एच1बी वीजा फीस वृद्धि का अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर क्या होगा प्रभाव, क्या L-1 वीजा बन सकता है विकल्प?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 21 Sep 2025 6:05 PM
एच1बी वीजा
H-1B Visa Fee Hike : एच1बी वीजा के लिए फीस वृद्धि की घोषणा के बाद से भारतीय आईटी कंपनियों और उसके कर्मचारियों में दुविधा की स्थिति बन गई है. वे भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उनकी योजनाएं बेकार साबित हो सकती हैं. ऐसे में अमेरिका का यह कहना कि यह फीस वृद्धि सिर्फ नए वीजा आवेदनों पर लागू होगी, कुछ राहत देने वाली तो है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारती कंपनियों पर इसका गंभीर असर दिखेगा. अब विकल्प के रूप में L-1 वीजा पर चर्चा हो रही है.
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H-1B Visa Fee Hike : अमेरिका ने अपनी नीतियों में परिवर्तन करते हुए एच1बी वीजा के आवेदन के लिए फीस में बढ़ोतरी करते हुए इसे 1,00,000 डॉलर कर दिया है. अमेरिका द्वारा किए गए इस नीतिगत बदलाव का भारत पर व्यापक प्रभाव पड़ने वाला है, क्योंकि भारत के सेवा क्षेत्र के हजारों लोग प्रति वर्ष एच1बी वीजा के लिए आवेदन करते हैं. एच1बी वीजा पर जो लोग अभी अमेरिका में रह रहे हैं, वे भी परेशान हो गए हैं, क्योंकि भविष्य को लेकर उनमें शंकाएं हैं. वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे क्या करें? क्या उन्हें तुरंत वापस होना पड़ सकता है या अभी उनपर इस फीस वृद्धि का असर नहीं होगा. हालांकि अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वीजा के लिए जो फीस बढ़ोतरी की गई है, वो सिर्फ नए आवेदनों पर लागू है.
H-1B Visa पर अमेरिका में रह रहे लोगों पर क्या होगा असर
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोशल मीडिया पर यह स्पष्ट किया है कि H-1B Visa फीस बढ़ोतरी का प्रभाव सिर्फ नए आवेदन पर पड़ेगा. इसका यह स्पष्ट अर्थ है कि जो लोग अभी H-1B Visa पर अमेरिका में रह रहे हैं, उनपर इस फीस वृद्धि का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. वैसे लोग जो एच1बी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं, लेकिन अभी अमेरिका से बाहर हैं, उन्हें भी घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि फीस वृद्धि की नई दर का उनपर कोई प्रभाव नहीं होगा. कैरोलिन लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह शुल्क अगले वीजा लॉटरी चक्र में लागू होगा, तत्काल नहीं. इसका अर्थ यह है कि वीजा फीस की नई दर मार्च 2026 से लागू होगी.
H1B वीजा का विकल्प बन सकता है L-1 वीजा
अमेरिकी प्रशासन अपने देश में आने वाले विदेशियों के लिए कई तरह का वीजा देता है. ऐसे वीजा में H-1B, L-1, F-1, B-1/B-2, O-1, J-1 जैसे प्रमुख हैं. F-1 वीजा स्टूडेंट्स के लिए हैं, जबकि H-1B, L-1 वीजा वैसे लोगों के लिए है,जिन्हें वहां काम के लिए वीजा दिया जाता है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या L-1 वीजा H-1B का विकल्प बन सकता है?
H1B वीजा और L-1 वीजा में क्या है अंतर
H1B वीजा अमेरिका उन विदेशी कामगारों (non-immigrant) को देता है, जो कुछ समय के लिए अमेरिका जाकर अपनी क्षमता और कौशल के अनुसार नौकरी करते हैं. इनमें वैसे लोग होते हैं जिनके पास विशेष कौशल होता है- जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, मेडिसिन और रिसर्च के क्षेत्र में कार्य करने का विशेष अनुभव. H1B वीजा पर अमेरिका जाने वाले लोग वहां बसने के लिए नहीं जाते हैं, बल्कि वे कुछ समय के लिए वहां अपना योगदान देते हैं. एच1बी वीचा की अवधि 3-6 साल तक की होती है.
| विशेषता | H1B वीजा | L-1 वीजा |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | अमेरिका में किसी भी कंपनी को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारी नियुक्त करने की अनुमति देता है | मल्टीनेशनल कंपनी की विदेशी शाखा से कर्मचारी को अमेरिकी शाखा भेजे जाने पर यह वीजा दिया जाता है |
| कौन प्रायोजक होता है | कोई भी अमेरिकी नियोक्ता (US Employer) | वही कंपनी जिसकी विदेशी शाखा और अमेरिकी शाखा/इकाई है |
| कोटा / कैप | वार्षिक सीमा: 85,000 (65,000 + 20,000 मास्टर्स कैप) | कंपनियों की जरूरत के अनुसार वीजा जारी होता है |
| वीजा प्रकार | एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ट्रांसफर संभव | सिर्फ एक ही कंपनी के भीतर ट्रांसफर संभव |
| अवधि | शुरू में 3 साल + 3 साल विस्तार (अधिकतम 6 साल) | L-1A (मैनेजर/एक्ज़ीक्यूटिव) – 7 साल तकL-1B (स्पेशल नॉलेज) – 5 साल तक |
| प्रमुख कमी | कोटा लिमिट, लॉटरी सिस्टम, वीजा फीस बढ़ोतरी का खतरा | केवल उसी कंपनी में काम संभव, छोटे स्तर के कर्मचारियों के लिए कठिनाई |
वहीं L-1 वीजा उन कर्मचारियों को दिया जाता है जो किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं और कंपनी उनकी पोस्टिंग किसी दूसरे देश मसलन भारत से अमेरिका करती है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह वीजा ज्यादातर उच्च पदों पर आसीन लोगों को जारी किया जाता है. साथ ही यह वीजा उन चुनिंदा लोगों को दिया जाता है, जिनके पास विशेष कौशल है. कहने का आशय यह है कि इस वीजा की सीमाएं हैं, इसमें वीजा उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनकी कंपनी की शाखा भारत में कार्यरत है और उनका अमेरिका में ट्रांसफर किया जाए.
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By Rajneesh Anand
राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.
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