दीपावली पर पढ़ें दो कविता

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date

धरा पे ले आयें

दीपावली पर पढ़ें दो कविता

-मिथिलेश कुमार मिश्र ‘ दर्द ’-

चलो रोशनी को धरा पे ले आयें.
रही कैद महलों में रोती बिचारी
कर –कर के विनती सबों से है हारी
समय आ गया है हम आंसू को पोछें
तपते हुए तन को आओ अंगोछे
आओ करें कुछ कि निर्धन भी गायें
चलो रोशनी को धरा पे ले आयें.
जिनके घरों में जा रोती दीवाली
रोते हैं बच्चे पर जेबें हैं खाली
जलाने को दो-चार दीये नहीं हैं
खोजे भी मिलते न दाने कहीं हैं
सुनाएं व्यथा तो वे किसको सुनाएं
चलो रोशनी को धरा पे ले आयें.
आओ करें प्रण कि पीड़ा हरेंगे
दाने बिना अब न भूखे मरेंगे
चलो हम मनायें यों सच्ची दिवाली
सच ही करें कुछ न बातें हों खाली
आओ जियें निर्धनों को जिलायें
चलो रोशनी को धरा पे ले आयें.
हर देहरी पर दीप जले ...!
दीपावली पर पढ़ें दो कविता
मुक्ति शाहदेव

चलो उदास चेहरों को
मुस्कान देने का जतन करें
अंधेरे घरों को भी आज रोशन करें
कि रोती हैं रात भर जो आंखें
उन पलकों में भी प्यारे सपने पलें
रतजगा हो खत्म चांदनी रातों में
नींद वाली लोरी की गुनगुन सुनें
सांस आती है मुश्किल से बड़ी
कंक्रीटों की दुनिया में
आओ फिर कुछ बिरवे आम पीपल के बोने का संकल्प करें
गया था वह जाने क्यों लौटा नहीं
बाट जोहती पथराई आंखों में
चलो ना कुछ नये रंग भरें
उम्मीदों का चिराग बुझ गया है जहां
उस देहरी पर ध्रुव तारे सा एक अखंड दीप धरें .
Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें