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Jharkhand: पलामू में 1.22 लाख से अधिक आय, जाति व आवासीय के मामले पेंडिंग, ऑफिस का चक्कर लगा थक चुके छात्र

Updated at : 08 Oct 2022 9:22 PM (IST)
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Jharkhand: पलामू में 1.22 लाख से अधिक आय, जाति व आवासीय के मामले पेंडिंग, ऑफिस का चक्कर लगा थक चुके छात्र

पलामू जिले के 20 अंचलों में आय, जाति व आवासीय के एक लाख 22 हजार 447 मामले लंबित हैं. इसके कारण विद्यार्थियों का आय, जाति व आवासीय प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है. झारखंड सरकार द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है, लेकिन छात्र फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं.

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Jharkhand News: पलामू जिले के 20 अंचलों में आय, जाति व आवासीय के एक लाख 22 हजार 447 मामले लंबित हैं. इसके कारण विद्यार्थियों का आय, जाति व आवासीय प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है. झारखंड सरकार द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया है. फॉर्म भरने के लिए आय, जाति व आवासीय की आवश्यकता है. ऐसे में विद्यार्थी कार्यालयों का चक्कर लगाकर परेशान हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है. राजस्व उपनिरीक्षकों की हड़ताल के कारण ये स्थिति उत्पन्न हुयी है.

हड़ताल से छात्रों की बढ़ी परेशानी

राजस्व उपनिरीक्षकों की हड़ताल के कारण किसी भी व्यक्ति का जाति, आवासीय, आय व ईडब्ल्यूएस जैसा प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है क्योंकि प्रमाण पत्र बनाने के लिए कर्मचारी की जांच रिपोर्ट जरूरी है. पिछले 20 सितंबर 2022 से विभिन्न मागों को लेकर राजस्व उपनिरीक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चल रही है. हड़ताल के कारण आम लोगों के साथ-साथ सरकारी कामकाज भी पूरी तरह से प्रभावित हो गया है. जमीन संबंधी कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं. कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य लंबित हैं, जबकि सरकार के नियमानुसार जाति, आवासीय, आय व ईडब्ल्यूएस के लिए 30 दिनों के अंदर रिपोर्ट देने का प्रावधान है.

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कैथी खतियान से नहीं बन पा रहा है प्रमाण पत्र

कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सभी तरह के प्रमाण पत्र बनने में समस्या आ रही है. कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट के बिना किसी भी प्रकार का प्रमाण पत्र नहीं बन सकता है. आम जनता का कहना है कि कैथी खतियान ज्यादातर लोगों को समझ में नहीं आती है. इसके लिए लोग हिंदी में उसका अनुवाद कर खतियान निकलवाते हैं, जबकि हिंदी में निकालने पर उसमें अधिकतर में जाति का उल्लेख नहीं होता है, जो कैथी खतियान को हिंदी में करवाकर निकालते हैं उस पर मुहर की समस्या आ जाती है. जिसके कारण भी लोगों को सर्टिफिकेट बनवाने में परेशानी हो रही है क्योंकि जिस समय कैथी में खतियान लिखी गयी थी. उस समय की मुहर लोगों के पास उपलब्ध नहीं है. कर्मचारी हिंदी में लिखी हुई खतियान को तरजीह नहीं देते हैं.

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कितने आवेदन हैं लंबित

जाति प्रमाण पत्र 36909, क्रीमी लेयर के बीसी वन व बीसी टू का 17194, नन क्रीमी लेयर के बीसी वन व बीसी टू का 3403, ओबीसी के 1854, अनुसूचित जाति के 9626, अनुसूचित जनजाति के 4832 प्रमाण पत्र लंबित हैं, जबकि पलामू जिले में 26707 लोगों का आय प्रमाण पत्र लंबित है. 58 हजार 831 लोगों का आवासीय प्रमाण पत्र पेंडिंग है. ये आंकड़े सात अक्टूबर 2022 तक के हैं.

केस डिटेल्स

राजू मांझी (पिता रामराज मांझी) सदर प्रखंड के रहने वाले हैं. उनका जाति प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बन पाया है, जबकि उनके द्वारा अगस्त महीने में ही आवेदन किया गया था.

केस नंबर दो

नंदकिशोर पाल (पिता दुर्योधन पाल) सदर प्रखंड के रहने वाले हैं. ओबीसी सर्टिफिकेट बनाने के लिए उन्होंने आवेदन दिया था, लेकिन अब तक नहीं बन पाया है.

केस नंबर तीन

आबादगंज के अंकित कुमार बताते हैं कि जून महीने में उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन तीन माह गुजर जाने के बाद भी जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाया है.

रिपोर्ट : चंद्रशेखर सिंह, मेदिनीनगर, पलामू

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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