.03 एकड़ में फैले चाय बागान का मालिक बताया था. जिसे ईडी ने जांच के दौरान चाय बागान को अस्तित्व विहीन और ई-मेल से हुई बातचीत को फर्जी पाया था.
साेमवार को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में हुई सुनवाई
भानू कंस्ट्रक्शन के संचालक संजय कुमार तिवारी पर इस मामले में सीबीआई ने भी केस किया था. इस मामले में 20 अप्रैल, 2023 को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 24 अप्रैल की तिथि तय की थी. सोमवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिका खारिज कर दी.
संजय तिवारी के खिलाफ छह मामले दर्ज
वर्तमान में संजय तिवारी बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार रांची के जेल में बंद है. बता दें कि ईडी, सीबीआई के अलावा संजय तिवारी पर ओडिशा, गाजियाबाद, रांची के अरगोड़ा थाना में धोखाधड़ी एवं जालसाजी सहित छह प्राथमिकी अब तक दर्ज की जा चुकी है.
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आरोपी संजय तिवारी ने किया था दावा
बता दें कि आरोपी संजय तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दावा किया कि वो अपनी संपत्ति बेच कर बैंक का पैसा चुकाने को तैयार है. अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने भी उसे जमानत नहीं दी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अपने दावे को पुख्ता करने के लिए कुछ दस्तावेज भी पेश किये.
ईडी ने दावे को फर्जी बताया
इधर, संजय तिवारी के दावे को ईडी ने जांच में फर्जी बताया. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में संजय तिवारी द्वारा किये गये दावों की जांच के लिए अधिकारियों का एक दल असम भेजा था. जांच पड़ताल के दौरान ईडी को संजय तिवारी के मालिकाना हक वाला चाय बागान कहीं नहीं मिला था. वहीं, जालसाजी के मद्देनजर खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज की भी जांच की थी. इस दस्तावेज में वाराणसी में संजय तिवारी के नाम पर कोई संपत्ति नहीं मिलने की जानकारी मिली.
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By Samir Ranjan
Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media
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