Umrah Bus Tragedy: क्या है उमराह, जिसके लिए सऊदी अरब गए 42 भारतीयों की हुई मौत?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 18 Nov 2025 5:29 PM
मक्का में उमराह
Umrah Bus Tragedy: ‘ अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं,अल्लाह सबसे महान है, और सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है.’ यह एक दुआ है जिसे एक मुसलमान श्रद्धालु तब पढ़ता है जब वो उमराह कर रहा होता है. उमराह मुसलमानों के लिए एक पवित्र धार्मिक यात्रा है. हालांकि उमराह किसी भी मुसलमान के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता है, लेकिन इसका बहुत महत्व है. उमराह की इसी यात्रा के दौरान एक बस दुर्घटना हुई और भारत के 42 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है.
Table of Contents
Umrah Bus Tragedy: उमराह के लिए सऊदी अरब की यात्रा पर गए 42 भारतीयों की मौत बस दुर्घटना में हो गई है. यह दुर्घटना उस वक्त हुई, जब बस भारतीय यात्रियों को लेकर मक्का से मदीना जा रही थी. जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार बस एक तेल के टैंकर से टकरा गई और बस में आग लग गई और यात्रियों को बचने का मौका भी नहीं मिला. मारे गए लगभग सभी यात्री हैदराबाद के थे और सऊदी अरब उमराह के लिए गए थे. उमराह की प्रक्रिया और महत्व के बारे में जानते हैं.
क्या है उमराह?
मुसलमानों के लिए उमराह बहुत ही पवित्र तीर्थयात्रा है. इसे हज के बाद सबसे पवित्र माना जाता है, इसी वजह से इसे ‘छोटी हज’ भी कहा जाता है. उमराह के लिए देश-विदेश से मुसलमान श्रद्धालु मक्का जाते हैं. यह एक पाक यात्रा है और इसकी प्रक्रियाएं हज की तुलना में थोड़ी सरल होती है.
उमराह की विधि क्या है?

उमराह, एक धार्मिक यात्रा है जिसमें मुसलमान पहले तो इरादा करते हैं, उसके बाद अपना शुद्धिकरण कर एक विशेष प्रकार का वस्त्र पहनते हैं, जिसमें पुरुष बिना सिले सफेद कपड़े पहनते हैं और महिलाओं को ढीला-ढाला वस्त्र पहनना होता है. इसे एहराम कहते हैं, इस विधि के दौरान श्रद्धालु पर कई तरह की पाबंदियां होती हैं, मसलन शिकार ना करना, गुस्सा ना करना. पत्नी-पत्नी के बीच संबंध ना होना इत्यादि. इस अवस्था में इंसान पूरी तरह पवित्र रहता है, वह नाखून भी काट चुका होता है. उसके बाद वे काबा की सात बार परिक्रमा करते हैं, जिसे काबा का तवाफ करना कहते हैं.
काबा का तवाफ यानी उसके चारों ओर घूमना. इसके बाद की प्रक्रिया को सई करना कहते हैं, जिसमें सफा और मरवा की पहाड़ियों के बीच 7 बार तेजी से चलना या दौड़ना होता है. इस प्रक्रिया के दौरान हर यात्री दुआ करता है और अल्लाह के प्रति अपनी आस्था को दर्शाने के लिए उनके सामने अर्जी लगाता है. चाहे औरत हो या मर्द हर किसी को सफा और मरवा की पहाड़ियों के बीच 7 चक्कर लगाने होते हैं. सफा और मरवा पहाड़ी के बीच की दूरी लगभग 450 मीटर है. इस दूरी के कुछ ही हिस्से को दौड़कर या तेज चलकर पार करना होता है, हालांकि महिलाओं को यह छूट है कि वे तीन चक्कर के बाद दौड़ने की बजाय टहलकर अपनी परिक्रमा पूरी कर लें. सफा–मरवा के बीच चलने की प्रक्रिया जब पूरी हो जाती है, तब हल्क या तकसीर की प्रक्रिया होती है, जिसमें पुरुष पूरा सिर मुंडवा सकते हैं या फिर अपने बाल को छोटे करा सकते हैं. महिलाएं भी अपने बाल को एक अंगुली के बराबर काटती हैं, उसके बाद उमराह की रस्म पूरी हो जाती है.
मक्का और मदीना मुसलमानों के लिए क्यों हैं खास?
इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का में हुआ था. मक्का में ही काबा है, काबा एक प्राचीन घर है जिसे बैतुल्लाह यानी अल्लाह का घर कहा जाता है. यह समझना भी जरूरी है कि मुसलमान काबा को नहीं, बल्कि अल्लाह को पूजते हैं, उनकी श्रद्धा काबा के प्रति भी है. मक्का के बाद मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र जगह है मदीना. मदीना में पैगंबर साहब का मकबरा है और एक पवित्र मस्जिद भी है.
ये भी पढ़ें : भारत में एक धर्म और एक बादशाह चाहता था औरंगजेब, सिर्फ युद्ध किया; नहीं बनवाई कोई भव्य इमारत
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










