Anant Singh Arrest : अनंत सिंह की गिरफ्तारी से बढ़ा मोकामा का सियासी पारा, अब ‘कास्टवार’ की गिरफ्त में होगा चुनाव

Edited by Rajneesh Anand
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दुलारचंद यादव और अनंत सिंह

Anant Singh Arrest : बिहार का मोकामा विधानसभा क्षेत्र, जो अपने बाहुबली विधायकों की वजह से हमेशा चर्चा में रहा है, एक बार फिर ‘कास्ट वार’ की राजनीति की वजह से चर्चा में है. मोकामा में 30 अक्टूबर को राजद कार्यकर्ता और जनसुराज पार्टी के पक्ष में प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की हत्या हो जाती है. आरोप अनंत सिंह पर लगाया जाता है. अनंत सिंह की गिरफ्तारी होती है और मोकामा का चुनाव एक बार फिर अगड़ों और पिछड़ों की लड़ाई में बदल जाता है. 21वीं शताब्दी के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी बिहार जातिवाद के चंगुल से बाहर नहीं आ पाया और यह ‘कास्ट वार’ अनगिनत लोगों की बलि ले चुका है.

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Anant Singh Arrest : बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में ठीक चुनाव से पहले राजद कार्यकर्ता दुलारचंद की हत्या के बाद जदयू प्रत्याशी और बाहुबली नेता अनंत सिंह गिरफ्तारी हो गई है. इस गिरफ्तारी ने एक ओर जहां मोकामा का सियासी पारा चढ़ा दिया है, वहीं इस बात की चर्चा भी खूब हो रही है कि क्या सचमुच अनंत सिंह ने दुलारचंद यादव की हत्या की है? इस हत्या की वजह क्या सिर्फ राजनीतिक है या कुछ और भी पेच इस हत्याकांड में है. अनंत सिंह का प्रोफाइल हमेशा से मोकामा विधानसभा क्षेत्र को हाॅट सीट की श्रेणी में ले आता है.

आखिर अनंत सिंह पर क्यों लगा है दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप?

दुलारचंद यादव मोकामा के स्थानीय नेता थे और उन्हें राजद का करीबी माना जाता था. पीयूष प्रियदर्शी इस कोशिश में थे कि उन्हें राजद का टिकट मिल जाए. दुलारचंद यादव भी इस कोशिश में थे और पीयूष के लिए पूरी बैटिंग भी कर रहे थे. पीयूष को टिकट मिलने की पूरी संभावना भी थी, लेकिन जैसे ही जदयू ने बाहुबली अनंत सिंह को टिकट दिया, राजद ने उसके तोड़ के लिए सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को मैदान में उतार दिया. राजद का टिकट ना मिलने के बावजूद दुलारचंद ने पीयूष प्रियदर्शी को जनुसराज का टिकट दिलाया और उसके पक्ष में प्रचार करने लगे. दुलारचंद और अनंत सिंह की दुश्मनी बहुत पुरानी है. प्रभात खबर के साथ बातचीत में दुलारचंद की रिश्तेदार (बहू) ने बताया कि अनंत सिंह के साथ पुरानी दुश्मनी थी.

अनंत सिंह ने उनके परिवार के दो लोगों की पहले भी हत्या करवाई है. वो सीधे अनंत सिंह पर ही आरोप लगाती हैं कि उसने पहले पैर में गोली मारी और उसके बाद गाड़ी चढ़ा दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. दुलारचंद यादव ने हत्या से कुछ दिन पहले भी अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की थी और उसे नाचने वाली बताया था. साथ ही उनकी शादी को लेकर भी अमर्यादित टिप्पणी की थी, जिसकी वजह से भी अनंत सिंह और उनके बीच दुश्मनी थी.

दुलारचंद यादव के पोते ने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसके अनुसार दोपहर के वक्त चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह और दुलारचंद यादव आमने-सामने हो गए. दुलारचंद यादव पीयूष प्रियदर्शी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे. सिंगल सड़क होने की वजह से दोनों पक्ष के बीच विवाद हुआ और फिर अनंत सिंह के लोगों ने दुलारचंद यादव को गाड़ी से उतारा, उसके बाद अनंत सिंह ने उनपर गोली चलाई और फिर गाड़ी चढ़ाकर उन्हें मार दिया. जन सुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी का भी यही कहना है कि अनंत सिंह ने ही दुलारचंद यादव जिन्हें वो दुलारचंद चाचा कहते थे, उनकी हत्या करवाई है.

