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Nobel Prize : क्वांटम फिजिक्स की विचित्र दुनिया में अब इलेक्ट्रॉन ही नहीं कुछ बड़े पार्टिकल्स भी दीवार को करेंगे पार, वैज्ञानिकों ने किया साबित

Updated at : 07 Oct 2025 5:33 PM (IST)
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Nobel Prize in Physics

नोबेल पुरस्कार

The Nobel Prize : क्वांटम फिजिक्स यह मानता है कि जब गेंद दीवार पर मारी जाती है, तो उछलकर वापस आती है, लेकिन कुछ इलेक्ट्रॉन दीवार को पार कर जाते हैं. आम आदमी की भाषा में कहें तो फिजिक्स के क्षेत्र में 2025 का नोबेल पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को दिया गया है जिन्होंने यह साबित किया है कि क्वांटम फिजिक्स की दुनिया की अजीब घटनाएं अब सिर्फ सूक्ष्म पार्टिकल्स में ही नहीं हाथ में पकड़ने लायक उपकरणों में भी देखी जा सकती हैं. इस आविष्कार को भविष्य के आविष्कारों के लिए आधार माना जा रहा है.

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The Nobel Prize : रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने भौतिकी (Physics) के क्षेत्र में साल 2025 का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की है. इन वैज्ञानिकों के नाम हैं- जॉन क्लार्क, मिशेल एच डेवोरेट और जॉन एम मार्टिनिस . इन वैज्ञानिकों ने अपने आविष्कार के जरिए बताया है कि क्वाटंम फिजिक्स के प्रयोग माइक्रो मीटर की जगह अब सेंटीमीटर में भी दिख सकते हैं. कहने का अर्थ यह है कि क्वांटम दुनिया की अजीब घटनाएं सिर्फ इलेक्ट्राॅन पार्टिकल्स में ही नहीं बड़े इलेक्ट्रिक सर्किट में भी दिखाई दे सकती हैं.

वैज्ञानिकों ने क्या की है खोज?

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने जानकारी दी है कि इन तीनों वैज्ञानिकों ने क्वाटंम फिजिक्स के प्रयोगों के लिए एक ऐसा सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रिक सर्किट तैयार किया है, जिसे हाथ में पकड़ा जा सकता है. आमतौर पर यह माना जाता था कि यह प्रयोग माइक्रो मीटर के सर्किट में ही संभव थे. इन्होंने जो इलेक्ट्रिक सर्किट तैयार किया है, उसमें वही क्वांटम प्रभाव देखने को मिलता जो अब तक सिर्फ परमाणु और इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कणों में दिखाई देते थे. इस सर्किट में अरबों ‘कूपर पेयर्स’ नामक इलेक्ट्रॉनों के जोड़े मौजूद थे. वैज्ञानिकों की यह खोज क्वांटम फिजिक्स के मैकेनिक्स को सूक्ष्म जगत से आगे बड़े सिस्टमों में लेकर जाती है.

प्रयोग से क्या होगा फायदा?

क्वांटम फिजिक्स की यह खोज इलेक्ट्रॉन के माइक्रोमीटर से निकलकर सेंटीमीटर के इलेक्ट्रिक सर्किट तक पहुंच गई है. यह एक ऐतिहासिक प्रयोग है, जिसे आधुनिक क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसर और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों की आधार रखी जा सकेगी. इस आविष्कार से सुपर फास्ट कंप्यूटर की तकनीक आम लोगों तक पहुंच सकेगी, यह सिर्फ फिजिक्स लैब तक सीमित नहीं होगी.

कौन हैं आविष्कार करने वाले वैज्ञानिक

Scientists
जॉन क्लार्क, मिशेल एच डेवोरेट और जॉन एम मार्टिनिस

जॉन क्लार्क (John Clarke): जॉन क्लार्क ब्रिटिश मूल के वैज्ञानिक है. वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं. इन्हें अति संवदेनशील चुंबकीय उपकरण का सह आविष्कारक माना जाता है. जबकि मिशेल एच डेवोरेट (Michel H. Devoret) फ्रांसीसी मूल के वैज्ञानिक हैं और येल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं. मिशेल एच डेवोरेट क्वांटम इंजीनियरिंग के शीर्ष शोधकर्ता हैं. तीसरे वैज्ञानिक जॉन एम मार्टिनिस (John M. Martinis) अमेरिकी मूल के वैज्ञानिक हैं. इन्होंने भी क्वांटम फिजिक्स के क्षेत्र में बड़े काम किए हैन. इन्होंने गूगल के क्वांटम कंप्यूटर प्रोजेक्ट का नेतृत्व भी किया है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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