कोचिंग पर नियमन

Published by : संपादकीय Updated At : 23 Oct 2024 6:25 AM

विज्ञापन

न्यायालय के सलाहकार वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोचिंग व्यवसाय से जुड़े अन्य अहम मसलों को भी चिह्नित किया है, जिनमें आग से सुरक्षा, शुल्क नियमन, छात्रों एवं कक्षाओं का अनुपात, छात्र-शिक्षक अनुपात, निगरानी कैमरे, चिकित्सा सुविधा, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान और परामर्श की व्यवस्था आदि शामिल हैं.

विज्ञापन

सर्वोच्च न्यायालय ने कोचिंग संस्थानों के लिए राष्ट्रव्यापी सुरक्षा मानकों की आवश्यकता को रेखांकित किया है. इस साल जुलाई में दिल्ली में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की दुखद मौत की घटना का न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया था. यह टिप्पणी उसी मामले की सुनवाई के दौरान की गयी. दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने केंद्र एवं राज्यों के वकीलों से सुझाव देने का अनुरोध किया है.

न्यायालय के सलाहकार वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोचिंग व्यवसाय से जुड़े अन्य अहम मसलों को भी चिह्नित किया है, जिनमें आग से सुरक्षा, शुल्क नियमन, छात्रों एवं कक्षाओं का अनुपात, छात्र-शिक्षक अनुपात, निगरानी कैमरे, चिकित्सा सुविधा, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान और परामर्श की व्यवस्था आदि शामिल हैं. उन्होंने इस मामले में सभी राज्यों को प्रतिवादी बनाने का सुझाव भी अदालत को दिया है. उल्लेखनीय है कि केवल सात राज्यों में कोचिंग संस्थान संचालन के बारे में कानून हैं. कुछ समय पहले केंद्र सरकार की ओर से कुछ निर्देश दिये गये थे, पर वे बाध्यकारी नहीं हैं.

दिल्ली समेत अनेक शहरों में कोचिंग सेंटरों में आग लगने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं. कोचिंग कर रहे छात्र भारी-भरकम शुल्क तो देते हैं, पर उन्हें समुचित सुविधाएं नहीं मुहैया करायी जाती हैं. आर्थिक मुश्किलों की वजह से उन्हें ऐसी बस्तियों में किराये पर कमरे लेने पड़ते हैं, जहां हर तरह का अभाव होता है. छात्रों की आत्महत्या कितनी विकराल समस्या बन चुकी है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि उनकी आत्महत्या की वृद्धि दर देश के जन्म दर से अधिक हो चुकी है. कोटा जैसी अनेक जगहों पर तो स्प्रिंग वाले पंखे लगाये गये हैं ताकि फंदे का इस्तेमाल न हो सके. खिड़कियों के बाहर इस्पात के जाल लगे हुए हैं. कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई का क्या स्तर है, इसका आकलन भी मुश्किल है.

देश में 30 हजार से अधिक कोचिंग सेंटर हैं और यह एक अव्यवस्थित उद्योग है. दो वर्ष पूर्व के अनुमानों के अनुसार, इस उद्योग का आकार 58 हजार करोड़ रुपये से अधिक है और 2028 तक इसके 1.33 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है. कोचिंग और ट्यूशन का कारोबार बढ़ने के साथ इससे जुड़े रियल इस्टेट का भी विस्तार हो रहा है. कई दुर्घटनाएं तो पहले से बने नियम-कानूनों की अनदेखी की वजह से होती हैं. प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार से भी सुरक्षा बदतर हुई है. नियमन होना चाहिए, पर निगरानी को भी दुरुस्त किया जाना चाहिए. यह सवाल भी है कि क्या नियमन और निगरानी सरकार के स्तर पर होगी या इसे उद्योग के जिम्मे छोड़ दिया जायेगा. कोचिंग सेंटर भी अपने मुनाफे से आगे देखना शुरू करें. साथ ही, शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार के लिए भी प्रयास होने चाहिए.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola