Book Review : बेहतरीन शिक्षा का पूरा ट्यूटोरियल है– इंपावरिंग लर्नर्स बिल्डिंग फाउंडेशन

पुस्तक समीक्षा
Book Review : मांडवी त्रिपाठी एक शिक्षाविद और समाजसेवी हैं. उन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का समय दिया है. अपनी इस पुस्तक के जरिए उन्होंने बेहतरीन शिक्षा के जरूरी आयामों की चर्चा की है.
Book Review : बच्चों को बेहतरीन शिक्षा कैसे दी जाए, यह आज की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती है. माता–पिता इसके लिए पूरी तरह स्कूलों को जिम्मेदार बनाना चाहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि बिना माता–पिता और बच्चों के सहयोग के यह संभव नहीं है. इंपावरिंग लर्नर्स बिल्डिंग फाउंडेशन, उसी दिशा में एक मार्गदर्शक है. इस किताब की लेखिका हैं मांडवी त्रिपाठी जो खुद एक शिक्षाविद् हैं.
एजुकेशन के सभी स्टेक होल्डर का सहयोग जरूरी
मांडवी त्रिपाठी ने अपनी किताब में यह बताने का प्रयास किया है कि सफल शिक्षा तभी संभव है जब तीनों पक्ष शिक्षक, माता-पिता और विद्यार्थी एक दूसरे को समझें और बेहतरीन शिक्षा के लिए प्रयास करें. बेहतरीन शिक्षा की राह में जो बाधाएं हैं, उसे मिटाने के सभी कारगर उपाय उन्होंने बताया है.
स्कूल क्यों जरूरी हैं और उनकी असली भूमिका क्या है, इसके बारे में भी लेखिका ने बखूबी बताया है. कुल 11 चैप्टर में उन्होंने सफल शिक्षा के सभी आयामों पर चर्चा की है. विभिन्न चैप्टर्स में अलग–अलग विषयों पर चर्चा की गई है, मसलन अभिभावकों को स्कूल से क्या उम्मीदें करनी चाहिए. स्कूल और पेरेंट्स मिलकर कैसे बच्चों की परवरिश को बेहतर बना सकते हैं. पॉजिटिव पेरेंटिंग के व्यावहारिक तरीके क्या हैं. टीचर्स और पेरेंट्स को बच्चों से किन बातों से बचना चाहिए. EQ (Emotional Quotient), SQ (Social Quotient) और AQ (Adaptability Quotient) जैसे पहलू अकादमिक सफलता जितने ही जरूरी हैं.
बेहतर शिक्षा के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरत
मांडवी त्रिपाठी ने इस किताब में बहुत सहजता से उन बातों का जिक्र कर दिया है, जिसे बताने में हमेशा बोझिल तरीकों का प्रयोग किया जाता है. यह किताब एक रोडमैप तैयार करती है, जिसके आधार पर बेहतर शिक्षा संभव है. यह किताब प्रैक्टिकल नजरिए पर काम करने की सलाह देती है. यह किताब बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के लिए ही बहुत उपयोगी है.
लेखिका का परिचय
मांडवी त्रिपाठी एक शिक्षाविद और समाजसेवी हैं. उन्होंने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का समय दिया है. उन्होंने अपने करियर में शिक्षकों और माता–पिता के बीच की खाई को भरने का भरपूर प्रयास किया है.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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