हिंदी साहित्य में अमूल्य योगदान के लिए साहित्यकार रणेंद्र पहले सुबर्नशिला सम्मान से होंगे सम्मानित
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 09 Sep 2022 4:33 PM
प्रथम सुबर्नशिला सम्मान हिंदी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार रणेंद्र को दिया जा रहा है. सम्मान समारोह का आयोजन 12 सितंबर को किया गया है. ग्लोबल गांव के देवता, गायब होता देश, गूंगी रुलाई का कोरस जैसे महत्वपूर्ण उपन्यासों ने रणेंद्र जी को हिंदी साहित्य जगत में हस्ताक्षर के रूप में स्थापित किया है.
बांग्ला के सुप्रसिद्ध कथाकार विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के नाम पर स्थापित विभूति स्मृति संसद ने उनकी 128वीं जयंती के अवसर पर इस वर्ष से साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विविध भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित करने के लिए सुबर्नशिला सम्मान की शुरूआत की है. साथ ही इस वर्ष विविध साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जायेगा.
प्रथम सुबर्नशिला सम्मान हिंदी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार रणेंद्र को दिया जा रहा है. सम्मान समारोह का आयोजन 12 सितंबर को किया गया है. ग्लोबल गांव के देवता, गायब होता देश, गूंगी रुलाई का कोरस जैसे महत्वपूर्ण उपन्यासों ने रणेंद्र जी को हिंदी साहित्य जगत में हस्ताक्षर के रूप में स्थापित किया. रणेंद्र जी के अलावा बांग्ला भाषा के दो अन्य कथाकारों निसार आमीन और अजीत त्रिवेदी को भी इस वर्ष का सुबर्नशिला सम्मान दिया जायेगा. रणेंद्र को साल 2020 के श्रीलाल शुक्ल साहित्य सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है.
इस साहित्यिक आयोजन में विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के साहित्य पर विमर्श सत्र ‘आमार चोखे बिभूति भूषण’ का भी आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम में विभूति भूषण के साहित्य पर वैचारिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप कोलकाता के वरिष्ठ इप्टाकर्मी मित्रा सेन मजूमदार उपस्थित रहेंगे.
विभूति भूषण की जयंती 12 सितंबर, 2022 को घाटशिला में इस सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है. इस साहित्यिक कार्यक्रम सह सम्मान समारोह में स्थानीय प्रलेस और इप्टा के साथी भी सहयोगी की भूमिका में रहेंगे. कार्यक्रम में सुबह पुस्तकालय और विभूति भूषण बंद्योपाध्याय पर केंद्रित आर्ट गैलरी का उद्घाटन किया जायेगा.
सम्मान समारोह में शाम को चंद्रिमा चटर्जी के द्वारा प्रशिक्षित बाल और युवा कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति की जायेगी और और नाटक महंगा सौदा (प्रेमचंद अनुदित टॉलस्टॉय की कहानी के नाट्य रूपांतरण) पेश किया जायेगा. कार्यक्रम में कई साहित्यकार, रंगकर्मी और गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे. यह जानकारी विभूति स्मृति संसद, घाटशिला के सुशांत सीट ने दी है, जो कार्यक्रम के संयोजक हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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