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रतन टाटा, सुधा मूर्ति की श्रेणी में झारखंड की बेटी शुभांशी चक्रवर्ती, मिला ‘महात्मा अवार्ड 2025’

5 Oct, 2025 3:37 pm
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Mahatma Award 2025 shubhanshi jharkhand

रजरप्पा की शुभांशी चक्रवर्ती को ‘महात्मा अवार्ड 2025’ प्रदान करते अतिथिगण.

Mahatma Award 2025: झारखंड की बेटी शुभांशी चक्रवर्ती को बड़ा सम्मान मिला है. गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर उन्हें ‘महात्मा अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया गया. जमशेदपुर में जन्मी और रजरप्पा में पली-बढ़ी शुभांशी ने आगे की पढ़ाई मुंबई में की. इसी दौरान उन्होंने एक किताब लिखी, जिसे महात्मा अवार्ड 2025 मिला है. इसके पहले रतन टाटा, सुधा मूर्ति और अजीम प्रेमजी जैसे लोगों को यह सम्मान मिल चुका है.

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Mahatma Award 2025| रजरप्पा (रामगढ़), सुरेंद्र कुमार/शंकर पोद्दार : झारखंड की धरती एक बार फिर गौरवान्वित हुई है. राजरप्पा की प्रतिभाशाली बेटी शुभांशी चक्रवर्ती को महज 18 वर्ष की उम्र में प्रतिष्ठित ‘महात्मा अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें सामाजिक सरोकार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर नयी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशन सेंटर के सभागार में आयोजित भव्य समारोह में शुभांशी को ‘लीडरशिप इन सोशल गुड एंड इम्पैक्ट’ श्रेणी में यह पुरस्कार प्रदान किया गया.

शुभांशी का नाम पुकारते ही तालियों से गूंजा हॉल

कोंकण रेलवे के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा ने यह पुरस्कार प्रदान किया. इस अवसर पर देश की प्रथम महिला आईपीएस ऑफिसर डॉ किरण बेदी और राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के सचिव ए अन्नामलाई विशेष रूप से उपस्थित थे. जब इस युवा लेखिका का नाम मंच से पुकारा गया, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा. रतन टाटा, सुधा मूर्ति, अजीम प्रेमजी, डॉ किरण बेदी और डॉ सोनल मान सिंह जैसी महान हस्तियों को को यह पुरस्कार मिल चुका है.

Mahatma Award 2025: ‘पास्ट इज फॉरवर्ड’ से मिली पहचान

शुभांशी को यह सम्मान उनकी प्रथम पुस्तक ‘Past is Forward : A Journey Back to Heal the Future’ के लिए मिला है. यह पुस्तक भारतीय संस्कृति – आदिवासी परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित है, जो अतीत से सीख लेकर भविष्य को संवारने का संदेश देती है. इस पुस्तक का विमोचन नयी दिल्ली में राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और मेजर जनरल जीडी बक्शी ने किया था. इस अवसर पर मौजूद गणमान्य व्यक्तियों ने शुभांशी की सोच और लेखन की सराहना की. पुस्तक की प्रशंसा डॉ एल सुब्रमणियम, कविता कृष्णमूर्ति, प्रो अन्विता अब्बी, बी मुथुरामन और जीएन देवी जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा भी की गयी है.

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फिल्म के जरिये संस्कृति को सहेजने की कोशिश

लेखन के साथ शुभांशी एक संवेदनशील फिल्म निर्माता भी हैं. उनकी लघु फिल्म ‘नाटोक’ झारखंड की पारंपरिक लोकनृत्य शैली छऊ नृत्य पर आधारित है. यह फिल्म इस कला के संरक्षण और बदलते सामाजिक परिवेश में उसकी स्थिति पर गहरी दृष्टि प्रस्तुत करती है. अब तक यह फिल्म 17 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में प्रदर्शित हो चुकी है और 9 पुरस्कार जीत चुकी है. इनमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सांस्कृतिक संरक्षण के सम्मान शामिल हैं.

प्रकृति से जुड़ी सोच, युवाओं के लिए प्रेरणा

शुभांशी का बचपन झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बीता है. वहीं से उन्हें प्रकृति और संस्कृति के गहरे संबंध की समझ मिली. वर्तमान में वह पर्यावरण विज्ञान और स्थिरता (Environmental Science & Sustainability) विषय की पढ़ाई कर रही हैं. वह लेखन, फिल्म और संवाद के माध्यम से युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दे रही हैं. उनके लेख देश के प्रतिष्ठित अखबारों में प्रकाशित हो चुके हैं.

उम्र नहीं, विचारों से होता है बदलाव

‘महात्मा अवार्ड 2025’ में शुभांशी का नाम मल्लिका साराभाई, डॉ यूसुफ हमीद (Cipla) और संदीप कुमार गुप्ता (GAIL India) जैसी जानी-मानी हस्तियों के साथ लिया गया. इस सम्मान ने साबित कर दिया कि समाज में बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि विचार और संकल्प की शक्ति मायने रखती है. रजरप्पा की यह होनहार बेटी आज पूरे झारखंड की शान बन चुकी हैं. शुभांशी चक्रवर्ती ने यह दिखाया है कि अगर सोच सकारात्मक और लक्ष्य स्पष्ट के साथ नीयत सच्ची हो, तो कोई भी उम्र बड़ी उपलब्धि हासिल करने में बाधा नहीं बन सकती.

जमशेदपुर में हुआ जन्म, रजरप्पा में पली बढ़ी

शुभांशी चक्रवर्ती का जन्म जमशेदपुर में हुआ. जमशेदपुर में शुभांशी का ननिहाल है. शुभांशी रजरप्पा प्रोजेक्ट में पली-बढ़ी हैं, क्योंकि उस समय शुभांशी के दादा टीके चक्रवर्ती और दादी एस चक्रवर्ती डीएवी रजरप्पा में शिक्षक और शिक्षिका थीं. शुभांशी की शुरुआती पढ़ाई जमशेदपुर के डीबीएमएस में हुई. इसके बाद दसवीं एवं बारहवीं की पढ़ाई मुंबई के हीरानंदानी फाउंडेशन स्कूल से हुई. वर्तमान में शुभांशी पर्यावरण विषय की पढ़ाई मुंबई की डीवाई पाटील यूनिवर्सिटी में नामांकन लिया है. इनके पिता शुभाशीष चक्रवर्ती सोशल साइंटिस्ट हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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