Imran Khan : कहां हैं इमरान खान, आखिर क्यों उड़ रही मौत की अफवाह? कोर्ट के आदेश की भी उड़ रही धज्जियां
इमरान खान
Imran Khan : पाकिस्तान में उसके निर्माण काल से ही तख्तापलट का इतिहास रहा है, चुनी हुई सरकारें बेदखल होती रही हैं और प्रधानमंत्रियों को जेल भी जाना पड़ा है. जुल्फिकार अली भुट्टो जैसे प्रधानमंत्री को तो तख्तापलट के बाद फांसी की सजा तक भुगतनी पड़ी. अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं और उनकी मौत की अफवाह फैल रही है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पाकिस्तान का एक और प्रधानमंत्री वहां की सैन्य ताकत का शिकार हो गया है?
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Imran Khan : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और एक जमाने के बेहतरीन पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान अभी कहां हैं? क्या वे रावलपिंडी जेल में ही हैं या उनकी हत्या हो गई है? ये कुछ सवाल हैं, जो कल से पाकिस्तान में पूछे जा रहे हैं. दरअसल पिछले तीन हफ्तों से इमरान खान की कोई जानकारी जेल प्रशासन ना तो दे रहा है और ना ही इमरान खान से उनके परिजनों, वकील और पार्टी के किसी भी सदस्य को मिलने की इजाजत दे रहा है. इस स्थिति में कयासों का बाजार गर्म है और इमरान खान की सुरक्षा को लेकर उनके अपने चिंतित हैं.
कहां है इमरान खान?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान फिलहाल अदियाला जेल, रावलपिंडी में कैद हैं. उनकी गिरफ्तारी 9 मई 2023 को हुई थी. उनपर भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हैं. आरोप है कि उन्होंने सरकारी उपहारों की बिक्री की. साथ ही उनपर गलत तरीके से भूमि की बिक्री का भी आरोप है, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ. सजा की अगर बात करें, तो किसी केस में उन्हें 14 साल, तो किसी में 3 साल की सजा मुकर्रर की गई है. कुछ और केस भी हैं, जिनपर सुनवाई के बाद उन्हें सजा दी गई है.
हत्या की आशंका क्यों हुई?

इमरान खान को 2023 में जब कोर्ट ने सजा सुनाई तो एक खास निर्देश भी साथ में दिया था कि हर महीने उन्हें कम से कम दो से तीन बार उन्हें उनके परिजनों, वकीलों और करीबियों से मिलने दिया जाए. अक्टूबर 2025 तक इस प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आई, लेकिन नवंबर के पहले सप्ताह में जब इमरान खान के वकील उनसे मिलने गए, तो उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली. उसके बाद भी इमरान के कई करीबियों ने उनसे मिलने की इजाजत मांगी,लेकिन उन्हें इजाजत नहीं मिली. बुधवार 26 नवंबर को मामला तब और गंभीर हो गया, जब इमरान की तीन बहनों ने उनसे मिलने की इजाजत मांगी, लेकिन उन्हें टाल दिया गया. उनकी बहनों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उन्हें बाल पकड़कर घसीटा गया और थप्पड़ जड़ने की बात भी कही गई है. इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह बताया गया कि इमरान खान की हत्या हो चुकी है और उनका पार्थिव शरीर वहां से कहीं ले जाया गया है. पोस्ट के वायरल होने के बाद इमरान खान की पार्टी के समर्थक वहां जमा होने लगे और प्रदर्शन तेज हुआ. इमरान खान की सलामती की जानकारी मांगी जाने लगी. हालांकि जेल प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर रहा है और कह रहा है कि इमरान खान सुरक्षित हैं और उनकी देखभाल की जा रही है.
पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ दुर्व्यवहार का पाकिस्तान में रहा है इतिहास?
पाकिस्तान में सेना के हस्तक्षेप की वजह से कई प्रधानमंत्रियों का तख्तापलट हो चुका है और उन्हें जेल में भी रहना पड़ा है. इनमें जुल्फिकार अली भुट्टो, बेनजरी भुट्टो, नवाज शरीफ और शाहिद खाकान अब्बासी जैसे प्रधानमंत्रियों को तख्तापलट की वजह से जेल जाना पड़ा.जुल्फिकार अली भुट्टो को तो रावलपिंडी जेल में ही रखा गया था और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई. भुट्टो का तख्ता पलट जनरल जिया उल हक ने किया था. हुसैन सुहरावर्दी जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे उनकी भी गिरफ्तारी सेना के आदेश पर हुई थी.
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क्या भुट्टो की तरह इमरान खान को भी मिल सकती है मौत?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की गिरफ्तारी तख्ता पलट के बाद हुई थी और उनपर कई मुकदमे चलाए गए थे. जुल्फिकार अली भुट्टो को भी रावलपिंडी जेल में ही रखा गया था और इमरान खान भी रावलपिंडी जेल में ही हैं. फर्क यह है कि भुट्टो जिस जेल में थे उसे गिरा दिया गया है और अभी इमरान खान जिस जेल में हैं,उसका निर्माण बाद में हुआ है. चूंकि दोनों ही रावलपिंडी में जेल में बंद रहे और उनपर कई मुकदमे चलाएं गए थे, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि इमरान खान की हत्या हो सकती है. भुट्टो को 1978 में फांसी दी गई थी. पाकिस्तान ने हाल ही में 27वां संविधान संशोधन विधेयक पारित किया है जिसके जरिए सेना को शासन में और अधिक शक्ति दे दी गई है. इस लिहाज से भी यह माना जा रहा है कि सेना प्रशासन में अपनी दखल रखती है. चूंकि इमरान खान और सेना के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे थे और 2021-22 के दौरान उन्होंने सेना के मामलों में दखल देकर उन्हें अपना एक तरह से दुश्मन बना लिया था, इसलिए भी कयास लगाए जा रहे हैं कि इमरान के साथ कुछ बुरा हो सकता है?
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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