New Labour Codes: अब 1 साल की नौकरी पर ही मिलेगा ग्रेच्युटी का फायदा, न्यूनतम वेतन सबके लिए

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

श्रम सुधार कानून लागू

New Labour Codes: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी ध्यान दें, अब किसी भी हाल में महीने की 7 तारीख को आपकी सैलरी आपके एकाउंट क्रेडिट होगी. अब आप लगातार एक साल काम करके ही ग्रेच्युटी के हकदार हो जाएंगे. इतना ही नहीं अब महिलाएं भी रात की शिफ्ट कर सकेंगी और उन्हें वेतन भी पुरुषों के बराबर मिलेगा, यानी जेंडर आधारित कोई भेदभाव कार्यक्षेत्र में अब नहीं होगा. सरकार ने चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जिसके जरिए प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों का जीवन सम्मानित और सुनियोजित हो जाएगा.

विज्ञापन

New Labour Codes: अंतत: नरेंद्र मोदी सरकार ने इच्छाशक्ति दिखाई है और पिछले 5-6 साल से फंसे हुए श्रम सुधार कानून को लागू करने के लिए 21 नवंबर को अधिसूचना यानी नोटिफिकेशन जारी कर दिया. नरेंद्र मोदी सरकार ने लेबर कानून को सरल और ज्यादा व्यावहारिक बनाने के लिए संसद से 2019 और 2020 में ही नए लेबर कोड को पारित करवा लिया था, लेकिन इसे लागू करने में थोड़ा संकोच कर रही थी, लेकिन शुक्रवार को सरकार ने इस कोड को लागू करने का आदेश जारी कर दिया. इस कोड के लागू होने से ना सिर्फ प्राइवेट सेक्टर के स्थायी, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी लाभ होगा.

क्या है नया लेबर कोड?

केंद्र द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लिए लेबल सुधारों को आगे बढ़ाया है. लेबर कानून में सुधार के लिए सरकार ने चार नए कोड लागू किए हैं, जो देश में पहले से मौजूद 29 लेबर कानूनों की जगह लेंगे. दरअसल सरकार ने सभी 29 कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड बनाए हैं, जिनमें इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि कानून कर्मचारियों के लिए लाभ देने वाले हों, ताकि कार्यक्षेत्र में उनका शोषण ना हो, उन्हें सम्मानित वेतन मिले साथ ही उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी प्राप्त हो. देश में लागू हुए चार लेबर कोड इस प्रकार हैं-

  • वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019)
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020)
  • औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020)
  • ओएसएच और कार्य शर्तें संहिता, 2020 (OSH & Working Conditions Code, 2020)

वेतन संहिता, 2019, कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने और समय पर वेतन देने की व्यवस्था करवाएगी. जबकि सामाजिक सुरक्षा संहिता कर्मचारियों को पीएफ, ESIC, ग्रेच्युटी और बीमा का लाभ दिलाएगी. औद्योगिक संबंध संहिता में कर्मचारियों की नियुक्ति उनकी छंटनी, सहित अन्य नियमों पर बात की गई है, चौथे कोड में काम की सुरक्षा और वर्किंग कंडीशन को बेहतर बनाने पर बात की गई है. कर्मचारी जहां अपने अधिकारों को आसानी से समझ पाएंगे वहीं कंपनी को

झारखंड हाईकोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता निपुण बक्शी, जिन्हें लेबर और कमर्शियल कानूनों में विशेषज्ञता हासिल है, उन्होंने बताया कि नए लेबर कोड के जरिए सरकार ने कानूनों का सरलीकरण किया है. पहले देश में 29 लेबर कानून थे, जिन्हें अब चार लेबर कोड में समाहित किया गया है. इसका फायदा कर्मचारियों को तो होगा ही कंपनियों को भी होगा. उन्हें अब कंप्लायंस में दिक्कत नहीं होगी. रिटर्न फाइल करना हो या कोई और काम करना हो उन्हें आसानी होगी. छोटी कंपनियों को बंदी और छंटनी के लिए अतिरिक्त छूट दी गई है. वहीं कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, एक साल में ग्रेच्युटी की सुविधा सहित कई अन्य सुविधाएं भी दी गई हैं. अब गिग वर्कर यानी स्विगी-जॉमैटो डिलीवरी बॉय को इन कानूनों के दायरे में लाया गया है, अब उन्हें पीएफ, ESIC और सोशल सिक्योरिटी की सुविधा भी मिलेगी. महिलाओं के लिए भी यह कानून बहुत खास है. अब महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन मिलेगा और उन्हें सहमति के साथ रात की शिफ्ट करने की भी आजादी मिल गई है.

