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नियम विरुद्ध है वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई, पढ़ें आनंद कुमार का आलेख

Updated at : 06 Jan 2026 7:01 AM (IST)
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US action in Venezuela

नियम विरुद्ध है वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई

US Action In Venezuela: वेनेजुएला का संकट यह संदेश देता है कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का तरीका और परिणाम सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डालते हैं. वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. ऐसे में, दीर्घकालिक अस्थिरता क्षेत्रीय सुरक्षा को जोखिम में डाल सकती है. इस घटनाक्रम ने भारत के सामने भी जटिल कूटनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है. भारत जैसे देशों के सामने अपनी रणनीतिक, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों के पक्ष में अपना नैतिक नेतृत्व जारी रखने की चुनौती है.

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US Action In Venezuela: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान ने न केवल उस देश की राजनीतिक स्थिरता को झकझोर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है. वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के विरुद्ध अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य ड्रग तस्करी और गैंगवार पर अंकुश लगाना बताया जाता है, पर एक बड़ा कारण शायद वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करना भी है. वेनेजुएला चीन को तेल दे रहा था. जबकि अमेरिका नहीं चाहता था कि लैटिन अमेरिका में चीन की पैठ बढ़े. अमेरिका ने मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी गिरफ्तार किया, क्योंकि ड्रग्स की अवैध तस्करी में उन पर भी आरोप हैं. मादुरो के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य यदि ड्रग कार्टेल को दंडित करना है, तो भी यह तरीका चिंतनीय है, जिसमें एक संप्रभु देश के निर्वाचित राष्ट्रपति को बिना किसी अंतरराष्ट्रीय जनादेश के गिरफ्तार किया गया और देश से बाहर ले जाया गया. यह घटना वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. किसी संप्रभु देश के निर्वाचित राष्ट्रपति को बिना अंतरराष्ट्रीय सहमति और कानूनी प्रक्रिया के बाहर ले जाना अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रत्यर्पण नियमों का उल्लंघन है. यह घटना एक खतरनाक उदाहरण पेश करती है कि कैसे शक्तिशाली देशों की एकतरफा कार्रवाई वैश्विक नियमों को कमजोर कर सकती है.

अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार कर उन्हें न्यूयॉर्क ले जाने के बाद उनके खिलाफ ड्रग और हथियारों से संबंधित आरोप लगाये हैं. ट्रंप का दावा है कि वेनेजुएला पर उनका अस्थायी नियंत्रण क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करेगा तथा अमेरिकी तेल कंपनियों को देश में संचालन की अनुमति देगा. लेकिन इस कदम की वैधता और कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठते हैं. अमेरिकी कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के बिना अंजाम दिये गये इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के नियमों को चुनौती दी है. ट्रंप प्रशासन ने हालांकि इसे सुरक्षा और न्याय के दृष्टिकोण से आवश्यक बताता है, पर लंबी अवधि में इस कार्रवाई का प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है. वेनेजुएला की स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण है.

राष्ट्रपति मादुरो की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी राष्ट्रपति नियुक्त किया है, पर रोड्रिग्ज ने स्पष्ट किया है कि मादुरो ही देश के वैध राष्ट्रपति हैं. उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की है. स्थानीय जनता ने हालांकि फिलहाल बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन नहीं किया है. ऐसा शायद इसलिए कि लोग अभी इस अप्रत्याशित घटना को समझने की कोशिश कर रहे हैं. प्रवासी समुदाय ने हालांकि अमेरिकी कार्रवाई का जश्न मनाया, पर अधिकांश लोग भविष्य के प्रति अनिश्चित हैं. वेनेजुएला चूंकि पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, ऐसे में, इस घटनाक्रम से देश में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया इस मामले में स्पष्ट रूप से विभाजित रही है. संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में देखा है. रूस, चीन, तुर्की और कई अन्य देश इसकी आलोचना कर चुके हैं. जो देश मादुरो के शासन से असहमत थे, उन्होंने भी अमेरिकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दी. यूरोपीय संघ ने मादुरो के शासन की वैधता नकारी है, पर अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध बताया है. लैटिन अमेरिकी देशों ने अमेरिका को चेताया है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए खतरा है. हालांकि इस्राइल जैसे कुछ देशों ने मादुरो के हटने का स्वागत किया है. पर वैश्विक प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि अमेरिका का एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप कई देशों के लिए अस्वीकार्य है और यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संतुलन को चुनौती देता है. वेनेजुएला संकट का क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव भी गंभीर है.

लैटिन अमेरिका में शांति और स्थिरता खतरे में है. कैरीबियाई हवाई क्षेत्र पर अमेरिकी प्रतिबंधों और हवाई यातायात में व्यवधान ने क्षेत्रीय परिवहन और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. पड़ोसी देशों ने सीमा सुरक्षा बढ़ायी है और मानवीय संकट की संभावना के लिए तैयार हैं. वेनेजुएला में दीर्घकालिक अस्थिरता क्षेत्रीय सुरक्षा को जोखिम में डाल सकती है. वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नये प्रश्न खड़े किये हैं. इस घटना से यह भी स्पष्ट है कि वैश्विक राजनीति में शक्ति और कानून के बीच हमेशा संघर्ष रहता है. अमेरिका ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, पर कानूनी और नैतिक दृष्टिकोण से उसे व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा.

वेनेजुएला का संकट यह संदेश देता है कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का तरीका और परिणाम सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डालते हैं. ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, संयम और नियम आधारित व्यवस्था का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है. वेनेजुएला के घटनाक्रम ने भारत के सामने भी जटिल कूटनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है. भारत ने पिछले वर्षों में अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक और सुरक्षा संबंध मजबूत किये हैं, पर यह कार्रवाई भारत के लंबे समय से निभाये गये नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण के सिद्धांतों से टकराती है. भारत के लिए यह प्रश्न उठता है कि उसे अपने रणनीतिक संबंधों, वैश्विक न्याय, संप्रभुता और गैरहस्तक्षेप के अपने नैतिक सिद्धांतों में संतुलन कैसे बनाये रखना है. भारत और वेनेजुएला के बीच संबंध अब सीमित हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर आधारित हैं, पर अमेरिका के इस कदम ने वैश्विक दक्षिण और अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से भारत की भूमिका को चुनौती दी है.

अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध और व्यापारिक हितों को देखते हुए भारत को सावधानीपूर्वक संतुलन बनाये रखना होगा. साथ ही, उसे वैश्विक दक्षिण और अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से अपने नैतिक सिद्धांतों का पालन भी करना होगा. वेनेजुएला की स्थिति पर चिंता जताते हुए हमारी सरकार ने अपने नागरिकों को वहां की गैरजरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है, साथ ही, वहां मौजूद भारतीय समुदाय से अत्यधिक सावधानी बरतने और आवाजाही सीमित रखने के लिए कहा है. भारत जैसे देशों के सामने अपनी रणनीतिक, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों के पक्ष में अपना नैतिक नेतृत्व जारी रखने की चुनौती है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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आनंद कुमार

लेखक के बारे में

By आनंद कुमार

आनंद कुमार नई दिल्ली स्थित विश्लेषक हैं, जिनकी विशेषज्ञता रणनीतिक मामलों, सुरक्षा मुद्दों और दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में है। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित थिंक टैंकों में कार्य किया है। वे चार पुस्तकों के लेखक और दो संपादित ग्रंथों के संपादक हैं। उनकी नवीनतम पुस्तक Strategic Rebalancing: China and US Engagement with South Asia है।

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