ब्रह्मांड के पांच ऐसे ग्रह जो भविष्य में बन सकते हैं इंसानों का ठिकाना

हमारी धरती सदियों से मानवों के रहने का ठिकाना रही है. कई तरह के जानवर और जीव जंतु भी यहां रहते है. लेकिन जिस तरह से पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिंग बढ रहा है उससे तो यही लगता है कि एक दिन धरती से मनुष्यों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा.
हमारी धरती सदियों से मानवों के रहने का ठिकाना रही है. कई तरह के जानवर और जीव जंतु भी यहां रहते है. लेकिन जिस तरह से पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिंग बढ रही है उससे तो यही लगता है कि एक दिन धरती से मनुष्यों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा. ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते धीरे-धीरे हमारा पृथ्वी विनाश की ओर गति कर रहा हैं. इसलिए पृथ्वी के अलावा रहने लायक ग्रहों की खोज में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं. नासा के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में कई ऐसे ग्रहों की खोज भी की है जो भविष्य में हमारा ठिकाना बन सकतें हैं. हम ऐसे पांच ग्रहों के बारे में बता रहे है जहां भविष्य में इंसान अपना बसेरा बना सकते हैं.

केप्लर 22बी
केप्लर-22बी केप्लर टेलिस्कोप से खोजा गया सबसे पहला और सबसे अनोखी इंसानों के लिए रहने लायक ग्रह है. हमारे से यह 6 सौ प्रकाश वर्ष दूर यह स्थित है. इसकी खोज 2011 में हुई थी और यह हमारे पृथ्वी से आकार में करीब ढाई गुना बड़ा हैं. इसकी सतह का तापमान 22 डिग्री सेल्सियस हैं. इसके सतह का तापमान हम इंसानों के लिए बिलकुल अनुकूल हैं.

ग्लिएस 667सीसी
ग्लिएस 667सीसी एक नक्षत्र हैं , जो की हमसे 22 प्रकाश वर्ष दूर ट्रिपल स्टार सिस्टम में स्थित हैं. इस नक्षत्र के चारों तरफ 6 ग्रह चक्कर काटते हैं. इनमें से 3 ग्रह इंसानों के लिए रहने लायक हैं. ग्लिएस 667सी पृथ्वी के आकार से 1.8 ज्यादा बड़ा हैं और इसे एक बार परिक्रमा करने में 28 दिन का समय लगता हैं.

एचडी 85512बी
इसकी खोज 2011में हुई थी. उसी समय से वैज्ञानिक लगातार इसपर शोध कर रहे हैं. यह हमारी धरती से 35 प्रकाश वर्ष दूर है. यह ग्रह हमारी पृथ्वी से 3.6 गुना ज्यादा बड़ा हैं और इंसानों के लिए बिलकुल रहने योग्य है. इस ग्रह के सतह का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास है.

ग्लिएस 581जी
पृथ्वी के अलावा रहने लायक ग्रहों में ग्लिएस 581जी भी शामिल है. वैज्ञानिक अभी भी इस के बारे में सटीक जानकारी ढूंढने में लगे हैं.
यह ग्रह काफी ज्यादा पृथ्वी से मिलता जुलता हैं. इसलिए इसको पृथ्वी का क्लोन भी कहा जाता हैं.

ग्लिएस 581डी
इस ग्रह की खोज 2007 में हुई थी. ग्रीन हाउस गैस के मौजूदगी से यह पृथ्वी की तरह ही प्रतीत होता हैं. वैसे तो यह ग्रह ठंडा हैं, लेकिन ग्रीन हाउस इफैक्ट के कारण इस का तापमान बढ़ जाता है. यह भी भविष्य में इंसानों का ठिकाना बन सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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