कर्मचारियों के लिए क्या हुआ है बड़ा बदलाव, जिसका मिलेगा फायदा?

New-labour-codes-for-gig-workers
गिग वर्कर्स को भी मिलेेगा पीए और ईएसआईसी का फायदा

सरकार यह चाहती थी कि निजी क्षेत्रों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को एक सम्मानित जीवन, कार्यक्षेत्र और वेतन मिले. इसी वजह से सरकार लेबर कोड लेकर आई है. इस कोड के आ जाने से जो बड़े बदलाव दिखेंगे वो इस प्रकार हैं-

  • देश के हर कर्मचारी को मिलेगा न्यूनतम वेतन
  • मासिक वेतन महीने की 7 तारीख तक देना अनिवार्य
  • साप्ताहिक वेतन, सप्ताह के आखिरी कार्यदिवस पर देना अनिवार्य
  • ग्रेच्युटी का लाभ अब एक साल की नौकरी पर ही मिलेगा
  • अब गिग वर्कर, स्विगी-जॉमैटो डिलीवरी बॉय, टैक्सी ड्राइवर, फ्रीलांसर, ऐप-बेस्ड वर्कर को भी मिलेगा PF, ESIC और सोशल सिक्योरिटी
  • महिला कर्मचारी अब हर क्षेत्र में कर सकेंगी काम, वेतन में मिलेगा समान
  • सहमति के साथ महिला कर्मचारी रात की शिफ्ट में भी कर सकेंगी काम
  • कर्मचारियों को सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप की सुविधा मिलेगी
  • 40 साल से अधिक आयु के कर्मचारियों को साल में एक बार स्वास्थ्य परीक्षण मुफ्त कराने की सुविधा मिलेगी
  • ओवरटाइम का डबल पेमेंट किया जाएगा (सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने पर मिलेगा लाभ)
  • वेतन-संरचना पुनर्गठन होगा, जिससे बेसिक + भत्ते आदि का अनुपात बदल सकता है
  • जो जोखिम भरे काम करते हैं उन्हें 100 प्रतिशत हेल्थ सिक्युरिटी

कंपनी को क्या होगा फायदा?

नए लेबर कोड से सिर्फ कर्मचारियों को ही नहीं, कंपनियों को भी बहुत फायदा होगा. लेबर कानून को सरकार ने सरल बना दिया है, पहले 29 लेबर कानून थे, जिसकी वजह से कंपनियों को कंप्लायंस यानी नियमों के पालन में दिक्कत होती थी, लेकिन अब आसानी होगी. साथ ही इस कोड में सरकार ने छोटी कंपनियों के लिए बंदी और छंटनी के नियमों को उनके अनुकूल बनाया है. अब 300 कर्मचारी तक की कंपनियों को बंदी और छंटनी की स्थिति में सरकार से अनुमति नहीं लेनी होगी,पहले यह कानून 100 कर्मचारियों तक की कंपनियों पर लागू हो जाता था. कुल मिलाकर, यह कहा जाता सकता है कि नया कानून कंपनियों को, कर्मचारियों को काम पर रखने और निकालने की ज्यादा आजादी देता है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

ग्रेच्युटी के लिए नए नियम क्या हैं?

नए लेबर कोड के अनुसार अब कोई कर्मचारी एक साल तक लगातार काम करके ही ग्रेच्युटी का हकदार हो जाएगा. पहले यह सुविधा 5 साल तक काम करने पर मिलती थी.

क्या अब गिग वर्कर्स को भी मिलेगी पीएफ की सुविधा?

हां, अब गिग वर्कर्स यानी स्वीगी- जोमेटो वालो को भी पीएफ, ESIC और सोशल सिक्योरिटी की सुविधा प्राप्त होगी.

क्या महिलाओं को रात की शिफ्ट करने की आजादी मिल गई है?

हां, अब महिलाएं ना सिर्फ रात की शिफ्ट कर पाएंगी, बल्कि वे खतरनाक माने जाने वाले क्षेत्रों में भी अपनी सहमति से काम कर पाएंगी.

ये भी पढ़ें : क्या है नीतीश मॉडल, जिसने कल्याणबीघा के ‘मुन्ना’ को बिहार में बनाया जनता का ऑल टाइम फेवरेट?

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola