Mughal Empire : दुष्ट चंगेज खां और तैमूर के वंशज थे मुगल, आश्रय की तलाश में भारत आया था बाबर

मुगल भारत क्यों आए. एआई इमेज
Mughal Empire : भारत पर कई मुस्लिम शासकों ने हमला किया और यहां से सोना, संपत्ति और महिलाओं को लूटकर ले गए. 712 ई में इराक के मुहम्मद बिन कासिम ने भारत पर हमला करके सिंध को जीत लिया था, वह पहला मुस्लिम हमलावर था. उसके बाद कई आततायी आए और भारत को लूटकर चले गए, जिनमें चंगेज खां और तैमूर लंग का भी नाम आता था, लेकिन 1526 में इनके ही वंशज बाबर ने जब भारत पर आक्रमण किया तो उसका लक्ष्य भारत को लूटना नहीं, बल्कि अपने लिए यहां आश्रय तलाशना था.
Mughal Empire : भारत में मुगलों का साम्राज्य लगभग 331 साल तक चला, हालांकि इसके उत्कर्ष का काल इतना लंबा नहीं है. मुगलों का स्वर्ण युग बादशाह अकबर से शुरू हुआ और उसके परपोते औरंगजेब के साथ ही मुगलों का स्वर्ण युग समाप्त हो गया. भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने की थी वह साल था 1526 और 1857 में मुगल साम्राज्य का पूरी तरह पतन हो गया. उसके बाद देश पर पूरी तरह अंग्रेजों का शासन हो गया.
मुगल साम्राज्य और उसके बादशाहों का भारतीय और विश्व इतिहास में अहम योगदान है. मुगलों ने ना सिर्फ भारत में अपने लिए एक आश्रय ढूंढ़ा बल्कि एक ऐसी सभ्यता भी विकसित की जिसके अवशेष आज भी भारत की शान हैं. मुगलों ने इंडो–इस्लामिक संस्कृति को विकसित किया और मानव इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी.
कौन थे मुगल?

मुगल तुर्की–मंगोल थे. बाबर तुर्की शासक तैमूरलंग का वंशज था, जबकि उसकी मां चंगेज खां के कुल की थी. चंगेज खान खान मंगोल शासक था और उसकी इच्छा विश्व विजय की थी. तैमूरलंग भी तुर्की और मंगोल ही था और उसके अंदर भी विश्व विजय की कामना भरी हुई थी. तैमूर लंग और चंगेज खान दोनों ही अत्याचारी, दुष्ट और कातिल शासक थे. निश्चित तौर पर मुगलोंं को भी ये तमाम चीजें अपने पूर्वजों से खून में मिली थी. बाबर की इच्छा भी अपने साम्राज्य को अधिक से अधिक विस्तार देने की थी और वह निष्ठुर और अत्याचारी भी था. फारसी में मुग मंगोलों को कहा जाता है, वहीं से मुगलों के लिए यह शब्द प्रचलन में आया है.
पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी : Mughal Harem Stories : मुगल हरम की औरतों ने मौत की परवाह किए बिना रात के अंधेरे में प्रेम को दिया अंजाम
भारत में मुगलों के साम्राज्य की नींव बाबर ने रखी
बाबर के पिता उमर शेख मिर्जा फरगना के शासक थे, उनके बाद बाबर बहुत कम उम्र में ही फरगना का शासक बना, लेकिन जल्दी ही उसके चाचा और अन्य रिश्तेदारों ने उससे सत्ता छीन ली. वह अपने ही राज्य में बेदखल कर दिया गया. उसने 1501 में कोशिश करके समरकंद पर फिर से कब्जा किया, लेकिन जल्दी ही उसे मुहम्मद शैबानी ने हरा दिया, जिसके बाद वह फटेहाल था और एक ऐसे स्थान की खोज में था जहां उसे आश्रय मिलता और संघर्ष भी नहीं करना पड़ता. इसी तलाश में उसने अपने कुछ विश्वासपात्र के साथ हिंदूकुश पर्वत को पार किया और कंधार में अपनी जड़ें जमाई. उसने कंधार को जीत लिया था और उसकी विश्वविजय की कामना एक बार फिर बलवती हो गई थी और इसी चाह में चंगेज और तैमूर के वंशज बाबर ने भारत पर आक्रमण शुरू किया और उसे कुछ सफलता भी मिली.
इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान ने बाबर से मांगी मदद
जिस वक्त बाबर भारत की सीमा पर आ गया था और कुछ दिल्ली सल्तनत के कुछ हिस्सों को जीत चुका था, उस वक्त दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इब्राहिम लोदी के चाचा और उनके विरोधी आलम खान ने बाबर को भारत आने का न्यौता दिया. बाबर ने उनके निमंत्रण पर दिल्ली सल्तनत को चुनौती दी और पानीपत के युद्ध में उसने 1526 में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य की नींव डाली थी. इस युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को तोपों के इस्तेमाल से शिकस्त दी और इब्राहिम लोदी की मौत भी इसी युद्ध में हो गई थी. पानीपत का युद्ध काफी अहम था क्योंकि इस रास्ते से ही किसी विदेशी को उत्तर भारत में एंट्री मिलती थी.
तैमूर की तरह भारत को लूटकर वापस क्यों नहीं गया बाबर

तैमूर खुद को विश्व विजेता बनाना चाहता था, लेकिन उसका उद्देश्य भारत को जीतना था ना कि यहां शासन करना. बाबर की स्थिति दूसरी थी उसे अपने लिए पनाह चाहिए थी, जहां वह शांति से रहता. बाबर की तलाश पानीपत के युद्ध के बाद समाप्त हुई और उसने भारत में मुगलों का शासन स्थापित किया. उस वक्त मुगलों के शासन को तैमूरी साम्राज्य कहा जाता था. आइने अकबरी में इसे हिंदोस्तां कहा गया है.
बाबर को पसंद नहीं था भारत, मजबूरी में साम्राज्य स्थापित किया
बाबर ने अपनी आत्मकथा में भारत का जिक्र करते हुए कई बार अफसोस भी जताया है. उसने लिखा है कि यहां मांस नहीं मिलता और ना ही अंगूर और खरबूज मिलता है. उसने यह भी लिखा था कि यहां के लोगों में सुंदरता नहीं है और ना ही काव्य की समझ. हालांकि उसे यहां के आम बहुत पसंद थे. बाबर ने भारत में एक तरह से शरण ली थी, उसका पूरा जीवन मध्य एशिया में संघर्ष के बीच बीता था. भारत में बाबर ने महज चार साल ही शासन किया, लेकिन उसने एक ऐसे साम्राज्य की स्थापना कर दी, जिसका जिक्र विश्व के इतिहास में गौर से लिया जाता है. मुगलों ने एक बेहतरीन सभ्यता की नींव डाली जिसकी वजह से भारतीय सभ्यता इतनी बहुरंगी बन सकी.
पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी :Child Mental Health : बच्चे हो रहे हैं दबंग, रेप और आत्महत्या करने में भी नहीं करते संकोच, जानिए क्या है वजह
विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










