भारत को इग्नोर करना अमेरिका के लिए मुश्किल, ट्रेड डील की गरमाहट से घट सकता है ट्रंप टैरिफ का रेट

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति
India US Trade Deal : भारत और अमेरिका के रिश्तों में आई तल्खी 10 सितंबर से थोड़ी कम हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों की दुहाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी को अपना खास मित्र और भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों को मजबूत बताया. जवाब में पीएम मोदी ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. अब वहां के नामित राजदूत सर्जिया गोर ने ट्रेड डील को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल को भारत आने न्यौता भी दिया है. इसे दोनों देशों के रिश्तों में नई गरमाहट और ट्रेड डील को लेकर एक नई शुरुआत माना जा सकता है.
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India US Trade Deal : ट्रंप टैरिफ के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में जो खटास आई और जो डैमेज कंट्रोल हुआ है, उन सबके बाद अब अगले सप्ताह दोनों देशों के प्रतिनिधि वांशिगटन में मिल सकते हैं. ट्रंप के करीबी और भारत में अमेरिका के नामित राजदूत सर्जिया गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच जो विवाद हैं, वो जल्दी ही सुलझ जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत खास हैं और इन्हें बिगड़ने नहीं दिया जाएगा.
डील में अमेरिका की प्राथमिकताएं और सीमाएं
अमेरिका यह चाहता है कि भारत अपने बाजारों को उसके उत्पाद के लिए खोल दें. खासकर उसकी चाहत कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर है. इसके अलावा वह यह चाहता है कि भारत डिजिटल बिजनेस और डेटा फ्लो के नियमों में बदलाव लाकर उसे अमेरिका के लिए उपयुक्त बनाए. हालांकि भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलने का जरा भी पक्षधर नहीं है. वहीं अमेरिका पर दबाव यह है कि अमेरिका के राज नेता और आम आदमी भी यह चाहते हैं कि भारत के साथ बिजनेस जारी रहे, उसे भारी टैरिफ की वजह से नुकसान ना हो. रक्षा और तकनीकी सहयोग के कारण अमेरिका भारत के साथ रिश्तों को खराब नहीं करना चाहता है. अब देखना यह होगा कि जब अगले हफ्ते दोनों देशों के प्रतिनिधि मिलते हैं, तो वे किस हद तक जाकर रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश करते हैं.
क्या चाहता है भारत
ट्रंप टैरिफ से भारत के निर्यात पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है. यही वजह है कि भारत किसी भी तरह के डील से पहले यह चाहता है कि अमेरिका अपने उच्च टैरिफ में कटौती करे, अन्यथा बातचीत का कोई फायदा नहीं होगा. साथ ही भारत अमेरिका से अन्य छूट भी चाहता है. जिसमें आईटी कंपनियों के लिए सुविधा और वीजा नियम में छूट भी शामिल है. साथ ही भारत रूस से तेल खरीदना भी बंद नहीं करेगा, क्योंकि भारत के लिए यह बहुत ही जरूरी कदम है. ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के लिए भारत यह कतई नहीं करेगा.
अभी किसी ठोस कदम की संभावना सीमित
भारत और अमेरिका के बीच जिस तरह की तनातनी पिछले दिनों देखने को मिली है, उसमें यह उम्मीद लगाना कि दोनों देश अप्रत्याशित रूप से अभी साथ आ जाएंगे और सबकुछ सामान्य हो जाएगा इसकी उम्मीद काफी कम है. ट्रंप टैरिफ को अगर दरकिनार करके भी देखें, तो ट्रेड डील के रास्ते में कई तरह की बाधाएं हैं. हां , यह जरूर है कि नवंबर में ट्रेड डील को लेकर जो निर्णायक बैठक होनी है, उससे पहले अगर भारत का प्रतिनिधिमंडल अगर अमेरिका जाएगा, तो कुछ सकारात्मक होगा. एससीओ समिट के दौरान जिस तरह दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ीं ट्रंप ने भारत को खो देने तक की बात कही, उसमें कुछ बदलाव संभव है.
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लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.
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