पटना के महावीर मंदिर में समारोहपूर्वक मनी तुलसी जयंती, पंडित भवनाथ झा ने किया कार्यक्रम का संचालन

वक्ताओं ने कहा कि ऐसे समय में जब भारतवर्ष में धर्म की हानि हो रही थी, समाज बिखर रहा था, गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम के चरित्र को केन्द्र में रखकर सम्पूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोने का महान कार्य किया.
रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती महावीर मंदिर प्रांगण में गुरुवार को मनायी गयी. मंदिर प्रांगण में स्थित गोस्वामीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई. महावीर मंदिर के पुजारी आचार्य अवधेश दास ने गोस्वामी तुलसीदास की आरती एवं पूजन किया. इसके बाद मंच से वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं और उनकी उपलब्धियों की विस्तार से चर्चा की.
कार्यक्रम का संचालन करते हुए धर्मायण के संपादक पंडित भवनाथ झा ने कहा कि गोस्वामीजी ने रामचरितमानस की रचना कर धर्म को व्यापक बनाया और भगवान राम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाया. वक्ताओं ने कहा कि ऐसे समय में जब भारतवर्ष में धर्म की हानि हो रही थी, समाज बिखर रहा था, गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम के चरित्र को केन्द्र में रखकर सम्पूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोने का महान कार्य किया.
सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी के उस कालखंड में शैव, वैष्णव, शाक्त आदि सम्प्रदायों में बंटकर सनातन धर्म आपसी झगड़ों में उलझकर कमजोर हो रहा था. गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना कर उसे जन-जन के लिए सुलभ किया. जबकि विनय पत्रिका में सभी देवी-देवताओं की स्तुति कर विभिन्न सम्प्रदायों में बंटे सनातन धर्म को एक करने का प्रयास किया.
संस्कृत के विद्वान डाॅ सुदर्शन श्रीनिवास शांडिल्य ने इस अवसर पर कहा कि गोस्वामीजी जी के साहित्य और उनकी काव्य शैली आने वाले हजारों वर्षों तक जनमानस का मार्गदर्शन करते रहेंगे. इस अवसर पर डाॅ रामप्रिय शर्मा ने रामचरितमानस में वर्णित विभिन्न प्रसंगों में गोस्वामी जी द्वारा जनमानस को दिए गए संदेशों और जीवन-दर्शन की विस्तार से चर्चा की.
संत घनश्याम दास हंस ने भी गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन और कृतित्व पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम के शुरुआत में निरंजन दास ने तुलसीदास रचित गणेश वंदना का पाठ किया. महावीर मन्दिर के वरीय प्रबंधक पीएस चन्द्रन, प्रबंधक वीर बहादुर सिंह, दिनकर कुमार, अवकाश कुमार आदि मौजूद थे.
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महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल अयोध्या प्रवास पर होने के कारण इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके. अपने संदेश में उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के माध्यम से सम्पूर्ण मानव जाति को जीवन जीने का दर्शन गोस्वामी तुलसीदास जी ने दिया है. महावीर मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास जी और संत शिरोमणि रविदास जी की प्रतिमाएँ स्थापित हैं और प्रत्येक वर्ष इन महान संतों की जयन्ती समारोह पूर्वक मनायी जाती है.
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