झारखंड के कहानीकार शेखर मल्लिक को भारतीय भाषा परिषद देगी युवा पुरस्कार, 8 अप्रैल को कोलकाता में मिलेगा सम्मान
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 13 Mar 2023 8:42 PM
शेखर मल्लिक का चयन हिंदी भाषा के लिए किया गया है. आठ अप्रैल को शेखर मल्लिक को यह पुरस्कार कोलकाता में दिया जायेगा.
भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का प्रतिष्ठित युवा पुरस्कार झारखंड के युवा कथाकार शेखर मल्लिक को दिया जायेगा. इस संबंध में कथाकार शेखर मल्लिक को परिषद ने ईमेल के जरिये सूचना दी है. शेखर मल्लिक ने प्रतिष्ठित युवा पुरस्कार दिये जाने की घोषणा के बाद प्रभात खबर के साथ बातचीत में बताया कि वर्ष 2020 में ही उन्हें यह पुरस्कार दिये जाने का निर्णय हो चुका था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से उस वक्त यह पुरस्कार दिये जाने की घोषणा नहीं हुई. गौरतलब है कि शेखर मल्लिक को युवा पुरस्कार 2020 दिये जाने की सूचना आज ही मिली है.
शेखर मल्लिक झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय भाषा परिषद का यह पुरस्कार हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के युवा साहित्यकारों को साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है. शेखर मल्लिक का चयन हिंदी भाषा के लिए किया गया है. आठ अप्रैल को शेखर मल्लिक को यह पुरस्कार कोलकाता में दिया जायेगा. भारतीय भाषा परिषद के इस पुरस्कार में लेखक को 41 हजार रुपये की राशि, एक स्मृति चिह्न, अभिनंदन पत्र और शाॅल देकर सम्मानित किया जायेगा.
झारखंड प्रगतिशील लेखक संघ के उप महासचिव शेखर मल्लिक समकालीन चर्चित युवा लेखक हैं, जिनकी पहली कहानी को प्रतिष्ठित पत्रिका हंस में प्रथम प्रेमचंद कहानी पुरस्कार 2004 हेतु नामित किया गया था. उनके तीन कहानी संग्रह स्वीकार और अन्य कहानियां, कस्बाई औरतों के किस्से और आधी रात का किस्सागो तथा एक उपन्यास कालचिती प्रकाशित हैं. शेखर मल्लिक IPTA से भी जुड़े संस्कृतिकर्मी भी हैं. शेखर मल्लिक ने बताया कि उनके दो उपन्यास अभी प्रकाशित होने वाले हैं. उनकी कथा रचनाओं के नाट्य रूपांतरण, अन्य भाषाओं में अनुवाद व उन पर शोध कार्य भी हुए हैं.
शेखर मल्लिक का जन्म 18 दिसंबर 1978 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुआ है. इन्होंने हिंदी भाषा में स्नातकोत्तर किया है. साथ ही पत्रकारिता में डिप्लोमा भी किया है. ये रांची विश्वविद्यालय में शोधरत हैं. इनकी रचनाएं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें हंस, उद्घोष, अन्यथा, परिकथा, पाखी, वागर्थ और प्रगतिशील वसुधा शामिल हैं. इसके अलावा इनकी कहानियां प्रभात खबर और दैनिक हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित हो चुकी हैं.
संपर्क- shekhar.mallick.18@gmail.com
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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