Magadha Empire : बिम्बिसार ने अपनी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था से मगध को किया सशक्त, ऐसे हुआ पतन

Edited by Rajneesh Anand
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बिम्बिसार

Magadha Empire 2 : प्राचीन भारतीय इतिहास में बिम्बिसार एक ऐसा राजा था जिसने अपने कुशल प्रशासन से मगध को एक आर्थिक रूप से सशक्त और सुदृढ़ साम्राज्य के रूप में विकसित किया. उसने केंद्रीयकृत सत्ता की स्थापना की जिसमें संपूर्ण सत्ता राजा के हाथों में केंद्रित थी. इतिहासकारों ने इसे प्राचीन राजतंत्र का आदर्श उदाहरण बताया है. लेकिन इस राजा का अंत चौंकाने वाली घटना के साथ हुआ.

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Magadha Empire 2 : मगध के राजा बिम्बिसार ने महज 15 साल की उम्र में सत्ता संभाल ली थी. यही वजह है कि उन्हें एक लंबा शासनकाल मिला. राजा बिम्बिसार ने 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक शासन किया. अपने शासन के इन 52 वर्षों में बिम्बिसार ने कुशल प्रशासन, सैन्य शक्ति और कूटनीति के माध्यम से मगध को एक शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में स्थापित कर दिया. भारत के कई इतिहासकारों ने बिम्बिसार को एक कुशल प्रशासक के रूप में चिह्नित किया है.

बिम्बिसार ने एक मजबूत केंद्रीय सत्ता स्थापित की

प्रसिद्धकार आरएस शर्मा ने अपनी पुस्तक प्राचीन भारत (Ancient India) और Material Culture and Social Formations in Ancient India में लिखा कि बिम्बिसार ने राजनीतिक विवाह नीति को अपनाकर अपने राज्य का विस्तार किया. उन्होंने कोसल, लिच्छवि और मद्र की राजकुमारियों से विवाह किया. साथ ही एक मजबूत प्रशासनिक केंद्र स्थापित किया. बिम्बिसार ने वर्तमान राजगीर को अपनी राजधानी बनाया था, जिसे उस वक्त राजगृह कहा जाता था. इसका कारण यह था कि वे एक सुरक्षित राजधानी बनाना चाहते थे. राजगृह चारों ओर पहाड़ियों से घिरा था.

मार्क्सवादी इतिहासकार डीडी कोसांबी भी यह मानते हैं कि बिम्बिसार ने देश में पहली बार एक केंद्रीकृत राज्य की नींव रखी, जहां कृषि उत्पादन, व्यापार और सैन्य शक्ति का अद्‌भुत तरीके से विकास हुआ.साथ ही मगध में लोहे के हथियारों का खूब निर्माण हुआ, जैन साहित्य के मुताबिक मगध का प्रभाव झारखंड के इलाकों में भी दिखता था, जिसकी वजह से लोहे का प्रयोग यहां बढ़ा. लोहे के हथियारों और हाथियों की वजह से मगध साम्राज्य की सेना बहुत सशक्त हुई. 

मगध साम्राज्य की सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था

raja bimbisara
बिम्बिसार-का-दरबार

बिम्बिसार ने मगध में सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था कायम की, जिसमें सर्वप्रमुख था केंद्रीकृत शासन. केंद्रीकृत शासन में पूरी व्यवस्था राजा के हाथों में केंद्रित थी. वह सैन्य प्रमुख के साथ ही मुख्य न्यायाधीश भी था. इसके अलावा बिम्बिसार ने कर प्रणाली की मजबूत व्यवस्था कायम की. जिसके तहत व्यापार, कृषि और पशुपालन पर कर लगाया जाता था. कर प्रणाली विकसित होने की वजह से मगध की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हुई. बिम्बिसार ने गंगा नदी को प्रमुख व्यापारिक मार्ग में विकसित किया और सड़क मार्गों का भी विकास किया. बिम्बिसार के शासन की एक और विशेषता थी कि वह एक धर्म परायण राजा था. इतिहासकार रोमिला थापर ने अपनी पुस्तक Early India: From the Origins to AD 1300 में लिखा है कि बिंबिसार का शासन प्रारंभिक राजतंत्र का  आदर्श उदाहरण था. बिम्बिसार का पतन तब हुआ जब उसके अपने ही बेटे अजातशत्रु ने 492 ईसा पूर्व में उसे कैदकर उसकी हत्या कर दी.

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राजा बिम्बिसार का शासन काल क्या था?

राजा बिम्बिसार ने 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक शासन किया

राजा बिम्बिसार का पतन कैसे हुआ?

राजा बिम्बिसार की हत्या 492 ईसा पूर्व में उनके बेटे ने कर दी थी .

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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