दीपावली के अवसर पर सोशल मीडिया में वायरल हुई अटल बिहारी वाजपेयी की कविता
Author Prabhat khabar digital desk
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कल दीपावली के अवसर पर सोशल मीडिया में एक कविता बहुत वायरल हुई, वह कविता थी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की. वाजपेयी जी भारत के 10वें प्रधानमंत्री थे फिलहाल वे बहुत अस्वस्थ हैं और कोमा में हैं, लेकिन इस दीपावली पर उन्हें सोशल मीडिया में बहुत याद किया गया. वाजपेयी जी एक कोमल हृदय […]
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कल दीपावली के अवसर पर सोशल मीडिया में एक कविता बहुत वायरल हुई, वह कविता थी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की. वाजपेयी जी भारत के 10वें प्रधानमंत्री थे फिलहाल वे बहुत अस्वस्थ हैं और कोमा में हैं, लेकिन इस दीपावली पर उन्हें सोशल मीडिया में बहुत याद किया गया. वाजपेयी जी एक कोमल हृदय राजनेता माने जाते थे, तभी उनकी वाणी से कविताएं फूटती थीं. इस दीवाली उनकी यह कविता वायरल हुई :-
उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है
-अटल बिहारी वाजपेयी-
जब मन में हो मौज बहारों की
चमकाएं चमक सितारों की,
जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों
तन्हाई में भी मेले हों,
आनंद की आभा होती है
उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है .
जब प्रेम के दीपक जलते हों
सपने जब सच में बदलते हों,
मन में हो मधुरता भावों की
जब लहके फ़सलें चावों की,
उत्साह की आभा होती है
उस रोज दिवाली होती है .
जब प्रेम से मीत बुलाते हों
दुश्मन भी गले लगाते हों,
जब कहीं किसी से वैर न हो
सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,
अपनत्व की आभा होती है
उस रोज़ दिवाली होती है .
जब तन-मन-जीवन सज जायें
सद्-भाव के बाजे बज जायें,
महकाए ख़ुशबू ख़ुशियों की
मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,
तृप्ति की आभा होती है
उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है .
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