अगर आपने भी की है पाकिस्तानी लड़की से शादी, तो हो जाएं सावधान...
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 04 May 2025 6:30 PM
सीआरपीएफ जवान मुनीर अहमद पाकिस्तानी पत्नी के साथ
CRPF Jawan Munir Ahmed : भारत सरकार द्वारा पाकिस्तानियों का वीजा कैंसिल किए जाने के बाद जो लोग अवैध तरीके से यहां रहे हैं, उनके परिजनों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. ऐसा ही एक केस जम्मू-कश्मीर से सामने आया है, जहां सीआरपीएफ के जवान मुनीर अहमद की पाकिस्तानी पत्नी वीजा खत्म होने के बाद भी यहां रह थी और सीआरपीएफ ने उसके पति को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है.सीआरपीएफ ने कहा है कि उसने अपनी शादी की बात विभाग से छुपाई और वीजा खत्म होने के बाद भी पत्नी को देश में शरण दी, जो एक गंभीर अपराध है.
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CRPF Jawan Munir Ahmed : सीआरपीएफ के एक जवान मुनीर अहमद को एक पाकिस्तानी लड़की से अपनी शादी को छिपाने और पत्नी का वीजा खत्म होने के बाद भी उसे भारत में रखने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. सीआरपीएफ द्वारा की गई कार्रवाई के बाद मुनीर अहमद बहुत परेशान हैं और यह कह रहे हैं कि उनके साथ गलत हुआ है और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्याय की गुहार लगाई है.
मुनीर अहमद और उसकी पाकिस्तानी पत्नी मेनल खान की क्या है कहानी
सीआरपीएफ के जवान मुनीर अहमद की शादी पिछले साल 24 मई 2024 को अपनी ममेरी बहन यानी मामा की बेटी मेनल खान से हुई थी. चूंकि मेनल खान पाकिस्तानी नागरिक है, इसलिए इनकी शादी उस वक्त जल्दी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई थी. मुनीर अहमद के पिता जो कैंसर के मरीज हैं, उनकी वजह से ही शादी जल्दी में कराई गई थी. शादी के लगभग नौ महीने बाद यानी फरवरी 2025 में भारत का वीजा मिलने पर मेनल खान भारत आ गई. उसके बाद उन्होंने लॉन्ग टर्म वीजा के लिए अप्लाई किया, लेकिन इसी बीच मुनीर अहमद का ट्रांसफर हो गया और पहलगाम में 26 लोगों की आतंकवादियों ने हत्या कर दी, जिसकी वजह से प्रशासन सख्त हो गया और सभी पाकिस्तानियों का वीजा कैंसिल कर उन्हें वापस भेजा जाने लगा. इसी क्रम में मुनीर अहमद की पत्नी की भी जांच हुई और यह पाया गया कि उसकी वीजा अवधि समाप्त हो गई है, बावजूद इसके वह भारत में ही है. इसके बाद ही मुनीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
मुनीर अहमद से क्या हुई गलती?
मुनीर अहमद ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी को वीजा समाप्त होने के बाद भी भारत में शरण दिए रखा, यह उसकी गलती है. इतना ही नहीं उसने वीजा की अवधि समाप्त हो जाने की सूचना ना तो अपने विभाग को दी और ना ही गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को इस संबंध में सूचना दी. इस वजह से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है. पाकिस्तानी पत्नी का वीजा समाप्त होने की सूचना उन्हें अविलंब अपने विभाग और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को देनी चाहिए थी.
मुनीर अहमद की बर्खास्तगी पर विभाग ने क्या कहा है
मुनीर अहमद की बर्खास्तगी पर सीआरपीएफ की ओर यह कहा गया कि उन्होंने अपनी शादी को छिपाकर रखा और और अपनी पाकिस्तानी पत्नी को गलत तरीके से देश में छिपाकर रखा, जिसकी वजह से उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है. यह सेवा नियमों का उल्लंघन है और इसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है. हालांकि न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुनीर अहमद ने यह कहा है कि उसने सभी नियमों का पालन करते हुए पाकिस्तान में शादी की है. मुनीर अहमद ने शादी से पहले और बाद में भी अपने विभाग को सूचना दी थी और विभाग की ओर से जो कुछ भी कहा गया, उसका पूरी तरह पालन किया गया था. बावजूद इसके उनके खिलाफ कार्रवाई हुई, जो गलत है. वे न्याय के लिए पीएम मोदी से अपील करते हैं.
पाकिस्तानी से शादी करने को लेकर क्या है नियम
भारत में किसी विदेशी से शादी को लेकर कोई मनाही नहीं है, लेकिन सेना के अधिकारी और पैरा मिलिट्री फोर्स के अधिकारी अगर किसी विदेशी या पाकिस्तानी लड़का या लड़की से शादी करते हैं, तो उन्हें पहले अपने विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है. विभाग से अनुमति मिलने के बाद ही कोई व्यक्ति शादी कर सकता है. शादी के बाद भी पूरी जानकारी विभाग को देनी होती है. उसके बाद वीजा लेकर ही किसी जवान या अधिकारी की पत्नी या पति भारत आ सकता है. अगर कोई पाकिस्तानी लड़की भारत में ब्याह कर आती है, तो उसे पहले शार्ट वीजा मिलता है, उसके बाद उसे नियमानुसार लॉन्ग टर्म वीजा के लिए आवेदन करना होता है. वीजा मिलने के बाद ही वह महिला भारत में रह सकती है. शादी के बाद भारत की नागरिकता लेने को लेकर जो नियम हैं, वो उसी तरह के हैं, जैसे किसी भी अन्य विदेशी को भारत की नागरिकता लेने के लिए लागू होते हैं. इसमें सबसे पहली शर्त यह है कि उसे लगातार 7 साल तक भारत में रहना होगा. उसके बाद ही वह नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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