झारखंड में 1932 का खतियान कब होगा लागू, सीएम हेमंत ने बताया, बोले- कोर्ट के निर्णय का कर रहे अध्ययन

Updated at : 01 Mar 2022 6:35 AM (IST)
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झारखंड में 1932 का खतियान कब होगा लागू, सीएम हेमंत ने बताया, बोले- कोर्ट के निर्णय का कर रहे अध्ययन

1932 के खतियान के सवाल के जवाब में हेमंत सोरेन ने सदन में बताया कि झारखंड में जल्द लागू होगा फिलहाल कोर्ट के आदेश का अध्ययन हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार आदिवासी-मूलवासी को लेकर गंभीर है.

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रांची: बजट सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में 1932 के आधार पर स्थानीय नीति लागू करने की मांग सदन में गूंजी़ पक्ष-विपक्ष के विधायकों का कहना था कि झारखंडी की पहचान अंतिम सर्वे 1932 के आधार पर हो और सरकार इस पर जल्द फैसला ले़ आजसू विधायक डॉ लंबोदर महतो ने सरकार से पूछा कि 1932 के आधार पर स्थानीय नीति लागू कर यहां के खतियानी लोगों को अधिकार कब मिलेगा.

इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि स्थानीय नीति को लागू करने के मामले में सरकार कई सीढ़ी चढ़ी और उतरी है़ यह विषय हमेशा ही राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है़ राज्य गठन के 20 साल हो गये, 1932 खतियान की मांग उठती रही है़ तत्कालीन सरकार ने इसे परिभाषित भी किया था और उच्च न्यायालय ने उसे निरस्त कर दिया था़ मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी-मूलवासी को लेकर गंभीर है़ न्यायालय के आदेश का अध्ययन हो रहा है़ जल्द ही इस पर निर्णय होगा़

डॉ लंबोदर और माले विधायक विनोद सिंह ने सदन में लाया मामला, पक्ष-विपक्ष आये साथ

मंत्री आलमगीर ने कहा : स्थानीय नीति के लिए त्रि-सदस्यीय कमेटी जल्द बनायेगी सरकार

राज्य के आदिवासी-मूलवासी का होगा नुकसान, नीति बदले सरकार : विनोद

सबके लिए नीति बने, तब तक परीक्षा रद्द करे सरकार : भानुप्रताप शाही

स्थानीयता की लड़ाई हमने लड़ी, जेल गये, अब इस मामले में देर ना करें : बंधु

26 माह गुजर गये, त्रि-सदस्यीय कमेटी नहीं बनी, गैर आरक्षित वंचित होंगे : नवीन

विधानसभा में झारखंड के गैर आरक्षित मूलवासी के बच्चों को नौकरी से वंचित करने का मामला उठा

रांची. सदन में सरकार की नियोजन नीति के तहत राज्य के गैर आरक्षित मूलवासी के बच्चों को झारखंड में नौकरी से वंचित करने का मामला सदन में आया़ आजसू विधायक डॉ लंबोदर महतो ने अल्पसूचित के तहत पूछा कि राज्य में तृतीय व चतुर्थ वर्ग की श्रेणी में नौकरी के लिए मैट्रिक व इंटरमीडिएट झारखंड से पास होना अनिवार्य किया गया है़

सरकार ने कहा है कि इसमें आरक्षण की श्रेणी में आनेवाले लोगों को बाहर पढ़ने के बावजूद आरक्षण का लाभ मिलेगा़ पक्ष-विपक्ष के विधायकों का कहना था कि गैर आरक्षित खतियानी मूलवासियों को क्यों वंचित किया जा रहा़ अगर किसी मूलवासी का बच्चा बाहर पढ़ेगा, तो उसे क्यों रोका जा रहा है़ सरकार इस नीति में परिवर्तन लाये़

आजसू विधायक सुदेश महतो, माले विधायक विनोद सिंह, भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही, नवीन जायसवाल, अमर बाउरी और विधायक प्रदीप यादव सहित कई विधायकों ने इस नीति पर आपत्ति जतायी़ मंत्री आलमगीर आलम का कहना था कि सरकार झारखंड के लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ देना चाहती है़ 32 के खतियान का मामला विचाराधीन है़ त्रि-सदस्यीय उपसमिति जल्द बनेगी़

Posted By: Sameer Oraon

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