हत्या का चुनाव पर क्या हो सकता है असर?

दुलारचंद यादव की हत्या और अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद मोकामा में राजनीतिक हालात अचानक से बिलकुल बदल गए हैं. प्रभात के पाॅलिटिकल एडिटर मिथिलेश कुमार बताते हैं कि मतदान से पहले मोकामा में हुई दुलारचंद की हत्या और अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने यहां वोटर्स की गोलबंदी करा दी है. यहां हालात ऐसे बन गए है कि यह चुनाव अगड़ों और पिछड़ों के बीच की लड़ाई बन गया है. दुलारचंद यादव की हत्या से जहां यादव और पिछड़ों का वोट एकजुट हुआ है, वहीं अब भूमिहार और अन्य फारवर्ड क्लास के लोग भी एकसाथ आ गए है. यह पूरी तरह से कास्टवार का खेल होगा. इसमें किसको फायदा और किसको नुकसान होगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन अभी माहौल कास्टवार का ही है.

अनंत सिंह को हीरो मानने वाले लोग इसे क्यों बता रहे हैं साजिश?

Anant-Singh
अनंत सिंह

दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हो गई है, लेकिन उनके समर्थक इसे साजिश बता रहे हैं. प्रभात खबर के साथ बातचीत में अनंत सिंह के समर्थकों ने कहा कि कई वीडियो वायरल है, लेकिन कहीं भी यह नहीं दिख रहा है कि अनंत सिंह ने उनकी हत्या की है. वीडियो में तो यह दिख रहा है कि उनका काफिला जाने के बाद दुलारचंद यादव उनपर पत्थर फेंक रहा है. अगर अनंत सिंह उसे मारकर चले गए थे, तो फिर वह जिंदा कैसे हो गया. कई समर्थक यह मानते हैं कि अनंत सिंह के खिलाफ सूरजभान सिंह ने साजिश रही है.

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गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह ने क्या कहा?

दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा है, जिसमें उसने सत्यमेव जयते लिखा है और कहा है कि अब आगे की लड़ाई जनता लड़ेगी. दुलारचंद यादव की हत्या के बाद लगे आरोपों को खारिज करते हुए अनंत सिंह ने यह कहा कि यह उनके प्रतिद्वंद्वी सूरजभान सिंह की साजिश है. उनका इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है.

कैसे हैं मोकामा के हालात?

दुलारचंद यादव की हत्या और अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद मोकामा के हालात बहुत गंभीर हैं. दुलारचंद यादव और अनंत सिंह के समर्थक भिड़ने के लिए तैयार हैं. प्रभात खबर के साथ बातचीत में दुलारचंद के समर्थकों ने यह स्पष्ट कहा है कि उन्हें अनंत सिंह के लिए फांसी चाहिए. अनंत सिंह के समर्थक जो उन्हें अपना आदर्श मानते हैं, वे लगातार यह कह रहे हैं कि अनंत सिंह के खिलाफ साजिश हुई है और उन्हें चुनाव के वक्त फंसाया गया है, ताकि चुनाव के दौरान मतदान पर असर हो. इस स्थिति में मोकामा के हालात बहुत खतरनाक बन चुके हैं. समर्थकों की स्थिति ऐसी है कि वे मरने-मारने पर उतारू हैं.

क्या है अनंत सिंह का प्रोफाइल?

अनंत सिंह मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं. 2022 में उन्हें एके 47 रखने के केस में 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई थी, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, जिस वजह से अब वे किसी भी मामले में दोषी नहीं है और एक बार फिर मोकामा से चुनावी मैदान में हैं. अनंत सिंह पटना के बाढ़ इलाके के रहने वाले हैं, उनके गांव का नाम नादवां है. अनंत सिंह की उम्र 64 वर्ष है. उन्होंने नीलम देवी से प्रेम विवाह किया है. उनके बड़े भाई भी दिलीप सिंह भी मोकामा के विधायक रहे थे. अनंत सिंह को छोटे सरकार के नाम से जाना जाता है. 2025 के एफिडेविट के अनुसार उनपर 28 केस दर्ज है, जिनमें से चार केस हत्या के और छह केस हत्या की कोशिश के भी हैं. अनंत सिंह साक्षर हैं, लेकिन उनकी स्कूली शिक्षा भी नहीं हुई है. उनके पास 37.88 करोड़ की संपत्ति है. अनंत सिंह के समर्थकों में ना सिर्फ भूमिहार जाति के, बल्कि पिछड़े तबके के लोग भी हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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